World suicide prevention day

 आज हमें पता चला है कि वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे है अगर मैं कहूं कि आत्महत्या करना पाप है, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए, तो मेरे जेहन में तुलसीदास जी की एक चौपाई आती है जिसमें विवरण दिया है , 

पर उपदेश कुशल बहुतेरे ।जे आचारहीं ते नर न घनेरे।। 

 

जिसका अर्थ है दूसरों को उपदेश देना बहुत आसान है ,पर अमल करना उतना ही कठिन । 

 

अगर मेरे पास कोई सलाह लेने आए, तो ऐसी- ऐसी सलाह दे सकती हूं ,कि कोई भी मुझे प्रकांड पंडित समझ बैठे। वास्तविक जिंदगी में किसी सरल सी बात को व्यवहार में लाना कितना कठिन है ,यह मेरे जैसे कई लोग बखूबी जानते हैं। 

अब बात आती है ,कि फिर भी आत्महत्या जैसी घटनाओं को कैसे रोका जाए ,इसके लिए मैं सबसे ज्यादा जिम्मेदार पीड़ित व्यक्ति के स्वयं से ज्यादा उसके मित्र, अपने और आसपास के लोगों को समझती हूं, अगर कोई आत्महत्या जैसा कदम उठाता है, तो उसकी इच्छा शक्ति इतनी दुर्बल क्यों हुई ,दोस्त या अपना होने की क्या आप की कोई जिम्मेदारी नहीं है ?उसको कोस कर आप अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं, किस बात के अपने या मित्र हैं आप? वह तो बीमार है ,उसकी जिम्मेदारी आपकीहै, या उसकी स्वयं की? 

दूसरे, किसी भी मनुष्य को चाहिए, कि किसी भी बात को इतना ज्यादा एनालिसिस ना करें ,कि दिमाग को पैरालाइसिस हो जाए ।भगवान ने जिंदगी जीने के लिए दी है, पोस्टमार्टम करने के लिए नहीं।गलतियां भी होंगी और गलत भी समझे जाएंगे l जी यह जिंदगी है ,तारीफ भी होगी और कोसा भी जाएगा, तो भइया हमार कहन तो ई ह, कि ऊपर वाले के हाथ डुगडुगी है, उसे बजा लेने दो जईसे उ बजान चाह ,अपने तो मौज करो और रोज करो । 

धन्यवाद

सिद्धि पोद्दार

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