तू मुझमे कहीं बाकी है

आज की तारीख देखकर अनु के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान तैर गई। वैसे तो हर रोज़ ही वो अपने परिवार की सलामती के साथ, उसके परिवार की सलामती की भी दुआ करती है| फिर आज तो उसका जन्मदिन है। पूजा करके उठी, पति, बेटी ऑफिस और स्कूल जा चुके थे। अलमारी में कपड़ों के नीचे दबी अपनी डायरी निकाल लाई, दरअसल ये स्लैम बुक थी उसकी, उसके स्कूल, कॉलेज के सभी दोस्तों ने बड़ी प्यारी प्यारी और मजेदार बातेंं लिखी थीं उसके बारे में। वो थी भी तो चुलबुली और शरारती, सावला रंग, लेकिन तीखे नैन नक्श| जब देखो हंसाना खिलखिलाना। अभी डायरी खोली ही थी, पहले पेज पर लिखा था “ये डायरी मेरे लिए बहुत कीमती है, जबतक मैं हूँ ये डायरी मेरे साथ रहेगी।” तभी कुछ सूखे हुए गुलाब डायरी के पन्नोंं से फिसल कर ज़मीन पर गिर गए, उसनें जल्दी से उन्हें उठाया और पन्नें पलटने लगी| आकाश का नाम पढ़ते ही उसके हाथ रुक गए।

नाम: आकाश

डेट आफ बर्थ: 8 अगस्त

फेव. सॉन्ग : खोया खोया चाँद रहता है आसमां के पास

आई लव: माय सिस्टर्स एंड यू

और भी बहुत कुछ लिखा था, लेकिन आँखें आँँसुओं से भर गई थी| आगे कुछ पढ़ नहीं पाई, बस आँखें मूंदकर लेट गई और न चाहते हुए भी मन पीछे दौड पड़ा। अनु और आकाश बचपन के दोस्त थे, एक ही मोहल्ले में रहते थे| दिनभर साथ साथ खेलते थे, अक्सर कौन झूले में ऊँची पेंग भरता है इस बात को लेकर झगड़ पड़ते और फिर अगले ही पल मान भी जाते। थोडे़ बड़े हुए तो अनु के पापा का ट्रांसफर दूसरे शहर हो गया और ये दोस्ती वहीं खत्म हो गई। कई सालों बाद अनु के पापा का तबादला वापस उसी शहर में हो गया| फिर वही गलियाँ, वही लोग, बदल गई थी तो अनु, अब वो छोटी सी अनु नहीं, एडल्ट बन गई थी| यौवन की दस्तक ने उसके सांंवले सौंदर्य पर चार चाँद लगा दिए थे। बदल तो आकाश भी गया था, पढ़ने में तेज, बस किताबें और क्रिकेट ही उसकी दुनिया थे। दोनो ने एक दूसरे को सालों बाद देखा और बस औपचारिकता वश मुस्कुरा दिए।

संयोग से अनु ने भी उसी कॉलेज में एडमीशन लिया जहाँ आकाश पढ़ता था। पहला साल तो अनु का कॉलेज और सिलेबस समझनें में चला गया कि परिक्षाएं आ गई। अनु ने मेहनत तो खूब की थी, लेकिन न जानें कैसे दो सब्जेक्ट्स में सप्लीमेंट्री आ गई| अनु के लिए यह बिल्कुल अप्रत्याशित था, घर में भी खूब डाँट पड़ी| सबने कहा सीखो कुछ आकाश से, जाओ और उसके नोट्स लेकर आओ। अनु बेमन से आकाश के पास गई जो अपने लॉन में क्रिकेट खेल रहा था। इतनें सालों बाद दोनो पहली बार बात कर रहे थे “हाय अनु, कहो कैसे आना हुआ”? “मुझे तुम्हारे फस्ट इयर के नोट्स चाहिए|” “क्यों क्या हुआ?” न जाने क्यों अनु आकाश को देखकर रो पड़ी, बिल्कुल वैसे जैसे बचपन में रोती थी जब घर में डाँट पड़ती थी “देखो ना आकाश कितनी मेहनत की थी मैंने और पेपर भी अच्छे हुए थे फिर भी न जानें कैसे सप्लीमेंट्री आ गई|” अनु ने रोते हुए कहा। “अरे अनु रोओ नहीं, इस बार ठीक से चेकिंग नहीं हुई, बहुत से लोगों की आई है, मेरे नोट्स लो और मैं भी मदद करूँगा| देखना तुम जरूर पास हो जाओगी” आकाश नें समझाते हुए कहा।

फिर आकाश, अनु की हर संभव मदद करता| दोनो साथ ही ट्यूशन भी जाते, अनु अच्छे से पास हो गई, लेकिन ये सिलसिला रुका नहीं| नोट्स का आदान प्रदान भी नहीं रुका| एक बार अनु, आकाश के नोट्स देख रही थी कि आखिरी पन्ने पर देखा एक लड़की का स्केच बना हुआ था। अनु को मौका मिल गया आकाश को छेडने का,अनु अब अक्सर उसे छेडने लगी “आकाश बताओ ना कौन है वो लड़की” और आकाश बड़ी सफाई से बात बदल देता। लेकिन अनु नें छेड़ना नहीं छोडा| एक दिन अनु नोट्स लेने आकाश के पास गई, तो आकाश ने कहा “इसमें तुम्हारे सवाल का जवाब लिखा है” अनु दौड़कर घर आई और जल्दी से वो आखिरी पन्ना खोला, उसमें लिखा था “ये तुम हो अनु, क्योंकि मैं तुमसे बेहद……”। अनु तो जैसे काटो तो खून नहीं, एक तो उसके खानदान में प्यार जैसे शब्द का नाम लेना भी गुनाह था, दूसरा आजतक उसे किसी लड़के ने प्रपोज तक नहीं किया था| तीसरा वो आकाश को केवल अपना सबसे अच्छा दोस्त समझती थी। दूसरे दिन आकाश उसका ट्यूशन के लिए इंतज़ार करता रहा, वो उसके सामने से बिना कुछ बोले निकल गई। आकाश ने बहुत कोशिश की लेकिन उसने बस इतना कहा “मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी आकाश”। उसने आकाश से बात करना बिल्कुल बंद कर दिया, कॉलेज भी बदल लिया और उसके पापा नें घर भी बदल दिया, तो संपर्क के सभी साधन बंद हो गए। लेकिन न जाने क्यों उसका मन अक्सर आकाश को याद करता था।

लगभग एक साल बाद अचानक उसे फोन आया “हैलो अनु, मैं आकाश बोल रहा हूँ” इतना सुनना था अनु ने जोर से डाँटकर कहा “ईडियट कोई इतना टाइम लगाता है क्या फोन करनें में?” “तूने कुछ कहा ही नहीं, मुझे लगा तू नाराज है मुझसे” “हाँ हूँ नाराज़, तो तू मुझे मनाएगा भी नहीं?” कहते हुए अनु रो पड़ी। “अच्छा बाबा सॉरी, कल मिल ना मुझसे” “ओके” कहकर अनु ने फोन रख दिया और खुद से सवाल करनें लगी ये क्या हो गया है अनु तुझे? संभल जा, घर में पता चला ना तो मार डालेंगे तुझे” पर अनु तो जैसे कुछ सुनना और समझना ही नहीं चाहती थी। अगले दिन आकाश से मिली, दोनो काफी देर तक खामोश थे, फिर आकाश नेंं कहा “अनु मैं अब भी तुझसे बेहद…” आकाश कहते कहते रुक गया। “आकाश मैं भी तुम्हें पसंद करती हूँ, लेकिन मुझे पता है हमारे घर वाले कभी नहीं मानेंगे” अनु नेे सकुुचाते हुए कहा। अनु अभी काफी वक्त है हमारे पास, कॉलेज खत्म होने दे, मुझे कुछ बन जानें दे, मैं खुद मनाऊँगा हम दोनोंं के घरवालों को” आकाश नें प्यार से कहा। दोनों प्रेम के अथाह सागर में डूब गए, आकाश, अनु का गुरू, सखा, प्रेमी सबकुछ था| भविष्य के सपने बुनते कॉलेज कब खत्म हो गया पता ही नहीं चला।

अनु घर में बड़ी थी और शायद उनके प्यार की उड़ती उड़ती खबर घर भी पहुँच चुकी थी। इसलिए उसके घर वाले अचानक ही उसकी शादी के लिये हड़बडाने लगे| जब अनु ने ये बात आकाश को बताई तो जैसे उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई “इतनी जल्दी कैसे अनु? मुझे अभी और पढ़ना है फिर नौकरी ढूंढनी है, कम से कम पाँच साल लगेंंगे” आकाश नेें चिंंतित स्वर मेें कहा। “मैैं जानती हूँ आकाश, लेकिन हम एक बार चलकर घर वालों से बात करते हैं, हमारे बारे में, उन्हें मनाएंगे, थोड़ा वक्त माँगेंगे” अनु नेे समझातेे हुुुए कहा “अच्छा और..क्या कहेंगे अनु? मैं आपकी बेटी से बहुत प्यार करता हूँ, लेकिन अभी बेकार हूँ, मुझे पाँच साल का वक्त चहिये और वो खुशी खुशी हाँ बोल देंगे, है ना?” आकाश नेें झुुुझलाते हुुुए कहा। “तो चाहते क्या हो तुम? जहाँ वो कहे वहाँ कर लूँ शादी?” अनु नेे भी आवेेेष से कहा। “मुझे नहीं पता जैसा तुम्हें ठीक लगे करो” आकाश ने कहा “ठीक है, आकाश जा रही हूँ, कर लूँगी जिससे भी कराएगें शादी| फिर मत कहना” कहकर अनुु रोतेे हुए चली गई।

जल्द ही घर वालों नेंं अनु के लिए सुयोग्य वर ढूँढ लिया। अनु ने बहुत कोशिश की आकाश को मनाने की, लेकिन वो तो जैसे पत्थर की मूरत बन गया था। अनु की शादी हो गई, उसकी बस एक ही शर्त थी कि उसे इस शहर से बहुत दूर भेज दिया जाए। छोटे से शहर से इस बड़े महानगर में आ गई थी, खुद को पूरी तरह से अपने परिवार में रमा दिया था, लेकिन उसके मन का एक कोना अब भी आकाश की यादों से सजा था। पाँच साल हो गए थे। एक प्यारी सी बेटी खुशी की माँ बन गई थी अनु। एक दिन एक फोन आया, उधर से सिर्फ सिसकियों की आवाज़ आ रही थी, अनु कुछ ही पलों में समझ गई आकाश की आवाज़ को “अनु यार वापस आ जा, मैं तेरे बिना नहीं रह सकता, प्लीज माफ कर दे, मैं डर गया था कि तुझे अच्छी जिंदगी दे पाऊँगा या नहीं| इन पाँच सालों में एक पल ऐसा नहीं जब मैनें तुझे याद न किया हो”आकाश ने भरे गले से कहा।

दोनों फोन पकडे़ काफी देर तक रोते रहे “तू पागल है क्या और ये क्या हाल बना रखा है अपना, चल रोना बंद कर मैं हूँ ना, मैं फोन करती हूँ तुझे” कहकर अनु ने फोन रख दिया| एक पल को लगा भागकर चली जाऊँ आकाश के पास, लेकिन अगले ही पल अपने पति और बेटी का खयाल आया और अपनी सोच पर गुस्सा भी आया। लेकिन आकाश को ऐसे नहीं छोड़ सकती थी| अगले दिन फोन किया और धीरे धीरे समझाना शुरू किया कि वो खुश है अपनी इस नई जिंदगी में और उसे भी आगे बढ़ना चाहिए, शादी करनी चाहिए|” काफी वक्त लगा, लेकिन आकाश मान गया| उसने शादी कर ली।उसकी वाइफ बहुत प्यारी है। अनु फेसबुक पर उसकी फैमली पिक्स देखकर खुश होती रहती है। आकाश को मुस्कुराते देखकर उसके दिल को तसल्ली मिलती है। वो भी खुश है अपने परिवार के साथ, लेकिन दिल का एक कोना अब भी आकाश के लिए धड़कता है| हाँ आकाश दिल के किसी कोने में अब भी बाकी है, उसे अब भी आकाश से प्यार है और पहला प्यार इतनी आसानी से भुलाया भी तो नहीं जाता| लेकिन ये प्यार उतना ही पवित्र है जितना मंदिर में जल रहा दिया, जो खुद को जलाकर उसके घर को रौशन कर रहा है।

“मम्मा” खुशी की आवाज़ से अनु अतीत से वर्तमान में आई “आ गया मेरा बच्चा!” कहते हुए उसने उन सूखे हुए गुलाबों को फिर डायरी में सहेज कर अलमारी मे रख दिया और आकाश की यादों को वापस दिल के कोने में बंद कर दिया।

प्यार एक खूबसूरत एहसास है, लेकिन जो प्यार अधूरा रह जाए वो दर्द भी बहुत देता है। क्या अनु का फैसला सही था? क्या आकाश ने अनु के साथ सही किया? आपके क्या विचार हैं इस बारे में? आपके सुझाव और विचारों का स्वागत है।

©मंजुला

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