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सौन्दर्य   सृष्टि   का   मूल   तत्त्व   है।   सृष्टि   के   बाहर   और   भीतर   सौन्दर्य   ही   आनंद   का   सर्वातिशायी   महाभाव   है।   वस्तुतः   यह   सम्पूर्ण   विश्व   उस   विराट   चेतना   की   सौन्दर्यमयी   अभिव्यक्ति   है।   बहती   हुई   नदियों   खिले   हुए   पुष्पों   लहराते   हुए   वनों   हिलोरे   लेता   सागर   बर्फ   से   ढकी   ऊँची – ऊँची   पहाड़   की   चोटियाँ   तारिकाओं   से   आच्छादित   आकाश – ये   सभी   सौन्दर्य   की   विराट   चेतना   को   उजागर   करते   हैं।   सृष्टि   की   मूल   चेतना   आनन्द   है   और   आनंद   की   प्राप्ति   में   सौन्दर्य – तत्त्व   सहायक   सिद्ध   होता   है। परं भक्त परं सौन्दर्य   के   पारखी   महाकवि   सूरदास   जी को सब जानते ही…

Happy deepawali
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Pramod Sahu   Pramod Sahu ( 14 August, 1991) is Raipur based International Rangoli Artist, Culturalist & Social Entrepreneur. At the Age of 7, he developed a passion for Rangoli. The artwork continued to extend its reach and professionally recognised as “Chhapaak – A Social Art Organization” Pramod Sahu works of Art live through his beautiful illustrations, in the form of 3D and Hyper Realistic Rangoli. From a very tender age, He developed a passion for Rangoli, Fascination towards colours kept on increasing and soon started to play with colours.…

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दुनिया की सबसे बड़ी हाईवे टनल 10 साल में बनकर तैयार, 10000 फुट है लंबाई दुनिया की सबसे लंबी हाइवे सुरंग ‘अटल सुरंग’ का निर्माण 10 सालों में पूरा कर लिया गया है. यह सुरंग (टनल) मनाली से लेह को जोड़ती है. इस टनल की लंबाई 10,000 फीट से अधिक है. सुरंग से मनाली से लेह की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी अटल सुरंग मनाली को लेह से जोड़ता है. यह दुनिया का सबसे लंबा हाइवे सुरंग जिसकी लंबाई दस हजार फीट से अधिक है. इस सुरंग को पूरा…

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 सामान्य ज्ञान का अगर कोई प्रश्न  मैं पूछूं हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया है तो  संभवत: अगर  किसी को जानकारी होगी तो वह जवाब  देगा कि राइट ब्रदर्स ने,  इसमें कुछ गलत भी नहीं है ,क्योंकि हम को पढ़ाया यही गया है।  या यह कह लो कि मीडिया का इतना प्रचार प्रसार ना होने के कारण या  अंग्रेजों की गुलामी के कारण, हमारे इतिहास से जो उठापटक की गई है सच को एकदम छुपा दिया गया।  कहा जाता है हवाई जहाज के निर्माण का श्रेय राइट बंधुओं को है.…

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  विश्वेश्वरैया का जन्मदिन यानी इंजीनियर्स डे भारत रत्न एम विश्वेश्वरैया   मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक में कोलार जिले के चिक्काबल्लापुर तालुका में हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेद चिकित्सक थे। वर्ष 1883 में इंजीनियरिंग की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने वाले एम. विश्वेश्वरैया का पसंदीदा विषय सिविल इंजीनियरिंग था। करियर के आरंभिक दौर में ही एम. विश्वेश्वरैया ने कोल्हापुर, बेलगाम, धारवाड़, बीजापुर, अहमदाबाद एवं पूना समेत कई शहरों में जल आपूर्ति परियोजनाओं पर खूब काम किया था। 1909…

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खुद्दार कहानी:न वीडियो शूट करते आता था, न एडिट करते, रोटी बनाते हुए पहला वीडियो किया था अपलोड, अब हर माह कमाती हैं 60 से 70 हजार रुपए यूट्यूब पर बबीता परमार के 4 लाख 22 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर, पहली बार पेमेंट मिला तो पूरे गांव में हुई थी बात   ये बात मई 2017 की है। हरियाणा के भिवानी जिले के नौरंगाबाद गांव में रहने वाली बबीता परमार रोज की तरह चूल्हे पर रोटियां बना रहीं थीं लेकिन इस दिन एक नई चीज हो रही थी। देवर भाभी…

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स्टूडेंट थे तो टीवी नहीं देखी, नये कपड़े नहीं खरीद पाते थे : आज दुनिया के सबसे ज्यादा सैलरी वाले CEO चेन्नई का वो लड़का नई शर्ट खरीदने से पहले भी कई बार सोचता था, क्योंकि उसे ऐसा लगता था कि ऐशो-आराम की चीजें खरीदने से कहीं उसे अपनी पढ़ाई की सामग्री से समझौता न करना पडे़। उसके जीवन में अगर परिवार के बाद कुछ था तो वो थी किताबें। पिता नौकरी जरूर करते थे लेकिन उनके दो कमरे के फ्लैट में टीवी नहीं थी सो उन्होंने स्टूडेंट रहते टीवी…

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 आज हमें पता चला है कि वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे है अगर मैं कहूं कि आत्महत्या करना पाप है, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए, तो मेरे जेहन में तुलसीदास जी की एक चौपाई आती है जिसमें विवरण दिया है ,  पर उपदेश कुशल बहुतेरे ।जे आचारहीं ते नर न घनेरे।।    जिसका अर्थ है दूसरों को उपदेश देना बहुत आसान है ,पर अमल करना उतना ही कठिन ।    अगर मेरे पास कोई सलाह लेने आए, तो ऐसी- ऐसी सलाह दे सकती हूं ,कि कोई भी मुझे प्रकांड पंडित समझ…

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मापदंड  अगर होता प्रेम नापने का मापदंड कोई , तो स्त्री होती उसकी इकाई, इस चेहरे पर देखता है पुरुष अपनी जीवन भर की कमाई परत दर परत सुख-दुख, उत्साह ,प्रेम के सम्मिश्रण की, एक और परत सहनशीलता की, दुनिया को बेहतर बनाने का इरादा, और खुशियों को समेटने की जिद, एक सरलता जो सिर्फ झुकना जानती है, एक मनुहार जो कभी प्रेम का विरोध नहीं करती आईने की तरह है स्त्री का चेहरा जिसमें रचता है पुरुष अपना मोहरा और देखता है अपना चेहरा अपनी ताकत अपना प्रेम सर्वस्व…

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