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आज फिर तुमपर नज़र पड़ गई  , तुम हमारी वो गलती जिसका ताउम्र हमें अफसोस रहेगा । काश !काश कि उस दिन हमने तुम्हे पीछे मुड़ कर न देखा होता “ आज भी याद है बनारस की गलियों मे घूमते हुए नज़र पड़ गई थी तुम पर। यूं लगा मानो बस तुम्हे हमारे लिए ही बनाया गया हो। तुम्हे देखकर ऐसा लगता था , जैसे बनाने वाले ने अपनी सारी कलाकारी तुम पर लुटा दी हो । तुम्हारा रंग , तुम्हारी छुअन,  बिल्कुल मक्खन की तरह और हल्की ऐसे जैसे…

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ऋषभ, सुनो ना, सुरभि ने कहा, हाँ बोलो सुरभि – मैं सुन रहा हूँ, ऋषभ ने मोबाइल में आँखें गडाए हुए कहा, इधर देखो मुझे, सुरभि ने कहा – हाँ बाबा लो रख दिया फोन, अब बोलो ऋषभ ने कहा | “मुझे ड्राइविंग सीखनी है” सुरभि ने ऋषभ का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा” | अरे तुम्हें ड्राइविंग सीखने की क्या जरुरत है, मैं हूँ ना तुम्हारा परमानेंट ड्राइवर, ऋषभ ने कहा और वैसे भी मैंडम मुझे अपनी कार बहुत प्यारी है,सो मैं उसे तुम्हें देने से रहा,…

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अनुराग के मम्मी पापा दोनों डॉक्टर है, और अब दीदी भी एम.बी.बी.एस के फाइनल इयर में है। जब से होश संभाला तब से बस यही सुनता आया है, अरे डॉक्टरों की फॅमिली है तुम्हारी,तुम तो डॉक्टर ही बनोगे. दोस्त भी यही कहते “इसका तो पैदा होते ही कैरियर फिक्स हो गया, ये तो डाक्टर बनेगा,हमे ही सोचना पडेगा कि हम क्या बनेंगे “. जब किसी के घर जाता तो वे कहते, “कुछ सीखो अनुराग से डॉक्टर बनेगा बड़ा होकर,तुम्हे तो ये ही नहीं पता कि बनना क्या है”. लेकिन अनुराग…

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घटना १- छः साल के आरव ने जब रोलर स्कैट्स सीखा तो मानो उसके माता-पिता के सपनों को पहिए लग गए, बेचारे आरव को सुबह चार बजे उठा दिया जाता और पाँच बजे से उसकी ट्रेनिंग शुरू हो जाती,फिर घर आकर स्कूल के लिए तैयार हो कर स्कूल जाता, दिन भर स्कूल में भी अव्वल आने का बोझ रहता.फिर घर आकर शाम को स्केटिंग की प्रेक्टिस के लिए जाना होता,इतना सब होने के बाद जब वो मासूम स्टेट लेवल चैंपियनशिप में अपने से बड़े बच्चोंं को हराकर सेकेंड पोजिशन में…

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अंग्रेज चले गए लेकिन अंग्रेजी यहीं छोड़ गए| अरे भाषा नहीं है मुसीबत है मुसीबत| नाक में दम कर रखा है, बोलो कुछ और मतलब कुछ और निकलता है| आदमी समझे कैसे बताओ भला?” शांति का बड़बड़ाना जारी था। “अरे क्या हुआ मेरी शांति? आज सुबह सुबह अशांति क्यों फैला रही हो?” राकेश जी ने अपनी दाढ़ी में शेविंग क्रीम लगाते हुए कहा| “देखो हम भी पढ़े लिखे हैं, डबल एम.ए हैं लेकिन ये जो आजकल के बच्चे गिटर-पिटर अंग्रेजी बोलते हैं ना हमको पल्ले नहीं पड़ती और हमको ये नहीं…

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लिखते लिखते आँखों से आँसू गिर रहे थे….अनुराग ने ख़त या यूँ कहे मेल लिखना शुरू ही किया था कि आँखे धुँधला गईं। डियर माँ पा,आज आपकी बहुत याद आ रही है।याद तो पिछले कई दिनों से आ रही है ,पर अब न, रहा नहीं जा रहा यूँ अकेले। जानता हूँ अपनी जिद से आया था यहाँ। बड़ी बड़ी डींगे भी हाँकी थी कि “आपलोग ना, बच्चा ही समझो मुझे…अरे ! मुझे सब आता है कर लूँगा मैनेज मैं। फलाना ढिमकाना। लेकिन जब से ये लॉकडाउन हुआ है ना, तब…

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फोन की घंटी लगातार बज रही थी….और सुरभी मेहमानों की आवभगत में लगी थी।कल घर में माँ जी नें कुलदेवी की पूजा रखवाई है, और ननद के बेटे का नामकरण भी है, इसलिए पूरा घर मेहमानों से भरा हुआ था।जब छटवीं बार फोन बजा तो सुरभी को काम छोड़कर जाना ही पड़ा। माँ का फोन था..लेकिन इस वक्त इतनी रात को माँ क्यों फोन कर रही है?जबकी वो अच्छे से जानती है अभी घर के क्या हाल है..अचानक ही उसका दिल आशंकाओ से भर गया। उसने डरते हुए फोन उठाया…

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ये कहानी नहीं सच्ची घटना है,तब हमने नया नया कॉलेज मे एडमीशन लिया था,16,17सल की उमर कितनी प्यारी होती है,सबकुछ अच्छा सा लगता है,उसपर कालेज का माहौल दिन भर दोस्तो का साथ,और ढेर सारी मस्ती ,समय जैसे पंख लगा कर उड रहा था।कॉलेज मे ठीक से पढाई नहीं होती थी,सो ट्यूशन ज्वाइन कर लिया था। वेद सर यही नाम था उनका,30,32साल के होगे,लंबे ,गोरे,लेकिन बेहद धीर एवं शांत,अकेले ही रहते थे,एकाउन्टस इतने अच्छे से समझाते थे,कि जो सवाल कॉलेज मेंं सर के ऊपर से चले जाते थे,वो उनके एक बार…

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सुनने के लिए तुम्हारे कान तरसे है,और आज भी देखो मैं तुम्हे कह नहीं रहा इस ख़त में लिख के दे रहा हूँ, ना ना ये नहीं सोचना कि सारी उम्र जिस घमंड की वजह से तुम्हे अपनी बेटी स्वीकर करने से बचता रहा, उसी घमंड की वजह से आज लिख के तुम्हे अपने मन की बात कह रहा हूँ.वो घमंड तो बरसों पहले चला गया ये तो शर्मिंदगी है मेरी,तुमसे नज़रें मिला कर अपने दिल की बात नहीं कह पाऊँगा इसलिये लिख रहा हूँ. जब शुभ और शुभांग की…

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वाओ माँ ये कितना सुंदर है .. आपको पता है बाहर इसकी कितनी डिमांड है….इतना सुंदर रेशम और ज़रदोजी का काम तो मशीने भी नहीं कर पातीं जितना आप करती हो..आप ना अपना सारा टैलेंट बस घर मे वेस्ट कर रहे हो…घर से बाहर तो निकलो तब पता चले आपको अपनी कीमत ” यशी ने अवंतिका के गले मे झूलते हुए कहा। ” धत पगली..मैं ऐसी ही ठीक हूँ…और ये चार दिवारी ही मेरी दुनिया है..तू ना ज्यादा सपने देख ना मुझे दिखा” अवंतिका ने अपने आँखों मे तैर आई…

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