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तुम , जो मेरे अंदर बसा करते हो जाने क्या क्या खेल रचा करते हो कभी फूल तो कभी इत्र बनकर मेरी हर सांस में महकते हो.. तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो… गर्मियों की चाँद रात हो, या जाड़े की नर्म सुबह.. सावन की रिमझिम फुहार हो, या पतझड़ के रंगों सी धरा.. हर मौसम में एक नया सा रंग भरते हो तुम, जो मुझमें ही बसा करते हो… जीवन का ताना बाना बुनकर जीना सिखलाते हो, राधा से कृष्ण के प्रेम की, पराकाष्ठा समझाते हो, कभी रूठ…

2 years ago no Comment

ये कोई समय है घर आने का? रात के 11 बज रहे हैं, कहाँ से आ रही हो अय्याशी करके ? घर के अंदर कदम रखते ही पापा की तेज़ आवाज़ कानों में गूंजी। ये बात तब कि है, जब मैं कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी करती थी। हमारी टीम के उम्दा प्रदर्शन के लिए ऑफिस कि तरफ से एक दावत का आयोजन किया गया था। वैसे तो मैं पापा कि ऐसी ना जाने कितनी डांट खा चुकी थी, लेकिन उस दिन उनके वो शब्द कानों में सुई कि तरह चुभ…

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अरे सुनो, ससुर जी रोका । मैंने पलटते हुए कहा जी पापा, “वो राधा के बेटे को देखो कितनी बढ़िया अंग्रेज़ी बोलता है, ज़रा इनको भी सिखाओ। प्रथम तो रोमी से भी छोटा है, फिर भी देखो कैसे फटाफ़टा अंग्रेज़ी में बात करता है, ये दोनों इतने बड़े स्कूल में पढ़ रहीं हैं, फिर भी हिंदी में बात करतीं हैं।” पापा बोलते जा रहे थे, और मैं सर नीचे किए सिर्फ सुनती जा रही थी, बच्चों पर गुस्सा भी आ रहा था, कि कुछ नहीं सीखा इतने दिनों में। मैंने…

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जब मैं और तुम हम हुए, जीवन के सारे रंग खिले कोरा कोरा जीवन मेरा, तुमने बसंती रंग भरे, जब मैं और तुम हम हुए…   जीवन जीना है, जीते हैं, हंसना रोना सब करते हैं, सुख दुःख में जो साथ रहे, वो साथी लेकिन कब मिलते हैं साथ निभाना क्या होता है, तुमने मेरे भ्रम हरे , जब मैं और तुम हम हुए…   रूठ जाना, कभी अपना बनाना, कभी यूँ ही हँसते हँसते आंसू बहाना जीवन के कड़वे अनुभव को भी कैसे खट्टा चूरन चटाना, ये सारे गुण…

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स्मिता आज मैं खाना अगर बाहर खा लूँ तो तुम मुझे घर तो आने दोगी ना ! अच्छा जी , वो तो मैं जानती ही हूँ, दोस्तों के बीच में बीवी की याद तो नहीं आ रही होगी , लेकिन नौटंकी करना नहीं छोड़ोगे तुम| आज्ञा तो ऐसे मांग रहे हो जैसे मेरे बिना कुछ करते ही नहीं हो, जाओ जी करो ऐश, लेकिन सुनो थोड़ा जल्दी आ जाना | जी सरकार| प्यार भरी उलाहना देते हुए स्मिता ने फोन रख दिया| राहुल भी ना एकदम बच्चों के जैसा है,…

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अमूमन 35 साल की उम्र गुज़रते गुज़रते औरतों में अनेकों परिवर्तन आने लगते हैं। कभी ये परिवर्तन हमारे स्वभाव में होते हैं तो कभी हमारी दिनचर्या, कभी हमारी बाहरी खूबसूरती में तो कभी आन्तरिक में। अक्सर देखा गया है कि महिलाएं 35 पार करते ही और अधिक आकर्षक, अधिक मुखर एवं अधिक सुलझी हुई सी मालूम पड़ती हैं। लेकिन इन सभी बदलावों के बावजूद जो सबसे बड़ा बदलाव हममें आता है, वो होता है हमारे रहन सहन और सुंदरता को लेकर। अक्सर लोगों को लगता है कि टीनएज में लड़कियां…

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चलो उठो स्कूल नहीं जाना है क्या, रोज़ सुबह आवाज़ ये आती थी सपनों की दुनिया से निकलो, अब उनको पूरा करना है, ये समझाईश अक्सर मिल जाती थी आज टिफिन में तुम्हारे पसंद का खाना रखा है, ये सुनकर ही तबीयत खुश हो जाती थी सारा दोस्तों में मत बांट देना, अपने भी पेट को भरना है, अक्सर ये आवाज़ साथ साथ ही आती थी कहीं कोई किताब छूट ना जाए, ये सुनते ही, अरे मम्मी वो पेन कहां रखा है ? उफ्फ होमवर्क करना तो भूल ही गए,…

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ना जाने मेरी आँखों को ये धोखा हुआ जाता है जहाँ से देखूँ मेरे साए में तेरा साया नज़र आता है   तुझसे शुरू तो ये ज़िन्दगी के सिलसिले ना थे तुझपे ख़त्म होंगे मगर, ये गुमाँ हुआ जाता है   मेरे अंदर जो तेरा पुरज़ोर अक्स पला करता है आफ़ताब भी उसके सामने फीका नज़र आता है   ये अश्क़ जो मेरी आँखों में दिए हैं तूने ग़ौर से देख इनमें तेरा अक़्स नज़र आता है   ज़िन्दगी यूं ही मयस्सर होती नहीं है दुनिया में हर एक शख़्स…

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I have had my philosophy of love that, when you love someone you are automatically committed to that one person for lifetime. I never ever believed in half relationship or you can say a relationship without any commitment,  until he comes into my life. He was like a sweet music in my not so sweet life. I was depressed and downhearted with my failed relationship, I could hardly see any hope in life and was going through a really bad phase of life. I was working in a corporate sector and…

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जीवन दो पहियों की गाड़ी है,   दोनों ने ज़िम्मेदारी संभाली है एक पहिया तुम बने, एक मैं बनी दो अलग अलग लोग थे हम, फिर भी मैं से हम बने   ये ज़रूरी तो नहीं, कि जो कंकड़ मेरी राहों में आएं, वो तुझको भी घायल कर जाएं, कुछ ऐसे ही, साथ साथ यूँ चल कर भी, दोनों की अपनी सृष्टि है, दो पहियों पर तो चलती है,  लेकिन, अपनी अपनी दृष्टि है,   मैं सम्मान करूँ, हर बात का तेरी, तू मान रख, मेरे जज़्बातों का, मैं साथ तेरा…

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