Profile

12 months ago no Comment

“इन जबरदस्ती की ऑफिस पार्टियों में जाना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं” भुनभुनाते हुये एक झटके में हिमानी ने शेल्फ खोली जो ड्रेस सामने दिखी वही हाथ में ले कर धड़ाम से शेल्फ बंद की| “किट्टू रो रही है जरा तुम उसको सम्हालो तो मैं कपड़े बदल लूं”  “तुम्हें दिख नहीं रहा मैं बिजी हूं” रोहन ने बिना देखे ही जवाब दिया|व दो दिन से सलून के चक्कर काटने के बावजूद रोहन को आईने के सामने खड़े पिछ्ले एक घंटे से फेसियल मसाज करते देख हिमानी अंदर ही अंदर चिढ़ गयी,…

12 months ago no Comment

मिनी और मोहित मध्यम वर्गीय परिवार के खुशहाल दम्पति थे, ३ वर्ष की बेटी के साथ जीवन भरा पूरा खुशहाल था | लेकिन तब तक जब तक कि मिनी की नजरों पर वो सामने वाला बंगला नहीं चढ़ा था, उस बंगले में कुछ तो जादू था जो देखता मानो उसके मोहपॉश में बंध जाता | ऐसा ही जादू मिनी पर भी चला था, मिनी उसे “रंगमहल” बोलती थी, मिनी के फुर्सत के पल उस बंगले को घंटों निहारने में ही जाते, मिनी अपने पति से हमेशा शिकायत किया करती कि…

1 year ago no Comment

“मम्मी आज कोई और काम नहीं करना सिर्फ मेरे नोट्स बनवाने में मदद करना है आपको” 12 वीं में पढ़ने वाली आहना ने सुबह उठते ही अपनी मां वर्षा को पूरे दिन का प्लान समझा दिया वर्षा ने भी मुस्कराते हुये हामी भर दी|  जल्दी से सारे काम समेट वर्षा आहना के नोट्स बनवाने लगी| तभी बेटे का  फोन आया , ” मम्मी मेरे पैसे खत्म हो गये थे आपको बताया था ना” हॉस्टल में रहकर पढ़ने वाला बेटा लगभग रुआंसा होते हुये बोला| “हां बेटा मुझे याद है ,पापा…

1 year ago no Comment

दो साल के लम्बे वक्त के बाद कालेज की सहेलियों का ग्रुप आज फुर्सत में मिल रहा था| करने को बातें हजारों थी मगर हजार बातों में भी बीना बड़े गौर से निक्की को ऊपर से नीचे देखती कभी उसकी आंखों में झांकती कभी उसकी बातों की डोर को लपक कर सीधी करने की नाकाम कोशिश करती|  बहुत हैरान थे सब जब पता चला था कि निक्की की होने वाली ससुराल गांव में है | उन अक्खड़ स्वभाव और देशी मिजाज बारातियों में एक भी लड़की ना आयी देख सब…

1 year ago no Comment

 मीनल ने आज बिन बताये दो दिन पहले ही अपने मायके आकर सबको  सरप्राइज दे दिया, “मीनल दीदी आप तो दो दिन बाद आने वाली थी ना आज अचानक कैसे आगयी आप? ” दिशा ने अपनी ननद मीनल को अचानक देखकर हैरानी से पूछा तो मीनल थोड़ा नाराज होकर बोली ” क्यों भाभी मैं पहले से नहीं आ सकती राखी पर ? आपको अच्छा नहीं लगा क्या?” “अरे कैसी बातें कर रही हो दीदी, मुझे अच्छा लगा, मैं तो,,,,,” दिशा संभलते हुये बोली| “ओफ्फो भाभी आप भी इतनी जल्दी सीरियस…

1 year ago no Comment

“डम-डम डीगा-डीगा मौसम भीगा-भीगा…” दूर से सुनाई देते गाने की धुन कान में पड़ते ही सीने पर हजारों सांप लोट गये, रागिनी बुआ दनदनाती हुई बाहर गयीं और मजदूरों पर भड़क उठीं “ऐ लल्लन बंद कर ये गाना, जरा जल्दी हाथ चला और काम खत्म करके अपने घर निकल।”  “जी दीदी जी” लल्लन ने झट से रेडियो बंद कर दिया। “जाने दे बेटा घर में शादी का माहौल है क्या-क्या बंद करवायेगी।” दादी ने पल्लू से आंसू पोंछते हुये बोला, “जब भी ये गाना बजता है बहुत दर्द दे जाता…

1 year ago no Comment

माहौल में खुशी और गम दोनों की रंगत थी आखिर बेटी की विदाई का पल ही कुछ ऐसा होता है। माँ चकरघिन्नी बनी हुई थी। ये लाओ, उसे रखो,… इन सब के बीच घूमती माँ ने एक नजर दुल्हन बनी अपनी छोटी बेटी रानी पर डाली तो बरबस आंसू बह पड़े। तभी बड़ी बेटी राधिका मां के पास आकर दर्द से कराहती हुई बोली ” माँ देखो ना ये बिछुये चुभ रहे हैं, चल भी नहीं पा रही” रानी की विदाई का सामान पैक करती माँ को सांस लेने तक…

1 year ago 2 Comments

हेमा जी बड़ी धूमधाम से इकलौती बहू ‘पिया’ का दरवाजे पर स्वागत कर रही थी. विदाई में रो-रो कर बेचारी की आंखें सूज गयी थी और थकान भी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी. मगर इसके बावजूद वो सारी रस्मों को मुस्कुराते हुए कर रही थी. अपनी बहू का ये मासूम रूप देख कर हेमा जी तो निहाल हुई जा रही थी. दो दिनों में ही सबको समझ आ गया था कि नयी बहू तो बहुत बातें करती है. उसके पास हर एक सवाल के चार जवाब होते…

1 year ago no Comment

माफ करना , क्या कहा आपने ? यही ना कि “हमने भी चूड़ियाँ नहीं पहन रखी है.”  अगर चूड़ियाँ पहने होते तो? कायर और कमजोर होते? नहीं पहनी तो बहुत बहादुर और मजबूत हो? क्या यही मतलब समझ पाये हो इन चूड़ियों का? आखिर जानते क्या हो आप इन चूड़ियों के बारे में? किसने कहा कि चूड़ियाँ कमजोर और औरत या आपकी नजर में कहूं कमजोर औरत की निशानी हैं?  मर्द होने पर इतना घमण्ड कि इन चूड़ियों को कायरता की निशानी मान बैठे, शर्म आती है ना इन चूड़ियों…

1 year ago no Comment

एक तो मोमिता मासी, मेरी काम वाली बाई चार दिन की छुट्टी पे थी दो दिन ऊपर भी निकल गये थे उस पर मेरी तबियत कहर बरपाये थी,       अस्त व्यस्त कमरा किचेन सब कुछ मेरी बीमारी को जबरदस्त तरीके से बढ़ाये हुये था| ऑफिस से छुट्टी लेना मजबूरी थी वरना कौन अकेले कमरे में पड़े बीमारी को सहेजना चाहता है, उस पर भी बॉस का ताना ” भई रमेश बुखार सिरदर्द तो लड़कियों वाले बहाने हैं छुट्टी लेने के तुम लड़कों को ये बहाने शोभा नहीं देते” अब…

Pragya prags does not have any friends yet.
read and feed member