खुद को खुश रखें

ज्यादातर हमारे दिन एकदम शून्य जैसे जाते हैं.. हमें पता ही नहीं होता कि हमने दिनभर किया क्या! या हम क्या करना चाहते हैं! बस सुबह जैसे मशीन की स्विच ऑन होती है और मशीन अपने काम में लग जाती है.. खाना भी हम समय पर केवल इसलिये खाते हैं क्योंकि वो सिर्फ हमारी दिनचर्या का हिस्सा है..

घड़ी के साथ-साथ हम भी तय किये गये रूटीन में घूमते रहते हैं.. अक्सर हम भूल जाते हैं कि हमारा कुछ अस्तित्व भी है.. हम दिनभर इतने उलझे रहते हैं कि हम खुद के लिये ही आधा एक घन्टा समय निकालना भूल जाते हैं.. वो आधा एक घंटा फिर चाहे हम कैसे भी बिताएं..

संगीत सुनें, बाहर टहले, मन्दिर की सीढ़ियों पर बैठे, ध्यान धरे, कुछ अच्छा पढ़े लिखें, मनपसंद व्यक्ति से बात करे, छोटे बच्चे या बुज़ुर्ग संग समय बिताए, या फिर कुछ न करे बस यह सोचो कि ये आधा घन्टा सिर्फ मेरा है.. और मुझे इस आधे घंटे को अंतरमन से जीना है..

जिसमें मुझे किसी के बारे में नहीं सोचना, जिसमें मुझे किसी को खुश नहीं करना, जिसमें मुझे किसी के लिए न जीना है, न मरना है.. इस आधे घंटे में बस मैं हूं और बस मैं ही हूं..

खुद से मिलना, खुद को जानना है, खुद को समय देना कितना ज़रूरी है, यह अक्सर हम भूल जाते हैं.. !

अतः खुद को समय अवश्य दें, खुश रहें और खुशियाँ बाँटे !
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