World suicide prevention day

 आज हमें पता चला है कि वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे है अगर मैं कहूं कि आत्महत्या करना पाप है, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए, तो मेरे जेहन में तुलसीदास जी की एक चौपाई आती है जिसमें विवरण दिया है ,  पर उपदेश कुशल बहुतेरे ।जे आचारहीं ते नर न घनेरे।।    जिसका अर्थ है दूसरों को उपदेश देना बहुत आसान है ,पर अमल करना उतना ही कठिन ।    अगर मेरे पास कोई सलाह लेने आए, तो ऐसी- ऐसी सलाह दे सकती हूं ,कि कोई भी मुझे प्रकांड पंडित समझ…

Read More

सीखने मे क्या बुराई है

ऋषभ, सुनो ना, सुरभि ने कहा, हाँ बोलो सुरभि – मैं सुन रहा हूँ, ऋषभ ने मोबाइल में आँखें गडाए हुए कहा, इधर देखो मुझे, सुरभि ने कहा – हाँ बाबा लो रख दिया फोन, अब बोलो ऋषभ ने कहा | “मुझे ड्राइविंग सीखनी है” सुरभि ने ऋषभ का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा” | अरे तुम्हें ड्राइविंग सीखने की क्या जरुरत है, मैं हूँ ना तुम्हारा परमानेंट ड्राइवर, ऋषभ ने कहा और वैसे भी मैंडम मुझे अपनी कार बहुत प्यारी है,सो मैं उसे तुम्हें देने से रहा,…

Read More

वाह री सोच

“वाह रे समाज की सोच वाह रे” बलात्कार किया उसने और अपवित्र मै हो गई, सोच हवस की उसकी थी और बदनाम मै हो गई हैवानियत आंखो में उसकी थी और बेशर्म में हो गई पाप उसने किया आजाद वो है और कैद मै हो गई दरिंदगी से भरा था उसका मन और शिकार मैं हो गई, हरकतेें उसकी नग्न थीं और निर्वस्त्र मै हो गई, नोच डाला था शरीर के साथ आत्मा तक उसने, गुनहगार वो था, जबकि सजा मेरे हिस्से में हो गई, वाह रे समाज की सोच…

Read More

इंसानियत अभी जिंदा है…

सुनो रोहित आज आप कनक को संभालो मैं फटाफट खाना बना लेती हूं, अंशु ने जैसे ही रोहित से कहा,रोहित ने दुखी स्वर में कहा अंशु मुझे आज ऑफिस जाना है । अरे ऐसे कैसे आपको ऑफिस जाना है मैंने हफ़्ते भर पहले कहा था आपसे कि हमें आज कनक के वैक्सीनेशन के लिए जाना है और इतनी दूर अकेले कैसे जाऊंगी अब मैं।  अंशु मैं जानता हूं मुश्किल होगा तुम्हारे लिए पर मेरी भी मजबूरी है,मैंने छुट्टी ली थी पर सुबह ही मेल आया कि कुछ बहुत जरूरी काम…

Read More

Dear Men

It has been a long time since this patriarchal society is running its own arbitrary in the name of ‘Social Justice’. In the name of ‘feminism’. The evil society has given us nothing but, made us weak, demoralized, timid and mostly spineless.              In the older days, (that  I would say still exists) women were not educated. They were imprisoned by their own thoughts and were made to believe that they are as good as nothing. Earlier, they were just married off (what society considered to…

Read More