प्रेम

जिसके चित्र बसे नैनन, उस कृष्ण सरी का हो जीवन। रुक्मिणी से बंधे बंधन,  फिर भी प्रेम करे राधा के संग।।   रंग अनेक रहे राधा के आंगन, फिर भी श्याम मय रहे तन मन। बिहारी संग शोर मचाए, दुनिया भूली बावरी, केवल कृष्ण-कृष्ण दोहराए।।   तान खूब मधुर सुनी हो चाहे, कृष्ण की बसुरी ही राधा को भाए। गोपियां चाहे खूब नचायें, कृष्ण तो रास राधा से ही रचाएं।।   दुनिया चाहे खूब सुनाए, इन दोनों को खूब सताए। प्रेम हो कर भी मिल ना पाए, फिर भी पूरे…

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मुझमें ही बसा करते हो…

तुम , जो मेरे अंदर बसा करते हो जाने क्या क्या खेल रचा करते हो कभी फूल तो कभी इत्र बनकर मेरी हर सांस में महकते हो.. तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो… गर्मियों की चाँद रात हो, या जाड़े की नर्म सुबह.. सावन की रिमझिम फुहार हो, या पतझड़ के रंगों सी धरा.. हर मौसम में एक नया सा रंग भरते हो तुम, जो मुझमें ही बसा करते हो… जीवन का ताना बाना बुनकर जीना सिखलाते हो, राधा से कृष्ण के प्रेम की, पराकाष्ठा समझाते हो, कभी रूठ…

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धारावाहिक

टीवी धारावाहिक भावना मयूर पुरोहित हैदराबाद   सुना है हमने कि लग्न सात जन्मों का बंधन हैं… किंतु,  आजकल की टीवी धारावाहिकों में तो… पहला पति फिर दूसरा पति, वापस पहला पति!!! जैसे कि एलिजाबेथ टेलर!!! पहले तो माता-पिता कन्यादान करते थे. अभी तो… वर का दान होता है!!! बच्चें अपनी माता, या तो पिता की शादी कराते हैं!!! पति अपनी पत्नी की या  फिर पत्नी अपने पति की दूसरी शादी करातें हैं!!!  प्रेमी अपनी प्रेमिका की  या फिर प्रेमिका अपने प्रेमी की  दूसरी शादी करातें हैं!!!  नायक नायिका  को…

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यादों के साए

। ।।यादों के साये।।। बीते कल की परछाई , क्यों पीछे पीछे चलती है। मेरा ही तो साया है वो, लेकिन मुझ को खलती है। कुछ वक्त कटा, कुछ उम्र बढी़, मेरा मन भी अब छल आया। मेरी आंखों के आगे फिर से, मेरा बीता कल आया ।। मैं क्यों आगे ना देख सकी, पीछे देखा कुछ घबराई। जीवन की उठाँपटक में मैंने , अपनी सारी उम्र गँवाई ।। बेतुक बातों की गठरी की, खोल चुकी गांठे सारी। क्यों सहे संजोए रखी मैंने, इन यादों से अब हारी ।। दिल…

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