पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ

थोड़ा अप्रासंगिक पोस्ट.! साधिकार आग्रह कि, अगर विचाराभियक्ति से सहमति न हो, तो पटल पर संवाद दीजिये, कोई रास्ता निकल जायेगा.! इधर कुछ अजीबोगरीब पोस्ट फेसबुक पर अपनी जगह बनाये जा रहे है.! उन पोस्ट की सत्यता पर तनिक भी संदेह नहीं, पर हर सत्य को हर पटल पर परोस जाना उचित भी तो नहीं.! विचाराभियक्ति की आजादी की मैं आरम्भ से ही पक्षधर हूँ, पर यह भी तो उचित नहीं कि, नितान्त व्यक्तिगत भावनाओं का सम्प्रेषण सामाजिक स्तर पर हो.! आज जिस गति और मति से पुरुष या महिला…

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World suicide prevention day

 आज हमें पता चला है कि वर्ल्ड सुसाइड प्रीवेंशन डे है अगर मैं कहूं कि आत्महत्या करना पाप है, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए, तो मेरे जेहन में तुलसीदास जी की एक चौपाई आती है जिसमें विवरण दिया है ,  पर उपदेश कुशल बहुतेरे ।जे आचारहीं ते नर न घनेरे।।    जिसका अर्थ है दूसरों को उपदेश देना बहुत आसान है ,पर अमल करना उतना ही कठिन ।    अगर मेरे पास कोई सलाह लेने आए, तो ऐसी- ऐसी सलाह दे सकती हूं ,कि कोई भी मुझे प्रकांड पंडित समझ…

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आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है

एक डरावना शब्द जो कल तक शब्दकोष में कहीं गुम था, वह आज देश, समाज और घर में इस कदर स्थापित हो गया है कि हर कोई इससे डरा-सहमा है।हर आत्महत्या के पीछे कोई वजह होती है। अगर किसी समस्या के हल न होने की वजह से कोई आत्महत्या कर लेता है तो सोचने वाली बात है कि क्या मर जाने से उसका हल हो जाएगा। अगर हल हो भी जाए तो क्या वह उस क्षण के सुख को भोगने के लिए मौजूद रहेंगे? आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं…

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स्वास्थ्य मन से स्वस्थ शरीर

स्वास्थ्य की दूसरी निशानी है, सचेतता, सतर्क और जागरूक रहना। मन की २ स्थितियां होतीं हैं। एक तो शरीर और मन साथ में। और दूसरा शरीर और मन भिन्न दिशाओं की ओर देखते हुए। कभी जब तुम तनाव में हो, तब भी हम सतर्क रहते हो, लेकिन ये ठीक नहीं है। हमें सतर्क और साथ ही तनाव-मुक्त भी होने चाहिए।   हम अपना आधा स्वास्थ्य संपत्ति कमाने में खर्च कर देते हैं और फिर हम वह संपत्ति स्वास्थ्य को वापिस सुधारने में खर्च कर देते हैं। यह किफायती नहीं है।…

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बदलते परिवेश मे शिक्षा और शिक्षकों का महत्व

गुरुर ब्रम्हा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर: गुरु: साक्षात्परब्रम्हा तस्मै श्री गुरुवे नम: प्राचीन काल से ही इस देश में गुरु को ईश्वर का दर्जा दिया गया है, इन्हें सत्ता के समानांतर या बराबर की शक्ति प्रदान की गई थी, राजशाही में एक राजा अपने गुरु के द्वारा बताए गए मार्ग में चलते हुए सत्ता का संचालन करता था, जब भी राजा के सामने कोई अनिर्णय की स्थिति होती तब वो गुरु की सलाह पर उसका निर्णय करते थे, इससे यह परिलक्षित होता है कि राज्य में गुरु को असीमित…

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