वो बेपरवाह बचपन

बाकी महानगरो की तरह ही है हमारा शहर भी,जगह जगह उग आए कॉक्रीट के जंगल,जहरीली हवा,और कान फोडू आवाजे़,13सालो इन सब के साथ तालमेल बिठाने की नाकाम सी कोशिश कर रही हूँ,फिर भी न जाने कैसे मन भटकता हुआ वापस उन्ही बचपन की गलियों में पहुँच जाता है,जहाँ सारे घर अपने होते थे,हरे भरे बागीचों से हम बिना पूछे ही आम,अमरूद तो कभी बेर तोड कर खा लिया करते थे,माँ बाप को डरना नहीं पडता था,कि अरे बच्ची बाहर है सुरक्षित तो होगी ना। खैर तो इन कॉक्रीट के जंगलो…

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भूल

तुम्हें चाहा मेरी भूल थी, तुम्हें चाहा मेरी भूल थी, तुम्हें नहीं भूल पा रही येभी मेरी भूल हैं, पाने कि चाह में हर दिन एक भूल कर रही हूँ, तुम्हें चाहना मेरी भूल थी, तुम्हें चाहना मेरी भूल थी, बहुत याद करती हूँ, बहुत चाहती हूँ में तुम्हें बहुत सोचती हूँ, कि अब नहीं सोचूंगी तुम्हें पर पर इस सोच में भी तुम्हें नहीं भूल पा रही हूँ तुम्हें चाहा मेरी भूल थी, तुम्हें नहीं भूल पा रही ये मेरी भूल हैं     

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Trip to universe

With a heavy heart, Full of your fond memories. I walk away. I walk away, To take a round of the universe  yet. There’s some supernatural power that pulls me back to the very point  I started from. To there Where I couldn’t imagine Existing without you Even in my worst nightmares. To where I really couldn’t walk away From you Your memories Your smell. oh Damn Everything related to you Still hits as hard as ever. Yet I try to walk away. With all those overwhelming memories Filled to…

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पंख

पंख    काश कि मेरे पास पंख होते ,काश कि में उड सकती उस चिड़िया कि तरह उड पाती , काश  कि में भी  सब कुछ  छोड  पाती  , सब कुछ छोड़ कर दौड़  कर  या  उड कर तुम हारे पास आ जाती ,काश  कि मेरे उपर कोई  बंदिश नई होती ,काश कि  मेरी कोई मजबूरी  नहीं होती ,काश कि में सब कुछ  छोड़ कर आपाती  इसी  कश्म -कश् में  आज का दिन चला गया ,और में सोचती रहगई कि काश मेरे पास भी पंख होते में अक्सर सोचती हूँ ,…

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