मंहगी मोहब्बत

आज फिर तुमपर नज़र पड़ गई  , तुम हमारी वो गलती जिसका ताउम्र हमें अफसोस रहेगा । काश !काश कि उस दिन हमने तुम्हे पीछे मुड़ कर न देखा होता “ आज भी याद है बनारस की गलियों मे घूमते हुए नज़र पड़ गई थी तुम पर। यूं लगा मानो बस तुम्हे हमारे लिए ही बनाया गया हो। तुम्हे देखकर ऐसा लगता था , जैसे बनाने वाले ने अपनी सारी कलाकारी तुम पर लुटा दी हो । तुम्हारा रंग , तुम्हारी छुअन,  बिल्कुल मक्खन की तरह और हल्की ऐसे जैसे…

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बबलू का फोन

बबलू का फ़ोन       “भाभी बबलू का फ़ोन आया है!” “अभी आई” मैं भाग कर फ़ोन तक पहुँची। अरे! प्यासा ही कुंए के पास जाता है। कुंआ तो चलकर आयेगा नहीं। यहाँ कुंआ यानि एक काले रंग का उपकरण जो लोगों के संचार का माध्यम था जो अमूमन उन दिनों घर में शान का प्रतीक था। हर घर में एक ही होता था। घर के बड़े-बुजुर्गो की तरह ही लीविंग रुम में स्थापित रहता था। उसे भी कुछ वैसा ही सम्मान भी प्राप्त था। वो लंबी घंटी….टुर्र वाली…

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पहले से थिंकना चाहिए था

पहले से थिंकना चाहिए थातत्कालीन शिक्षा व्यवस्था में अभूतपूर्व बदलाव ने बहुत ही प्राचीन घटना क्रम  याद दिला दिया। कक्षा आठवीं तक तो सब पढ़ लिया जो पढ़ाया गया, बिना दिमाग पर जोर दिए, अब 9वी में कस्बे में वहीं आवेदन किया, जहां सब करते थे  बिना सोचे कि किस संकाय से आगे की पढ़ाई करनी है, विज्ञान, कॉमर्स या आर्ट्स! दसवीं में आते-आते यह महसूस हुआ ,अरे हमें तो गणित पढ़ना था लेकिन हम तो आर्ट्स के विषय चयन कर चुके थे अब तो गणित पढ़ने के रास्ते ही…

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सियापा इंग्लिश का

अंग्रेज चले गए लेकिन अंग्रेजी यहीं छोड़ गए| अरे भाषा नहीं है मुसीबत है मुसीबत| नाक में दम कर रखा है, बोलो कुछ और मतलब कुछ और निकलता है| आदमी समझे कैसे बताओ भला?” शांति का बड़बड़ाना जारी था। “अरे क्या हुआ मेरी शांति? आज सुबह सुबह अशांति क्यों फैला रही हो?” राकेश जी ने अपनी दाढ़ी में शेविंग क्रीम लगाते हुए कहा| “देखो हम भी पढ़े लिखे हैं, डबल एम.ए हैं लेकिन ये जो आजकल के बच्चे गिटर-पिटर अंग्रेजी बोलते हैं ना हमको पल्ले नहीं पड़ती और हमको ये नहीं…

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