पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ

थोड़ा अप्रासंगिक पोस्ट.! साधिकार आग्रह कि, अगर विचाराभियक्ति से सहमति न हो, तो पटल पर संवाद दीजिये, कोई रास्ता निकल जायेगा.! इधर कुछ अजीबोगरीब पोस्ट फेसबुक पर अपनी जगह बनाये जा रहे है.! उन पोस्ट की सत्यता पर तनिक भी संदेह नहीं, पर हर सत्य को हर पटल पर परोस जाना उचित भी तो नहीं.! विचाराभियक्ति की आजादी की मैं आरम्भ से ही पक्षधर हूँ, पर यह भी तो उचित नहीं कि, नितान्त व्यक्तिगत भावनाओं का सम्प्रेषण सामाजिक स्तर पर हो.! आज जिस गति और मति से पुरुष या महिला…

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वो चार हार्मोन्स जो तय करते हैं आपके जीवन की खुशियाँ !

एक दिन मैं और मेरा मित्र साथ बैठे जीवन की खुशी की बात कर रहे थे। कुछ देर बात करने के बाद उसने कहा कि वो जीवन मे खुश नहीं हैं। उसकी यह बात सुनकर मैंने भी अपने अंतर्मन से पूछा कि “क्या मैं खुश हूँ?” “नहीं”, मेरी अंतरात्मा ने जवाब दिया। और मैं इसके पीछे के कारण को जानने की कोशिश करने लगा पर ढूंढ नहीं सका। मैंने और कोशिश की, कुछ आर्टिकल्स पढ़े, लाइफ कोच से विचार विमर्श किया पर कुछ भी निष्कर्ष नहीं निकला। और फिर आखिर…

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खुद को खुश रखें

ज्यादातर हमारे दिन एकदम शून्य जैसे जाते हैं.. हमें पता ही नहीं होता कि हमने दिनभर किया क्या! या हम क्या करना चाहते हैं! बस सुबह जैसे मशीन की स्विच ऑन होती है और मशीन अपने काम में लग जाती है.. खाना भी हम समय पर केवल इसलिये खाते हैं क्योंकि वो सिर्फ हमारी दिनचर्या का हिस्सा है.. घड़ी के साथ-साथ हम भी तय किये गये रूटीन में घूमते रहते हैं.. अक्सर हम भूल जाते हैं कि हमारा कुछ अस्तित्व भी है.. हम दिनभर इतने उलझे रहते हैं कि हम…

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प्रेम

जिसके चित्र बसे नैनन, उस कृष्ण सरी का हो जीवन। रुक्मिणी से बंधे बंधन,  फिर भी प्रेम करे राधा के संग।।   रंग अनेक रहे राधा के आंगन, फिर भी श्याम मय रहे तन मन। बिहारी संग शोर मचाए, दुनिया भूली बावरी, केवल कृष्ण-कृष्ण दोहराए।।   तान खूब मधुर सुनी हो चाहे, कृष्ण की बसुरी ही राधा को भाए। गोपियां चाहे खूब नचायें, कृष्ण तो रास राधा से ही रचाएं।।   दुनिया चाहे खूब सुनाए, इन दोनों को खूब सताए। प्रेम हो कर भी मिल ना पाए, फिर भी पूरे…

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मुझमें ही बसा करते हो…

तुम , जो मेरे अंदर बसा करते हो जाने क्या क्या खेल रचा करते हो कभी फूल तो कभी इत्र बनकर मेरी हर सांस में महकते हो.. तुम, जो मेरे अंदर बसा करते हो… गर्मियों की चाँद रात हो, या जाड़े की नर्म सुबह.. सावन की रिमझिम फुहार हो, या पतझड़ के रंगों सी धरा.. हर मौसम में एक नया सा रंग भरते हो तुम, जो मुझमें ही बसा करते हो… जीवन का ताना बाना बुनकर जीना सिखलाते हो, राधा से कृष्ण के प्रेम की, पराकाष्ठा समझाते हो, कभी रूठ…

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