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जब स्वछंद होगें विचार
तभी होगा नए कल का आगाज़ “
 
कोई भी चीज बंधन मे अच्छी नहीं लगती। बस इसी विचार को लेकर “रीड एण्ड फीड – स्वछंद विचार “की शुरूआत की गई है। इस मंच का मुख्य उद्देश्य यही है कि आपके विचारों को एक ऐसा मंच दिया जाए जहाँ आप निर्भीक होकर हर विषय पर अपनी राय रख सकें फिर चाहे वो कहानी के रूप मे हो ,कविता, ब्लॉग, या विचार किसी भी माध्यम से।
 
 इस दौड़ती भागती जिंदगी मे हम ढूंढते है एक अपना कोना ,जहाँ अपने विचारों को व्यक्त करने से पहले सोचना न पड़े। हमारा मानना है कि लेखन स्वयं को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। बहुत सी बातें हैं जो हम कहना चाहते हैं। बहुत सी घटनाएं हैं जो हमारे आसपास घटित होती हैं, हम उसके बारे मे अपने विचार रखना चाहते हैं, ऐसे विचार जो समाज मे सार्थक परिवर्तन ला सकें परंतु हमें ऐसा माध्यम ऐसा मंच नहीं मिल पाता जहाँ हम बेबाकी से अपने विचार दुनिया से साझा कर सकें।  तो ” रीड़ एण्ड फीड ” ऐसा ही मंच है जहां आप स्वछंद है अपने विचार प्रस्तुत करने हेतु।
 
 

 

फाउंडर्स

 
 
 
पल्लवी पाठक
 
पल्लो रानी बनेगी टीचर मिंकू कवि बनेगा
घूम घूम कर शहर शहर में कविता खूब पढ़ेगा
मम्मी की तबीयत खुश होगी, पापा की छाती फूलेगी
आएगा वो दिन जब घर घर में मिंकू की कविता गूंजेगी।
 
पिता समान चाचा जी द्वारा लिखित इस कविता को बचपन में सुनती आई थी, उन्होंने ये कविता उस समय के प्रख्यात अखबार में दोनों भाई बहन की फ़ोटो के साथ प्रकाशित की थी। तब तो अखबार में अपनी फ़ोटो देखना ही खुशी का एक बड़ा पल था, धीरे धीरे जब कविता का मर्म समझ आया तो सोचती थी कि क्यों मैं टीचर ही बनूंगी, मैं क्यों नहीं कविताएं कहूँ, हो सकता है ना कि मेरी ही कविता से पापा की छाती गर्व से फूल जाए, हो सकता है कि मेरी कविताएं मम्मी के दर्द को शब्दों में बयां कर सकें और वो खुशी दे सकें जो भैया के कवि बनने से होती। बस फिर क्या समय के साथ मैंने अपनी राह बना ली, और चुन लिया वो रास्ता जो सबको खुश रख सके।
 
ये है संस्कारधानी जबलपुर में जन्मीं एवं पली बढ़ी पल्लवी पाठक के जीवन का एक छोटा सा वृतांत उनके अपने ही शब्दों में। 
पंखो से नहीं हौसलो से उड़ान होती है” यह बात पल्लवी पाठक जी पर शत् प्रतिशत लागू है। एक साधारण से परिवार में जन्मीं पल्लवी ने अपनी सारा जीवन अपनी ही शर्तों पर जिया, पिता श्री लक्ष्मी नारायण पाठक जी केंद्रीय सरकार के लिए नौकरी करते थे और अब आराम से आने रिटायरमेंट के दिन गुज़ार रहे हैं, और माता श्रीमती पुष्पा पाठक एक गृहिणी हैं। बचपन से ही ज़िद्दी और दृढ़ निश्चई स्वभाव की पल्लवी पाठक एक सिंगल मदर हैं और दो प्यारी बेटियों की मम्मी है। शुरु से ही इनकी रुचि लेखन मे रही है, जिसके लिए ये अपने पिता को प्रेरणास्रोत मानती हैं। स्कूल के दिनों से ही वाद विवाद एवं भाषण प्रतियोगिताओं में इनकी सहभागिता रही है। एम.कॉम के साथ ही न्यूज पेपर मे आर्टिकल्स लिखने शुरू कर दिए थे। लिखने का सिलसिला तबसे बदस्तूर जारी है।अपने लेखन में सामाजिक मुद्दो को खूबसूरती से डालने मे ये माहिर है। वर्तमान मे  जबलपुर मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूल मे अपनी सेवाएं दे रहीं है। इनका मानना है कि जिनके भी मन मे लेखन के प्रति रुची है उन्हे अवश्य लिखना चाहिए । इसी उद्देश्य के साथ इन्होंने ” रीड एण्ड फीड ” की रूपरेखा तैयार की है ,तकि जो भी लिखना चाहे उन्हे एक सुरक्षित मंच मिल सके। 
 
 
सिद्धि पोद्दार
 
बहुमुखी प्रतिभा की धनी सिद्धि पोद्दार जी का जन्म श्री कृष्ण की क्रीड़ा स्थली और राधा कृष्ण की प्रेम स्थली श्री धाम गोवर्धन धाम जिला मथुरा में हुआ है
एक वैश्य परिवार जो व्यापार के चलते राजस्थान के चुरू जिले से चलकर भरतपुर जिले के झौरोल  गांव और फिर ब्रज क्षेत्र गिर्राज जी में आकर बस गए, इनके पिताजी श्री दुर्गा प्रसाद जी मित्तल ईट भट्टा व्यवसायी और माताजी  श्रीमती उमा मित्तल एक ग्रहणी हैं
प्रारंभिक शिक्षा गोवर्धन में हुई ,पढ़ने में पहले मध्यम श्रेणी की अंतर्मुखी छात्रा ही रही,  कक्षा दसवीं के विशेष योग्यता वाले रिजल्ट ने आत्मविश्वास से ओतप्रोत कर दिया… और कब वे अंतर्मुखी से  बहिर्मुखी  हो गई पता ही नहीं चला।
स्थान का प्रभाव कहो या पारिवारिक संस्कार हमेशा भक्ति भाव और अनुशासन के अधीन ही रहे ब्रज के लाडले महा मंडित पंडित जी बाबा एवं अन्य संत जनों का नित्य प्रति सानिध्य प्राप्त हुआ
बचपन से ही संयुक्त परिवार में रही एवं बाबा साहब से कहानियां सुनने एवं भजन गाने का बहुत शौक था, जो दीर्घकालीन अंतर्मन और मानस पटल पर अंकित हो गए रचनात्मकता का बीज तो तब ही से अंकुरित हो चुका था।
 उच्च शिक्षा के लिए गोवर्धन से बाहर जाना पड़ा पारिवारिक संस्कार, पिताजी का विश्वास और माता जी की प्रेम से पोषित होकर अंकुरित बीज अब आत्मविश्वास से परिपूर्ण तरु में परिवर्तित हो चुका था
परिवार,मित्रों एवं रिश्तों को हमेशा प्राथमिकता देने कारण समकालीन मित्रों के साथ आंग्ल भाषा में m.a. की शिक्षा प्राप्त की , अपने कोर्स के अलावा अन्य पुस्तकों को पढ़ने का भी शौक था, फिर कंप्यूटर में रुचि जागृत हुई तो एन आई आईटी से कंप्यूटर का कोर्स किया फिर महसूस महसूस हुआ कि किसी भी संस्थान में कार्यरत होने के लिए डिग्री की जरूरत है तो बाद में मास्टर इन कंप्यूटर साइंस किया  विवाह पूर्व कुछ वर्ष जॉब भी की, पिताजी के कहने पर फिर कुछ समय के लिए एक विद्यालय में सेवा कार्य के जैसे अध्यापन कार्य पूर्ण किया एवं दिल्ली के वैश्य समुदाय के एक एनजीओ ,तीर्थ विकास ट्रस्ट में कंप्यूटर भी सिखाया
 
इनका विवाह पिताजी के ही व्यावसायिक मित्रगण के परिवार में राजस्थान के  सांभर लेक जयपुर  से निकले  मुगलसराय( वाराणसी) के कोयला व्यवसाई श्री कैलाशशंकर लाल पोद्दार जी के सुपुत्र श्री अनुराग पोद्दार जी के साथ संपन्न हुआ।
 
इनके अंतर्मन में बचपन से ही आशावादी, परिवार ,मित्रों और रिश्तों की प्राथमिकता चारों तरफ एक बहुत अच्छी दुनिया की रचनात्मक रूपरेखा बनी, बस इसी रचना को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से आगे कार्यरत हैं।
 इनका उद्देश्य सबको बस यह महसूस कराना है कि भगवान ने कितनी सुंदर रचना बनाई है उसको अल्पकालीन  केवल स्वहित मनोभावों से मलिन ना करें ,सबको खूब प्रेम करें और खूब खुश रहें इसी में परमानंद  की अनुभूति है। यही इस मंच का उद्देश्य भी है कि हर व्यक्ति अपने अंदर छिपी प्रतिभा को पहचाने
और हम उसे दुनियां के सामने लाएंगे। आशा ही नहीं पूर्व विश्वास है कि हम अपने उद्देश्य मे सफल होंगे।
 
 
 मंजुला दूसी
पैशन से लेखिका प्रोफेशन से टीचर मंजुला दूसी का जन्म छत्तीसगढ़ में बसे भरे पूरे संयुक्त तेलुगु ब्राह्मण परिवार मे हुआ।वहीं इन्होने एम.कॉम तक की शिक्षा ग्रहण करी साथ ही ऐनिमेशन एवं चित्रकारी मे रुची होने के कारण टू डी एनिमेशन का कोर्स किया। बड़े से परिवार मे लगभग सभी का रुझान साहित्य की ओर था दादाजी ,पिताजी , चाचा ,बुआ सभी कविताएं लिखते पढ़ते थे , जिसके कारण बचपन से ही इनका रुझान साहित्य की ओर रहा है।स्कूल मे वाद विवाद और भाषण प्रतियोगिताओं में इन्होने कई ईनाम जीते। माता पिता और छोटे भाई के सातत् प्रोत्साहन से इन्होने उत्तरोत्तर उन्नति की।
 
इनका विवाह हैदराबाद मे बसे साफ्टवेयर इंजीनियर श्री रामगोपाल से होने के बाद से ये हैदराबाद मे ही बस गई। विवाह पश्चात भी पाढ़ाई मे रुची एवं खाली समय का सद् उपयोग करते हुए इन्होने एम.बी.ए एवं किया व थ्री डी एनिमेशन की डिग्री हासिल की । एक प्यारी सी बिटिया की जिम्मेदारियों से  इनके सपनो को कुछ वर्षो के लिए विराम अवश्य दिया परंतु बिटिया के साथ ही इन्होने उसी स्कूल मे शिक्षिका का पद सम्हाला साथ ही बी.एड़ भी किया। लगातार छः वर्षों तक अपनी सेवाएं देने के बाद इन्होंने कुछ समय का अंतराल लिया तथा फिर लेखन से जुड़ गई। विभिन्न मंचों के लिए ये लिखती है। कई पत्र पत्रिकाओं मे इनके लेख, कहानियां, कविताएँ प्रकाशित होती रहती है। इनकी एक साझा संकलन “ऑनलाइन वुमनिया ” का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में भी दर्ज है। “सीखना एक सतत प्रक्रिया है जो ताउम्र चलती रहती है ” ये इसी वाक्य पर विश्वास करती है।