मेरे अपने

मेज पर रखा हुआ दवाइयों का डिब्बा, फ्रिज में रखा हुआ इंसुलिन, खिड़कियों से झांकती हुई ढलती हुई शाम….   तुलसी के पौधे पे जलता हुआ दिया, घंटी और आरती की ध्वनि सुबह श्याम…. सुबह की चाय, हनुमान चालीसा या पूरे दिन की बातें तमाम लाते हैं भोर के उदय का पैगाम…..   जैसे बड़ी बडी चीजों से चाहे भरा हुआ हो कमरा, फिर भी इन छोटी -छोटी चीजों के बिना खाली सा लगता है, घर बड़ों के बिना घर -घर नहीं होटल का कमरा सा लगता है जैसे एक…

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