प्रेम

जिसके चित्र बसे नैनन, उस कृष्ण सरी का हो जीवन। रुक्मिणी से बंधे बंधन,  फिर भी प्रेम करे राधा के संग।।   रंग अनेक रहे राधा के आंगन, फिर भी श्याम मय रहे तन मन। बिहारी संग शोर मचाए, दुनिया भूली बावरी, केवल कृष्ण-कृष्ण दोहराए।।   तान खूब मधुर सुनी हो चाहे, कृष्ण की बसुरी ही राधा को भाए। गोपियां चाहे खूब नचायें, कृष्ण तो रास राधा से ही रचाएं।।   दुनिया चाहे खूब सुनाए, इन दोनों को खूब सताए। प्रेम हो कर भी मिल ना पाए, फिर भी पूरे…

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