मंहगी मोहब्बत

आज फिर तुमपर नज़र पड़ गई  , तुम हमारी वो गलती जिसका ताउम्र हमें अफसोस रहेगा । काश !काश कि उस दिन हमने तुम्हे पीछे मुड़ कर न देखा होता “ आज भी याद है बनारस की गलियों मे घूमते हुए नज़र पड़ गई थी तुम पर। यूं लगा मानो बस तुम्हे हमारे लिए ही बनाया गया हो। तुम्हे देखकर ऐसा लगता था , जैसे बनाने वाले ने अपनी सारी कलाकारी तुम पर लुटा दी हो । तुम्हारा रंग , तुम्हारी छुअन,  बिल्कुल मक्खन की तरह और हल्की ऐसे जैसे…

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