मेरी हार सोने का हार

  मैं एक सीधा साधा मासूम सा व्यापारी आदमी हूं । पूरे हफ्ते तो छुट्टी मिलती नहीं, रविवार का दिन सोने में निकल जाता है। चार-पांच महीने से परिवार के साथ बाहर नहीं गया । आज रविवार था ,छुट्टी का दिन था, बीवी बच्चों को प्रॉमिस किया था कि इस संडे घूमने चलेंगे । तो मॉल में गए ,फिल्म देखी, खाना खाया , फिर थोड़ा घूमने लगे।। श्रीमती जी एक आर्टिफिशियल ज्वैलरी शाँप देखने लगी, एक हार देख कर बोली , यह बहुत सुंदर है ,मैं ले लेती हूं ।…

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अहसास का रिश्ता

muslim meer

“माहिरा अप्पी आपसे मिलने कोई आया है।” “अभी-अभी तो बच्ची ने घर में कदम रखा है। कौन आ गया सुबह-सुबह?” अम्मी ने पूछा। “हमसे भी ज्यादा जिन्हें इनका इंतज़ार रहता है…!”मुझे हँसी आ गई थी। “अच्छा-अच्छा! मीर साहब आए हैं। जा बेटी मिल कर आजा!” “अभी जाती हूँ।” कहकर अप्पी नहाने चलीं गईं। मुम्बई से बनारस पहुँची माहिरा अप्पी इस बार बड़े दिनों बाद आईं थीं। नहा कर निकलीं तो हम सभी छोटे भाई-बहनों ने घेर लिया। हमारा बड़ा परिवार होने से एक-दो तो थे नहीं, और सबको अपनी बातें बतानी थीं।…

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Dear bestie❤

Dear best friend   I want to tell you that how much I hate you, you are not even my friend you are my sister, I pray everyday that a ghost come and catch You! I will come laughing and save you not because I love you because then I will be the heroine and you will be crying, Every time I ask you something you lie I could sense that with your nervous smile, You are the most stupid person I have ever seen in my life A person…

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परफेक्शन

क्या बात है लता? अभी तक नाश्ता भी नहीं किया बस घर की सफाई किए जा रही हो।”, मनोज ने  पूछा।“आपको बताया तो था कि मेरी स्कूल की सहेली मीना आज लंच पर आ रही है।,” लता ने कहा।“अरे हां, तुमने बताया था कि स्कूल खत्म होने के बाद तुम उससे कभी मिल नहीं पाई थी और संजोग से उसके ऑफिस की मीटिंग यहां है। अब समझा कि इतनी सफाई क्यों हो रही है,” हंसते हुए मनोज ने कहा।“लता तुम्हें अपनी तबीयत का तो पता है ना! डाॅक्टर ने समय…

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मजबूरी

  तुम महज़ नाम नहीं,जीवन हो, बेवजह भी हो और जरूरी भी। पल -पल में शामिल हो ऐसे, पास भी तुम,तुम्हीं से दूरी भी। अर्ज है कि मर्ज़ बन चुके हो ऐसे, फ़र्ज़ भी कर्ज़ लगे,और गैर जरूरी भी। कुछ इस कदर समाए हो मुझमें, तुम्हें ढ़ोना मेरा शौक भी है और मजबूरी भी! आर्या झा

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