2020 – गुड बाय

ब्लादीमिर लेनिन ने एक बार कहा था, “दशकों बीत जाते हैं जब कोई घटना नहीं होती लेकिन कभी ऐसा भी होता है कि हफ्तों में दशक गुजर जाते हैं।”
साल 2020 जल्द ही खत्म होने वाला है और हम लोग नए साल के स्वागत के लिए एक नई आशा के साथ खुद को तैयार भी कर रहे हैं। संभवत: ऐसा पहली बार होगा जब सभी लोग नए साल के आने से ज्यादा, साल 2020 के बीत जाने की ज्यादा खुशी मनाएंगे, क्योंकि साल 2020 का अनुभव वैश्विक रूप से बहुत ही बुरा साबित हुआ है। कोरोना महामारी के कारण पूरे विश्व में जहां लाखों लोगों की जान चली गई, वहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह से प्रभावित हुई और लाखों लोग बेरोजगार हो गए। यूं तो हर साल अपने बीतने के साथ खट्टे मीठे अनुभव देकर जाता है, लेकिन ऐसे लोग कम ही होंगे जो यह कहेंगे कि साल 2020 में उन्हें खुशी भी प्राप्त हुई है। साल 2020 बीतने के साथ ही लोगों को कई सबक भी देकर जा रहा है, जो उन्हें जीवन भर याद रहेंगे।
साल 2020 में सबसे बड़ा सबक यह मिला कि खुद को सेहतमंद कैसे रखना है। कोरोना महामारी काल में यह संदेश मिला कि खुद को स्वस्थ्य रखने के लिए प्रोटीन, फाइबर युक्त भोजन, विटामिन सी युक्त पदार्थों का सेवन ज्यादा करना चाहिए।
साल 2020 यह भी संदेश दे गया कि जीवन जीने की कला हमें प्रकृति से ही सीखने होगी। कुदरत को बगैर नुकसान पहुंचाएं सीमीति संसाधानों के साथ कैसे सर्वाइव करना है। लोगों का न्यूनतम जरूरत की चीजों के लिए भी तरसना पड़ा तो कहीं तो लोगों को न्यूनतम चीजों में लंबे समय तक गुजाना करना पड़ा। साल 2020 में लोगों को यह सबक मिला कि कम से कम चीजों में कैसे जीवन का गुजारा किया जा सकता है और खुश रहा जा सकता है।
जब कोरोना महामारी के कारण वैश्विक लॉकडाउन लगा तो कई लोगों ने महसूस किया कि पर्यावरण साफ व हवा शुद्ध हो गई। पंजाब व उत्तरप्रदेश के कुछ क्षेत्रों से भी हिमालय की बर्फीली पहाड़ियां तक दिखने लगी।
साल 2020 में लोगों ने ज्यादा से ज्यादा समय अपने परिवार के साथ बिताया। लॉकडाउन में यह सबक मिला कि कैसे खुद के स्वास्थ्य और परिवार का ध्यान रखना चाहिए। परिवार की खुशी ही सबसे बड़ी खुशी होती है। आमतौर पर पैसा कमाने और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों का खुद के लिए और परिवार के लिए वक्त निकाल पाना काफी मुश्किल था, लेकिन साल 2020 में कुछ थमकर यह सबकुछ सोचने का बहुत अच्छा अवसर दिया। परिवार के साथ बिताए ये पल जीवनभर याद रहेंगे।
फिजिकल टच के डर से लोगों ने कैश में लेन-देन बंद कर दिया और इसके चलते डिजिटल पेमेंट ने कैश की जगह ले ली। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ रिटेल में 70% से ज्यादा पेमेंट डिजिटल हो चुका है। इससे लेनदेन आसान और तेज हुआ है और हमारी जिंदगी को और गति मिली है।
सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन करने के लिए सर्विस सेक्टर ‘वर्क फ्रॉम होम’ हुआ। हमारे देश में कई कंपनियों ने अगले कई सालों तक के लिए वर्क फ्रॉम होम को मंजूरी दे दी। कुछ कंपनियां इसे एक स्थाई विकल्प के तौर पर देख रही हैं। जो लोग कई किलोमीटर का सफर करके या घर से दूर रहकर जॉब करने को मजबूर थे, उन्हें 2020 में रिमोट वर्किंग का एक विकल्प मिला।
जब भी कोई आपदा या समस्या आती है तो उसका सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ता है। स्कूल बंद हो जाते हैं और बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब होने लगती है। लेकिन, इस साल कोरोना के चलते जब स्कूल लगभग बंद ही रहे, तो बच्चों के लिए विकल्प तलाशा जाने लगा और तभी ई-लर्निंग सामने आई। इस बात के लिए बच्चे 2020 को थैंक्स कह सकते हैं। आगे भी यह विकल्प उनकी पढ़ाई को ब्रेक नहीं होने देगा।
इस साल शादियों का सीजन भी कोरोना की भेंट चढ़ गया। बहुत सी शादियां कैंसिल हो गईं, हम लोग चाह कर भी उन शादियों का हिस्सा नहीं बन पाए, लेकिन इस बीच वर्चुअल वेडिंग के अनोखे आइडिया को इजाद किया गया। लोगों ने शादी की सभी रस्मों को ऑनलाइन घर बैठे देखा, वर-वधू को आशीर्वाद दिया और यहाँ तक कि गिफ्ट और नेग भी ऑनलाइन ही पहुँच गए। पूरी दुनिया में करीब 12 हजार शादियां ऑनलाइन हुईं।
इस साल कोरोना के चलते हमने साफ-सफाई के महत्व को समझा और इसे लेकर गंभीर हुए। हाथ हम सभी धोते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसा खाना खाने के वक्त ही करते थे। आमतौर हम हाथों को धुलने को लेकर इतना ध्यान नहीं देते थे। कुछ भी छूने के बाद, या किसी से मिलने के बाद कोई शायद ही हाथों को सैनिटाइज करता हो। लेकिन इस साल हम सबका ध्यान हाथ धोने, ऑफिस या बाहर से घर लौटने पर खुद को सेनिटाईज़ड करने पर ही केंद्रित रहा।
यह साल कोरोना के साये में बीता, सभी अपनी इम्यून सिस्टम और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर थे। इसके चलते योग और एक्सरसाइज एक ट्रेंड के तौर पर सेट हुए। क्या आप काढ़ा, गर्म पानी, गिलोय, काली-मिर्च और हल्दी दूध पहले पीते थे? लेकिन, आज हम में से बहुत लोग ऐसा कर रहे हैं। डॉक्टर भी बेहतर इम्यून सिस्टम के लिए ऐसी चीजों को लेने की बात कह रहे हैं। 2020 में हमने अपनी परंपराओं के महत्व को समझा और बहुत तेजी से उन्हें अपनाया भी है।
खबरों के अनुसार, कोरोना का टीका बनकर आने वाला है, और साथ ही एक और खतरनाक कोरोना स्ट्रैन ब्रिटेन मे मिला है। अब कोरोना समाप्त हो जाए या नहीं, बस यही आशा है कि सब अपने स्वास्थ्य का नियमित ध्यान रखें। सरकारें आम लोगों के लिए उचित स्वास्थ्य सुविधाएं हमेशा उपलब्ध रखें। मजदूरों को रोजाना काम मिल सके। कोरोना के कारण मनुष्य फिर से समझ रहा है कि उसके बहुमूल्य जीवन की ज़रूरतें वास्तव में कितनी हैं।
‘थोड़ा है, थोड़े की ज़रूरत है, ज़िंदगी यहां खूबसूरत है’ उसका प्रिय गीत है अब।
नए साल में आप सभी स्वस्थ्य और सुरक्षित रहें। ऐसी शुभेच्छा के साथ –
राहुल कुलश्रेष्ठ

Related posts

Leave a Comment