सोफा

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ज्यादातर ऑफिस ,घरों में पाया जाने वाला थोड़ा कॉमन सा सामान। आजकल तो बहुत तरह के होते हैं छोटे बड़े सोफे, एक से एक डिजाइन और फैशनेबल सोफे, स्टेटस सिंबल बनते सोफे , ड्राइंग रूम की रौनक सोफे ,
लेकिन मेरी कहानी का किरदार “सोफा” एक मध्यमवर्गीय परिवार का निम्न वर्गीय सोफा है। “मध्यम वर्गीय परिवार ” ! हमारा समाज तीन भागों में बँटा हुआ है । धनी वर्ग , मध्यम वर्ग ,निम्न वर्ग । लेकिन जो यह मध्यम वर्ग है यह अपने आप को भी तीन भागों में बांट लेता है एक “धनी मध्यम वर्ग” जिसके पास अपनी आवश्यकता के सारे सामान जुटाने के सारे साधन है यह वर्ग आर्थिक रूप से मजबूत होता है । “एक मध्यम मध्यम वर्ग ” यह वर्ग थोड़ा साधरणता के साथ आवश्यकता के साधन जुटा लेता है इनकी जिंदगी की गाड़ी आर्थिक रूप से ठीक-ठाक तरीके से चलती है। एक होता है “निम्न मध्यम वर्ग ” जो अपनी जिंदगी से रस्साकशी का खेल खेलते हैं बड़े सपनों और छोटी आवश्यकताओं के बीच झूलता एक मध्यम वर्ग जो बाजार से चाहता कुछ और है, और लाता कुछ और है ।।।जिसकी जिंदगी में ब्रेकर बहुत सारे हैं अच्छे वक्त की कल्पना में जीता एक” निम्न मध्यम वर्ग ”
तो एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार का एक सोफा जो अपनी दो कुर्सियां रूपी परिवार के साथ ड्राइंग रुम जैसी कही जाने वाली जगह पर विराजमान है ।। तभी उस घर की ग्रहणी कंधे पर सूखे हुए कपड़ों का एक ढेर लाकर सोफे पर एक तरफ पटक देती है सोफा थोडा़ चिढ़ जाता है तभी दादी जी मगोंडियों की एक परात एक तरफ रख देती है यहाँ पंखे की हवा अच्छी लगती है ये सूख जायेंगी। दो बच्चे आते हैं और सोफे पर उछल कूद मचाने लगते हैं । बेचारा सोफा हर किसी के बोझ को झेलता हुआ चुपचाप पड़ा रहता है । अचानक घर में 6 मेहमान आ जाते हैं तो फिर सोफे पर तो 5 की जगह है तभी ग्रहणी आती है कोई नहीं भाई साहब! यहां एडजस्ट हो जाएगा “एडजस्ट” शब्द निम्न मध्यमवर्गीय परिवार की सबसे बड़ी दवाई होता है
निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में मुखिया की हालत भी तो फिर सोफे से कम नहीं होती ।पूरे परिवार का बोझ ढ़ोता रहता है फिर भी घुटन व चिढ़न के साथ थोड़ा मुस्कुरा देता है अचानक 10 सालों से साथ निभाता स्कूटर भी आज धोखा दे देता है।अब ये एडजस्टमेन्ट कहां होगी , लेकिन हो ही जायेगी क्योंकि यह तो हमारे खून में है ।।।हर त्योहार व मेहमान उसकी तकलीफ बढा़ देते हैं फिर भी वह आपके साथ जीने की हर संभव कोशिश करता है।।।।।।। तभी फोन बजता है ग्रहणी बात करने के बाद चिल्लाते हुए बच्चों से कहती है बेटा जल्दी जल्दी ड्राइंग रूम साफ करो , सोफे को फिर से खाली कर दो। दीवान से निकालकर सुंदर से कवर चढ़ाए जाते हैं ।अरे !आप भी अच्छे से कपड़े बदल लो थोड़ी अच्छी शर्ट पहन लो। मेहमान आने वाले हैं । सोफा और मुखिया दोनों ही अपनी असल जिंदगी में से निकल कर दिखावे के लिए तैयार है ,दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते हैं।

हीतू सिंगला

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