सीखने मे क्या बुराई है

ऋषभ, सुनो ना, सुरभि ने कहा, हाँ बोलो सुरभि – मैं सुन रहा हूँ, ऋषभ ने मोबाइल में आँखें गडाए हुए कहा, इधर देखो मुझे, सुरभि ने कहा – हाँ बाबा लो रख दिया फोन, अब बोलो ऋषभ ने कहा | “मुझे ड्राइविंग सीखनी है” सुरभि ने ऋषभ का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा” |

अरे तुम्हें ड्राइविंग सीखने की क्या जरुरत है, मैं हूँ ना तुम्हारा परमानेंट ड्राइवर, ऋषभ ने कहा और वैसे भी मैंडम मुझे अपनी कार बहुत प्यारी है,सो मैं उसे तुम्हें देने से रहा, “अरे सीखने में क्या बुराई है और वैसे भी पहले मैं ड्राइविंग स्कूल में सीखूंगी, जब आ जाएगी तभी तुम्हारी कार को हाथ लगाऊँगी – सुरभि ने कहा | “आ जाए तो भी मैं अपनी कार तुम्हें नहीं देने वाला, वैसे तुम्हारा ये सीखने में क्या बुराई है, वाला फंडा मेरी समझ से परे है, ऐसा बोल बोलकर तुमने ऑनलाइन ट्रान्जेक्शन, मोबाइल बैंकिंग, हमने कौन कौन से इनश्योरेन्स लिए है ये सब सीख और पता कर लिया है, हम है न आपके गुलाम इन सब कामों के लिए “ऋषभ ने मुस्कुरा कर कहा” तो मैं सीख लूं न “सुरभि ने संशय से पूछा” हाँ बाबा सीख लो |अब खुश – ऋषभ ने  सुरभि को पास खींचते हुए कहा “बहुत खुश” सुरभि ने ऋषभ को गले लगाते हुए कहा, तभी उनके दोनों बच्चे मम्मा पापा कहते हुए कमरे में आ गए और दोनों उनमें बिजी हो गए।

 

सुरभि ने ड्राइविंग क्लास शुरू कर दी। सासू मां ने भी टोका “बहू तुझे क्या जरूरत है ये सब सीखने की, ऋषभ है ना बाहर के कामों के लिए”, “वो तो है मांजी, लेकिन सीखने में क्या बुराई है, क्या पता कब जरूरत पड जाए” सुरभि ने एक महीने में अच्छी तरह गाडी चलाना सीख ली, लेकिन ऋषभ अब भी उसे अपनी गाड़ी को हाँथ लगाने नहीं देता था।

कुछ दिनों बाद ऋषभ के कजिन की शादी में वे सब सपरिवार शामिल हुए, चूंकि शादी पास के शहर में ही थी तो वे अपनी कार से ही चले गए। लौटते समय रात का वक्त था, ऋषभ ड्राइव कर रहा था कि अचानक उसे सीने में तेज दर्द महसूस हुआ, दर्द इतना तेज था, कि उसने बीच सडक में ही गाडी रोक दी । सुरभि, बच्चे, सास ससुर सभी घबरा गए। वे अब भी शहर से कुछ 15, 20 कि.मी दूर थे, रास्ता भी सुनसान था। सुरभि समझ गई की बात गंभीर है और इस वक्त घबराने से कोई फायदा नहीं। उसने तुरंत ही ससुर जी की मदद से ऋषभ को दूसरी सीट में बिठाया और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ गई, भगवान का नाम लेकर गाडी स्टार्ट की और सावधानी पूर्वक चलाते हुए अस्पताल पहुंच गई।

ऋषभ को तुरंत आई सी यू में एडमिट कराया गया, डाक्टरों ने कहा सीवियर हार्ट अटैक था, लाने में थोडी और देर होती तो जान भी जा सकती थी। सासू मां ने सुरभि के सर पर हाँथ फेरते हुए कहा “बहू तेरी वजह से आज ऋषभ की जान बची है, क्या होता अगर तू कार चलाना नही सीखती तो, सुरभि ने सब कुछ सम्हाल लिया हॉस्पिटल के बिल ऑनलाइन ट्रान्जेक्शन करके भर दिए, इन्श्योरेंस क्लेम कर दिया। जब ऋषभ को होश आया तो सासू माँ ने बताया कि कैसे सुरभि ने सब कुछ सम्हाला, ऋषभ ने सुरभि का हाथ पकड के रूंधे गले से कहा “आई रियली प्राउड आफ यू,अब समझ में आया सीखने में कोई बुराई नहीं है” ।

 

दोस्तों जानकारी रखने में कोई बुराई नही हैं, क्या पता, कब कौन सी जानकारी कैसे काम आ जाए । आपको ये कहानी कैसी लगी मुझे कमेंट करके जरूर बताए।

©मंजुला

 

 

Related posts

Leave a Comment