सियापा इंग्लिश का

अंग्रेज चले गए लेकिन अंग्रेजी यहीं छोड़ गए| अरे भाषा नहीं है मुसीबत है मुसीबत| नाक में दम कर रखा है, बोलो कुछ और मतलब कुछ और निकलता है| आदमी समझे कैसे बताओ भला?” शांति का बड़बड़ाना जारी था।

“अरे क्या हुआ मेरी शांति? आज सुबह सुबह अशांति क्यों फैला रही हो?” राकेश जी ने अपनी दाढ़ी में शेविंग क्रीम लगाते हुए कहा|

“देखो हम भी पढ़े लिखे हैं, डबल एम.ए हैं लेकिन ये जो आजकल के बच्चे गिटर-पिटर अंग्रेजी बोलते हैं ना हमको पल्ले नहीं पड़ती और हमको ये नहीं समझ में आता कि सभी को अंग्रेजी क्यों बोल लेना होता है? आए चाहे ना आए! और क्यों अपनी मातृभाषा में बात करने से छोटा महसूस होता है।

अभी थोड़ी देर पहले पड़ोस की शार्माइन आई थी, बोल रही थी मिसेज वर्मा कल हमारे घर में हमनें ब्यूटीफुल ट्रेजडी रखा है, आप जरूर आइएगा| हमारा माथा घूम गया, हमने पूछा जी क्या रखा है? तो कहने लगी ओ जी सुंदर कांड| ओह आप को अंग्रेजी समझ में नहीं आती ना?” अभी बताओ भला हमको अंग्रेजी समझ नहीं आती या उनको अंग्रेजी बोलनी नहीं आती?

और कल मोहल्ले के बच्चे आए चंदा माँगने, हमने जैसे ही दरवाजा खोला तो हाथ उठाकर बोलते हैं “हे आंटी व्हाट्स अप!”

 

हमने ऊपर देखा ऊपर तो कुछ था ही नहीं, हमने कहा “का है ऊपर? कुछ भी तो नहीं|” तो खे खे करके हंसने लगे|

बाद में गुड्डू ने समझाया कि वो लोग आप कैसे हो, ये पूछ रहे थे| अरे सीधे से “प्रणाम चाची कैसे हो नहीं बोल सकते क्या?”

गुड्डू का दोस्त आया कल उससे मिलने, हम यहीं बैठे थे| हमको देखा फिर गुड्डू से कहता है “हे बड्डी लेट्स हैंग आउट”| क्यों भाई बाहर क्यों टंगना है? और टंगना ही क्यों है आखिर? बैठो ना आराम से घर में। हमरा तो ना माथा घूम जाता है सच में| मिले ये अंग्रेज तो बताएं हम उन्हें।

बित्ते भर का है छोटू, उसको इतने प्यार सें “माँ” और “बाबा” बोलना सिखाया था, जुम्मा जुम्मा दो महीना हो रहा है स्कूल जाते अब क्या बुलाता है? मम्मी और डैडी! ऐसा लगता जैसे हम कोई इजिप्ट के ताबूत में बंद हैं और तुमको तो जीते जी मार ही दिया इस नासपीटी अंग्रेजी ने|

कोई बोले अब हमारे घर ऐसी अंग्रेजी टांग ना तोड़ दी तो मेरा नाम भी शांति नहीं। तभी छोटू दौड़ता हुआ आया “माँ माँ मटका चाय आ रही जोर से, जल्दी चलो”|

“क्या… क्या आ रही है?” शांति नें झुंझलाते हुए पूछा|

“अरे पॉटी, आप ही तो कहती हो अंग्रेजी में नहीं बोलना है।” छोटू ने अपना पेट पकड़ते हुए मासूमियत से कहा|

“हे भगवान! बचा ले मुझे” शांति वहीं अपना सर पकड़ कर धम्म से बैठ गई और राकेश जी का हंस हंस कर बुरा हाल था।

मंजुला दूसी

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