साजन और सावन

 

साजन तुम बिना कैसा सावन ,
वर्षा ऋतु की प्रथम फुहार ज्यूँ
मधुर प्रेम का प्रथम समर्पण ,
भिंगो गयी हैं यूँ अंतर्मन ,
लौट आयी है देखो तरुणाई,
तेरे भी हैं चंचल चितवन !

धूली सी धरती धुले वृक्ष भी,
महकाते हैं वन-उपवन ,
सावन देखो झूम रहा है,
क्या -कुछ मन में गुन रहा है ,
कोई न रहे अछूता शायद ,
ऐसे बादल झूम रहा है ।

तुम भी बादल बनकर आओ,
मधुर -प्रेम मुझ पर बरसाओ,
धरा के समान मेरे मन को,
सोंधी खुशबू से महकाओ
सावन होगा तब मनभावन ,
साजन तुम संग सावन, सावन !!

आर्या झा
हैदराबाद

आर्या झा

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