वो 35 पर की आंटी

अमूमन 35 साल की उम्र गुज़रते गुज़रते औरतों में अनेकों परिवर्तन आने लगते हैं। कभी ये परिवर्तन हमारे स्वभाव में होते हैं तो कभी हमारी दिनचर्या, कभी हमारी बाहरी खूबसूरती में तो कभी आन्तरिक में। अक्सर देखा गया है कि महिलाएं 35 पार करते ही और अधिक आकर्षक, अधिक मुखर एवं अधिक सुलझी हुई सी मालूम पड़ती हैं।

लेकिन इन सभी बदलावों के बावजूद जो सबसे बड़ा बदलाव हममें आता है, वो होता है हमारे रहन सहन और सुंदरता को लेकर। अक्सर लोगों को लगता है कि टीनएज में लड़कियां अपनी सुंदरता, अपने कपड़ों पर जितना ध्यान देती हैं उतना वो कभी नहीं देतीं। लेकिन यकीन मानिए, 35 पार हर महिला रखरखाव फिर चाहे वो घर का हो या खुद का, व्यायाम से जुड़ा हो या फैशन से, वो किसी भी हाल में 16 साल की लड़की को मात दे सकती है।

सोलहवां साल किसी भी लड़की की ज़िंदगी का बहुत खूबसूरत मोड़ होता है, जब अंदर बाहर हर तरफ नित नए बदलाव होते हैं। हमारे तन और मन में एक अजीब सी कश्मकश चलती है। अक्सर देखा गया है कि इस उम्र में लड़कियां बाह्म सुंदरता के प्रति इतनी पागल होती हैं कि अपने भीतर झाँक ही नहीं पातीं।

लेकिन आप 35 साल की किसी भी महिला को देख लीजिए, हर चीज़ पर क़ाबू रहता है। मजाल है कि साड़ी का ब्लाउज मैच ना करे, या जीन्स के साथ का टॉप गड़बड़ हो जाए। पब में भी होंगी तो एकदम संतुलित, उन्हें पता है किसे , कहाँ , कितनी छूट देनी है। पूजा में होंगी तो ग़लती से भी साड़ी का पल्लू सर से नीचे ना होगा, दोस्तों के साथ होंगी तो इनसे ज़्यादा सनकी कोई ना होगा।

कॉलोनी की किट्टी पार्टी में पकोड़े बनाने वाली महिला अगर आपको किसी पांच सितारा होटल में खाना खाते दिखे तो आश्चर्य मत करियेगा। इन्हें आता है खुद को हर रूप में ढाल लेना, और उतनी ही सुदृढ़ता से दूसरों को अपने रंग में रंग लेना।

ये 35 के पार की उम्र है, हर उम्र में ढलना जानती है। बच्चों के साथ बच्ची भी बनती है और बुजुर्गों की सेवा भी करती है। पब जाकर डिस्को भी करती है, और सुबह 4 बजे से नगर कीर्तन में सेवा भी करती है। इसे आता है सामंजस्य बैठाना हर उम्र के साथ, हर मोड़ में मुड़ना जानती है, और ज़रूरत पड़ने पर मोड़ को मोड़ना भी आता है इसे।

तो जनाब 35 के बाद जिसे आप आंटी बोलते हैं ना, असल में वो वही हैं जिसे आपके किसी प्रकार के संबोधन से फर्क़ नहीं पड़ता। क्योंकि उसकी सोच अब स्थिर है, जीवन के इस मध्य में आकर वो समझ चूँकि होती है कि चल, क्योंकि अगर वो रुकी तो समय रुक जाएगा। वो जानती है कि वो चाहे तो तुम्हें अपने साड़ी के पल्लू से बांध के रख सकती है और चाहे तो तुम्हारे अहम को अपनी हाई हील के नीचे कुचल सकती है।

पर वो कुछ नहीं करती, तुम्हें उड़ने देती है, तुम्हें ये महसूस होने देती है कि उसके जीवन की बागडोर तुम्हारे ही हाथों में है, लेकिन ऐसा क्यों!

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