वो घर

वो घर 

आज कल में  अक्सर  डर जाती हूँ जब भी उस घर को याद करती हूँ  ,बात आज से कुछ वक्त पहले की है ,हमारा ट्रांसफर  हुआ था बस फीर क्या था नया घर नई जगह थी बहुत अच्छा छोटा सा शहर था में अपनी १० साल की बेटी को  रोज स्कूल  छोडने  जाती थी ,रास्ते में स्कूल से पहले एक सुनसान सा रास्ता आता था जहा पर एक बहुत पुराना सा घर था जो लगता था सालो से बंद है ,पर हर बार जब भी में वहा से निकलती ना चाहते हुए भी उस घर की तरफ मेरी नजरे वहा चली जाती वहा कुछ भी अच्छा नही था बहुत ही अजीब सी तन्हाई बहुत अजीब सी घबराहट पर अब ये मेरा रोज का काम था में मेरी बेटी से भी पूछती की क्या तुम को डर नई लगता वो बहुत प्यार से बोलती आप होना बस , जब भी में किसी से पूछती की वो घर किस का है तो सब बोलते कोनसा घर बस क्या फिर में समजाती पर फीर मुझे लगता की शायद में ठीक से समझा नहीं पाती सोचकर बस चली जाती अपने घर ,पर रातदिन मन में अजीब से ख्याल आते की मुझे क्या करना है उस घर से पर वापस जब में वहा से निकलती तो वापस मेरी नजरे उस घर पर लगजाती अब मुझे भी लगने लगा की वो घर मुझे ही दीखता है अब में अपनी दोस्त के साथ वहा गई उस को बोला मेरे साथ चलो एक घर दिखाना है वो तैयार होगई हम स्कूल के लिए निकले बस वो घर आने ही वाला था अब क्या था घर आगया मैने दोस्त से कहा ये घर अच्छा है ,उसने कहा कोनसा घर मुझे लगा वो मजाक कर रही है मेरी बेटी ने भी कहा मम्मी कोई घर नही है अब क्या था में बुरी तरह से डर गई थी , अब मुझे बहुत डर लगा अब मैने रास्ता बदल लिया समझ गई थी की   वो घर   सिर्फ मुझे दिखता है 

Related posts

Leave a Comment