वोकल फार लोकल

मेड इन इंडिया बनाम स्वदेशी बनाम आत्मनिर्भर भारत

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हालिया संबोधन में एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का वादा किया है, इसका उद्देश्य भविष्य के भारत का पुनर्निर्माण करना है।

आत्मनिर्भर भारत का मतलब स्वदेशी के करीब , करीब शब्द का प्रयोग इस लिए कर रही हूं कि यहां मोदी जी के दृष्टिकोण में आत्मनिर्भर का मतलब ना तो बहिष्करण है ना ही अलगाववाद रवैया जो इस बात पर निर्भर है की दक्षता में सुधार किया जाए इसके अलावा दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए दुनिया की मदद करना मोदी सरकार का विचार है।

जिसके पांच स्तंभ है

‌१. इकोनामी

‌२.स्ट्रक्चर या इंफ्रास्ट्रक्चर

‌ 3 .सिस्टम या प्रणाली

‌4 . वाइब्रेंट डेमोक्रेसी

‌5 .डिमांड

मोदी जी मानते हैं कि आत्मनिर्भरता मध्यम एवं लघु उद्योग की मदद से ही की जा सकती है

उन्होंने पूरे भाषण में स्वदेशी के स्थान पर आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, साथ ही उन्होंने कहा ‘हमें लोकल चीजों को लेकर वो

कल होना चाहिए।’ जिसका मतलब है वह चीजें जिन का उत्पादन भारत में हुआ हो।

अब जबकि मेरे हिसाब से स्वदेशी संरक्षण वादी भारत की तरफ वापस जाना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए किसी भी तरह व्यवहारिक नहीं है, अब तो मेड इन इंडिया ही स्वदेशी के बराबर है।

क्योंकि एक तरफ तो हम स्वदेशी की बात करें और दूसरी तरफ चीन से बौखलाई हुई विदेशी कंपनियों को भारत में निमंत्रण एवं प्रोत्साहन दें ,दोनों ही बातों में विरोधाभास महसूस होता है।

अब समझे भारत आत्मनिर्भर कैसे बने जब विदेशी कंपनी भारत आती है तो बहुतायत में रोजगार मिलेगा सरकार को टैक्स मिलेगा ।

हाल में मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के विचार आने के बाद नित नए एफबी और व्हाट्सएप पर पोस्ट आ रहे हैं । चुटकुले बन रहे हैं। जो अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। वैचारिक सोच एवं सुझाव रखने के बजाय केवल और केवलआलोचना। मेरी एक बात समझ में नहीं आती कि हम चाहते क्या हैं कोई कुछ भी करें अच्छा करें बुरा करें बस हमको तो मोदी की बुराई करनी जैसे हमारा उद्देश्य देश को बढ़ते देखना नहीं मोदी की टांग खिंचाई करना है।जब हम आत्मनिर्भर बनने की बात कर रहे हैं तो उस पर भी चुटकुले बन रहे हैं। आत्मनिर्भरता तो किसी भी देश का सकारात्मक पहलू है उस पर इतना छींटा कसी क्यों ? कौन सा देश अपने आप की आत्मनिर्भरता को महत्व नहीं देता सभी देश जैसे अमेरिका, चीन, जापान ,जर्मनी ,इजराइल सभी तो महत्व देते हैं।वैसे कोई बड़ी बात नहीं है यह तो बनी हुई बात है कि जो करता है उसकी ही आलोचना होती है ,जो कुछ करता ही नहीं उसकी आलोचना कैसी? सबसे पहले हमें आत्मनिर्भरता का मतलब समझना होगा।

फलां सर्फ खरीदो फलां नहीं खरीदो।अरे जो भारत को रोजगार दे रहे हैं भारत में स्थापित हैं टैक्स दे रहे हैं। उन्हें रोकने की जरूरत नहीं है।

हम समझे कि हमें बहिष्कार किन चीजों का करना है वह हैं भारत से बाहर बने उत्पाद अथवा असेंबल इन इंडिया वाले उत्पाद, इनसे हमें और हमारी अर्थव्यवस्था पर सीधा नुकसान पहुंचता है जैसे एमआई, रियल मी ,ओप्पो, विवो जैसी कंपनियां जो असेंबल इन इंडिया को मेड इन इंडिया बोल करके आपको चिपकाती हैं और और देश की इकोनॉमी को सीधा सीधा धक्का पहुंचाती है अब हमें करना क्या है?

क्या है मोदी जी का विजन

हमें देश और दुनिया की बड़ी कंपनियों को भारत में आकर्षित करना उनके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है उनसे कहना है आइए अपना प्लांट लगाइए, हमें हिस्सेदारी दीजिए, हमारे लोगों को रोजगार दीजिए , देश को कर दीजिए, हम आपका सामान सामान खरीदेंगे साथ ही आप यहां से विदेश में जमकर अपना उत्पाद एक्सपोर्ट करिए और हमारे देश को विदेशी मुद्रा भी दीजिए यह है मोदी जी का असली विजन

ना कि सर्फ मत खरीदो घड़ी डिटर्जेंट खरीदो।

सिद्धि पोद्दार

 

 

 

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