विवाह विच्छेद के कारण और सावधानियां

*सामाजिक सरोकार*

 

*समाज में सगाई- सम्बन्ध और विवाह विच्छेद की बढ़ती घटनाएं….और धीरे-धीरे पैंठ जमाती  नयी कुरितियां और विकृतियां*

 

एक समय था जब समाज में अन्य कुरीतियों के साथ-साथ, दहेज प्रथा एक ऐसी कुरीती बन गई थी, जिसमे पिस कर समाज और परिवार बर्बाद हो जाते थे। पिछले पांच दस सालों में जागरूकता के कारण इसमें कमी जरूर आई है, परंतु उसके साथ साथ समाज में एक नई विकृति पैदा होती जा रही है और वह है “सगाई संबंध और विवाह विच्छेद” की बढ़ती घटनाएं।”

 

हम देखते हैं और सुनते हैं परंतु क्या कभी हमने विश्लेषण किया है कि ऐसा क्यों हो रहा है इसके पीछे क्या कारण है, और इसका निदान क्या है। हम इसको जानने की कोशिश करें और हो सके हो सके तो सावधानी बरतें जिससे ऐसी घटनाएं की पुनरावृति नहीं हो।

 

*वर पक्ष के कारण*

 

पुराने जमाने में माता पिता, अपनी बिटिया के लिए खानदान देखकर और पूरी जांच-पड़ताल के बाद संबंध करते थे, परंतु आज कल ज्यादातर रिश्ते इंटरनेट के द्वारा और मैरिज ब्यूरो के माध्यम से होने लगे हैं, जिसमें जो जानकारी आपको दिखाई जाती है आप सिर्फ उसी पर विश्वास करके संबंधों की नींव रख देते हैं, जबकि अंदर की सच्चाई आपको नहीं मालूम होती है और भ्रमजाल से सच्चाई का आभास भी नहीं हो पाता है। जब माता-पिता लाखों रुपए खर्च करके अपने लाडली का विवाह करते हैं तो क्यों नहीं वह कुछ हजार रुपए खर्च करके लड़के या उसके परिवार तक पहुंच कर हर संभव पूरी जानकारी क्यों नहीं जुटाते है।

 

आजकल प्रेम विवाह का चलन भी कुछ ज्यादा बढ़ गया है। लड़के अपनी खूबसूरती, दिखावटी रईसी लटको- झटको और लच्छेदार बातों से लड़कियों को प्रभावित और आकर्षित करते हैं, कई सपने दिखाते हैं और लड़कियां इनके बहकावे में आकर माता-पिता को संबंध के लिए मजबूर कर देती है। बाद में उन्हें पता चलता है, की सच्चाई कुछ और ही है।

 

जब सगाई संबंध हो जाते है, तो खुली छूट और मोबाइल द्वारा, लड़के और लड़की के बीच जो वार्तालाप होता है, जो मिलना- मिलाना होता है, उससे लड़की को बहुत सी सच्चाई मालूम हो जाती है और उसके माता-पिता, बड़े दुखी मन से सगाई संबंध तोड़ देते हैं, जिससे उन्हें सिर्फ पैसे का ही नुकसान नहीं, बल्कि समाज और परिवार के सामने लज्जित होना पड़ता है और आगे संबंध करते समय पूरी घटना का विवरण और सफाई न जाने कितनों को देना पड़ता है।

 

अगर यहां चूक हो जाती है तो दुल्हन को ससुराल में जाकर पता चलता है, जो सपने उसे दिखाए गए थे तथा जो लंबी चौड़ी बातें रखी गई थी, वह सब दिखावा और आवरण था और उसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। जैसे कि दूल्हे का मकान,शिक्षा, नौकरी, आय, आचरण,बुरी आदतें,लत, शारिरीक असमर्थता, अक्षमता और उसकी सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक स्थितियां।

 

कभी-कभी माता-पिता लड़के के परिवार के व्यवसाय रहन सहन और रईसी से प्रभावित होकर संबंध तय कर देते हैं, बिना यह जाने की लड़के में खुद में कितना योग्यता है और वह आत्मनिर्भर है या नहीं। संबंध हो जाने के बाद ही पता लगता है जो कुछ दिख रहा है वह पारिवारिक है,और लड़के में किसी तरह की कोई योग्यता या आत्मनिर्भरता जैसा गुण नहीं है।

 

कुछ मामलों में ससुराल वालों की ओर से लड़की को प्रताड़ित और तंग किया जाता है कि उसे कोई काम नहीं आता, माता-पिता ने कुछ नहीं सिखाया,संस्कार नहीं है, रीति रिवाज को नहीं जानती है….अरे एक बड़े लाड़-प्यार दुलार से पली बच्ची अपना घर, माता-पिता और परिवार छोड़कर आपके घर आई है, उसे कुछ समय दीजिए, ताकि वह आपके घर को अपना सके। आपके घर के संस्कार, रीति रिवाज, खान-पान पहनावा इत्यादि में खुद को ढाल सके।  परंतु ऐसा नहीं उम्मीद की जाती है कि पहले दिन से वह ससुराल के रंग में रंग जाए और कोई गलती ना करें।

 

उपरोक्त कारणों से दुल्हन के माता-पिता को बड़ी ठेस लगती है बड़े लाड प्यार और दुलार से पाली हुई और पढ़ी-लिखी बच्ची जब दुख पाती है, तो लाखों रुपए खर्च करके, अच्छा विवाह करने के बावजूद उन्हें खून का घूंट पी कर संबंध को तोड़ना पड़ता है।

 

*वघू पक्ष के कारण*

 

कई बार लड़के वाले भी इंटरनेट के द्वारा और मैरिज ब्यूरो के माध्यम से, ख़ूबसूरत लड़की और उसकी पढ़ाई लिखाई, नौकरी देखकर प्रभावित हो जाते हैं तथा उसके और उसके परिवार के संस्कार, व्यवहार, परंपराओं, सामाजिक जीवन की जानकारी लिए बिना संबंध कर देते हैं।

 

संबंध तय होने के बाद जब लड़के- लड़की संवाद या मुलाकात करते हैं तो लड़के को मालूम होता है इस लड़की में कितना लालच, लालसा, बेतुकी मांगें, शर्ते सपने और ईगो भरी पड़ी है, जो उसके लिए पूरा करना संभव नहीं है। अतः मजबूर होकर उनको यह सगाई संबंध, विच्छेद करना पड़ता है। और अक्सर ऐसे मामलों में लड़के वाले की गलती ही बताई जाती है,और उन्हें परिवार और समाज में अपमान का सामना करना पड़ता है।

 

विवाह पश्चात जब दुल्हन ससुराल आती है तो, उससे उम्मीद की जाती है की, वो धीरे धीरे वह ससुराल के संस्कारों, जरूरतों ,पहनावे, खान-पान, परंपराओं और‌ ज़िम्मेदारियों को अपनाएं, बड़े लोगों को आदर सम्मान दें और उनके परिवार की समाज में इज्जत बढ़ाएं। परंतु कई बार  देखा गया है लड़की ससुराल पहुंचते ही अपनी शर्तों पर जीना चाहती है ऐसी उम्मीद और  आचरण करती है, कि जल्दी से जल्दी लड़का उसके वश में आकर, अपनी जिम्मेदारियों भूलकर, अपने माता पिता और परिवार से अलग हो जाए, तथा वह स्वतंत्र रूप से अपने अनुसार से अपना परिवार, वैवाहिक जीवन चलाएं।

आज के समय संबंध विच्छेद में मोबाइल और पीहर पक्ष का बहुत बड़ा हाथ है। मोबाइल पर दिन भर अपने ससुराल की बुराई, रोना-धोना लगा रहता है, और ताज्जुब होता है की माता पिता, बजाय उसको समझाने के, जाने अनजाने में उसका साथ देने लगते हैं, हर समय उसे कूटनीति समझाने लगते हैं की, क्या जबाव देना है, क्या करना, पहनना, बनाना,खाना है, अरे आपको इन सबसे क्या मतलब है, उसको समझाएं, गलती पर डॉटिये ,अपने परिवार में ढलने और जिम्मेदारियों का वहन करने दीजिए, उचित मार्गदर्शन कीजिए, हां… अगर वाकई कोई समस्या है उसका मिलजुल कर समाधान करें।

 

कुछ मामलों में बिना तह में जाकर,अपनी लाडली की कमियों को आवरण देकर संबंध विच्छेद कर देते हैं और कुछ मामलों में झूठे केस, एफ आई आर और ससुराल पक्ष पर आरोप लगाये जाते हैं।

 

सारांश :

आज झूठी शान शौकत, दिखावा, माता-पिता का हस्तक्षेप,बच्चों में जबरदस्त अभिमान, ईगो, संस्कारों की कमी और बढ़ती लालसा, सुख सुविधा, निकम्मापन और टूटते संयुक्त परिवार, संबंधों में खटास  के प्रमुख कारण है।

 

संयुक्त परिवारों के दौर में परिवार के सदस्यों में प्रेम, स्नेह, भाईचारा और अपनत्व का एक विशिष्ट माहौल रहता था। इस माहौल और संयुक्त परिवारों का फायदा परिवार के साथ पूरे समाज को मिलता था। लेकिन बदलते दौर और समय ने इस सारी व्यवस्था को बदलकर रख दिया है। अब वह दौर नहीं रहा। आज परिवार छोटे हो गए हैं और सब लोग स्वंय में केंद्रित होकर जी रहे हैं, महत्त्वाकांक्षा बढ़ रही है और संयम, बड़ों की कद्र, छोटे बड़े का कायदा, नियंत्रण, संस्कार, परंपराएं, त्याग, जिम्मेदारियों का वहन, खत्म होती जा‌ रही है, जो वैवाहिक जीवन का मुख्य आधार होती है।

 

*आभार और अभिनंदन के साथ*??

* अशोक गोयल*  ✍️✍️✍️✍️

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