वंडर गर्ल – जान्हवी पंवार

वो केवल नौ साल की थी, जब उसको ‘वंडर गर्ल ऑफ़ इंडिया’ के टाइटल से नवाज़ा गया था। इसका नाम जाह्नवी पंवार है और इस समय वो केवल 14 साल की है ।मात्र 14 साल, जिस उम्र में बच्चे 9वीं या 10वीं कक्षा में पढ़ रहे होते हैं, उस उम्र में जाह्नवी दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए के सेकंड ईयर में पढ़ रही है। क्यों है न कमाल की बात ये। पढ़ाई के इस असाधारण रिकॉर्ड के अलावा वो गाती भी अच्छा है।

  मालपुर गांव में जन्मी जाह्नवी के पिता एक सरकारी शिक्षक हैं और मां एक कुशल गृहणी।होनहार जाह्नवी को आठ विदेशी लहजों (Foreign Accents) में महारत हासिल है। इसके अलावा उसको बेसिक फ़्रेंच, जापानी, हिंदी और हरयाणवी भाषाओं का भी ज्ञान है।

 

जाह्नवी के पिता ने बताया कि, ‘जब वो केवल 1 साल की थी, तभी उनको एहसास हो गया था कि उनकी बेटी अपनी उम्र के बच्चों से काफ़ी अलग थी.’

‘जब वो केवल एक साल की थी तब उसको 500-550 अंग्रेज़ी के शब्द पता थे. जब वो तीन साल की हुई तो उसका दाखिला नर्सरी में नहीं, बल्कि डायरेक्ट सीनियर केजी में कराया गया था क्योंकि उसने घर में ही वो सब चीज़ें सीख ली थीं, जो नर्सरी के बच्चों को सिखाई जाती हैं. जैसे-जैसे साल गुज़रते गए तो हमने स्कूल मैनेजमेंट से उनकी परफॉरमेंस के बारे में बात की, तो पता चला कि उन्होंने जाह्नवी की प्रतिभा, क्षमता और उसके नंबर्स को देखते हुए उसे एक ही साल में 2 कक्षाओं की पढ़ाई करने की अनुमति दे दी.’

 

 

बृजमोहन बताते हैं कि, ‘जब मेरी पत्नी गर्भवती थी, बाकी लोगों की तरह ही हमारी फ़ैमिली को भी विश्वास था कि उनके घर एक बाटे का जन्म होगा. लेकिन जाह्नवी के पैदा होने के बाद भी हमारे घर में जश्न का माहौल था. मेरी बेटी मेरा गर्व है. लड़कियां किसी भी सूरत में लड़कों से कम नहीं हैं.’

 

आज जाह्नवी ब्रिटिश, अमेरिकन, पोश, स्कॉटिश, ऑस्ट्रेलियन आदि एक्सेंट्स के साथ अंगेज़ी में बात कर सकती थी. हालांकि, लोग उसका मज़ाक न बनायें इसलिए वो इन एक्सेंट्स में कम ही बात करती थी. पर जाह्नवी के पिता ने UK और US में लैंग्वेज क्लासेज़ के लिए उसका ऑनलाइन एडमिशन करा दिया था.

 

जाह्नवी बड़े होकर एक बीबीसी न्यूज़ एंकर बनाना चाहती है और इसके लिए वो मॉस कम्युनिकेशन के कोर्स में एडमिशन ले चुकी हैं. इसके अलावा वो UPSC की परीक्षा की तैयारी भी कर रही है. जब वो खाली होती है कोई किताब नहीं पढ़ रही होती है, तब वो गाना जाती है और उनको रिकॉर्ड करती है.

उसकी याददाश्त बहुत अच्छी है. वो अंगेज़ी में पूरी भगवद गीता भी पढ़ चुकी है. अगर आप उससे किसी अध्याय के बारे में पूछेंगे कि उसमें क्या हुआ था, तो पूरे विस्तार में आपको पूरा वाकया सुना देगी.

अपनी बेटी पर गर्व करते हुए बृजमोहन बाकी पेरेंट्स को ये सन्देश देना चाहते हैं कि भले ही हम अपने काम में कितने ही व्यस्त क्यों न हों, पर हमको अपने बच्चों के लिए ज़रूर निकलना चाहिए ये उनका हक़ है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो पढाई में अच्छे हैं या नहीं, लेकिन आपको उनपर विश्वास होना चाहिए और उसकी मदद करनी चाहिए ताकि वो अपने सपनों को पूरा कर पाए।

 

 

 

 

 

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