लॉकडाउन बनाम आफत पार्ट 2

“लॉकडाउन बनाम आफत “पार्ट2!!

वैसे तो हम आरामोशान से रहते हैं,
बस अपनी कुंडली की वजह से थोड़े परेशान से रहते हैं।।
लॉक डाउन है, तो पतिदेव काम पर नहीं जाते हैं,
घर पर पूरा ऐशो आराम फरमाते हैं।।

हम एक दिन अच्छे खासे सो रहे थे,
हमारे पतिदेव स्मार्टफोन की दुनिया में खो रहे थे ।।
तभी अचानक food Blog पर नजर पड़ी,
उनकी आंखें हो गई बड़ी -बड़ी।।
देखा करके झूम ,तो दिमाग गया घूम।।

चलो रसोई में केक बनाते हैं ,
पत्नी की को सरप्राइज दिखाते हैं ।।
रसोई में मच ग्ई अफरा-तफरी,
डिब्बा गिरा, सूजी गिरी, डिब्बी गिरी ।।

थोड़ी देर बाद हम जागे, रसोई की तरफ भागे।।
रसोई से बढ़िया खुशबू आ रही थी ,
हमारे दोनों नथुनों में जा रही थी ।।
पतिदेव इठलाकर बोले,
जानेमन! यह लीजिए केक,
जो कि हमने करा है बेक।।

हम खुशी-खुशी दौड़े-दौड़े प्लास्टिक का” केक वाला” चाकू लाए ,
केक पर चलाएं ।।
पर केक की जगह चाकू के दो टुकडे हमने पाए।।
फिर हम लोहे का चाकू लाए, केक पर आड़े -तिरछे, टेढ़े -मेढ़े बहुत चाकू चलाए।।
पर एक छोटा टुकड़ा भी केक से अलग ना कर पाए ।।

चाकू हो गया टेढ़ा मेढा़,
पति देव ने कुछ भौंहो को सुकेड़ा ।।
फिर पति देव ने की जोर अजमाई,
लेकिन कोई सफलता हाथ ना आई।।

हमने कहा मेहनत कर ली बहुत सारी,
अब तो लाओ आरी।।
पतिदेव की आंखें पनीली, और मन हुआ कुछ भारी,
फिर हमने कहना किया जारी ।।
कोई नहीं !कल गौशाला जाएंगे,
गौ माता को खिलाकर धन्य भाग पाएंगे।।

यह केक-वेक सब बच्चों जैसे चोंचले हैं ,
बड़े रईसों के ढकोसले हैं ।।
हमको तो दाल रोटी भाती है,
क्योंकि हमें वही बनानी आती है।।

पतिदेव आंखों में आंसू भर कर बोले,
तुम खाने के साथ बातें भी अच्छी बनाती हो ।।
मेरे दिल को जो सुकून दे ,
वही कह जाती हो ,वही कह जाती हो।।।।।।।।।

।।।।हीतू सिंगला।।।।

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