रंगोली

तीन रंगोंलियां

तीन रंगोंलीयां टीवी के अंदर !
तीन रंगोंलीयां टीवी के बाहर!
टीवी के अंदर की रंगोलीयां हैं…
रंगोली कार्यक्रम में, फिल्म रंगोली,
का गाना, रंगोली सजाओ रंगोली सजाओ।
टीवी के बाहर की रंगोलीयां हैं…
दिपावली की रंगोली,मन के तरंगों की रंगोली,
कुदरत की रंगोली।
एक बार दिपावली रविवार के दिन,टीवी में ,
रंगोली कार्यक्रम में, रंगोली फिल्म का गाना आ रहा था…
रंगोली सजाओ (२)
टीवी के बाहर , दीवान कक्ष में,
मैं रंगोली सजा रही थी, दिपावली के लिए…
मेरी गतिहीन रंगोली में, हूबहू रंग भरने हेतु,
याद आगयें मुजे, कुदरत के रंग,
कुदरत की करामात के रंग …
हमारी कुदरत है…स्वयं संचालित रंगोली।
कुदरत की रंगोली में तो, सभी रंगों जिवंत हो जातें हैं।
कुदरत की रंगोली तो लयबद्ध नृत्य भी करतीं हैं।
साथ में सुरीला संगीत भी है।
सृष्टि के आरंभ में, सूरज से छूटी गोली,
हमारी पृथ्वी,जो है थोड़ी सी भोली।
अपने आप में सजाती है, एक अजीब रंगोली।
कुदरत की रंगोली के रंगों, अपना रूप दिखाने
चहल-पहल करके धरा को सजाते हैं।
कुदरत की रंगोली में, रंगों की सजावट…
तरह तरह से होती हैं, जैसे
पर्वत श्रृंखलाओं, झरणाओं, नदियों, रत्नाकरों
जंगलों, खेतों खलिहानों, संपूर्ण जीव सृष्टि।
सुंदर निर्जिव सृष्टि।
विज्ञान की भाषा में, सूर्य एवं धातुओं निर्जिव हैं।
विज्ञान ने हमें सजीव एवं निर्जिव की कुछ,
बारिक भेद रेखाओं बतायीं हैं। किंतु,
विज्ञान यह भी कहता है: _
प्रत्येक पदार्थ में,अणु परमाणु होता हैं।
हम यह कहते हैं:_
कण कण में भगवान है । अगर,
अरूणोदय नहीं होगा तो???
रजनी के कंबल में, केवल एक ही मिश्र रंग होता…
केवल काला रंग।
पृथ्वी के भ्रमण, परिभ्रमण के कारण ही तो,
सूर्योदय _सूर्यास्त, दिन_रात, महीनें, सालों, युगों संभव हैं।
यह कुदरत की रंगोली का लयबद्ध नृत्य है।
कुदरत की रंगोली में संगीत भी अद्भूत है।
अगर धातुओं निर्जिव हैं तो फिर…
युरेनियम मैं बम्ब बनाने ,की शक्ति कहा से आयी???
मेरी रंगोली में रंगों भरते भरते, मैं
मन की लहरों से, कुदरत की रंगोली से ,मैं
बाहर आयी। मुजे प्रश्न हुआ…
आखिर, यह रंगोलीयां हैं क्या???
मेरा मनोमंथन से मुजे उत्तर मिलता है:_
टीवी की रंगोली यंत्र संचालित।
दिपावली की रंगोली मन: संचालित।
कुदरत की रंगोली स्वयं संचालित।
टीवी की रंगोली बला है!!!
मेरी रंगोली कला है।
कुदरत की रंगोली लीला है।
मन के सभी रंगों में, सबसे गहरा प्रेम रंग।
प्रेम चाहे फिर कोई व्यक्ति हो, चीज हो,
या फिर काम हो!!!
हर कार्य में अगर मिल जाता है, प्रेम रंग
तो वह हो जाता है, एक मनपसंद रंगोली।

 

भावना मयूर पुरोहित हैदराबाद
4/8/2020/

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