मेरी हार सोने का हार

 

मैं एक सीधा साधा मासूम सा व्यापारी आदमी हूं । पूरे हफ्ते तो छुट्टी मिलती नहीं, रविवार का दिन सोने में निकल जाता है। चार-पांच महीने से परिवार के साथ बाहर नहीं गया । आज रविवार था ,छुट्टी का दिन था, बीवी बच्चों को प्रॉमिस किया था कि इस संडे घूमने चलेंगे । तो मॉल में गए ,फिल्म देखी, खाना खाया , फिर थोड़ा घूमने लगे।।
श्रीमती जी एक आर्टिफिशियल ज्वैलरी शाँप देखने लगी, एक हार देख कर बोली , यह बहुत सुंदर है ,मैं ले लेती हूं । हमने भी पुरुषत्व दिखाते हुए कह दिया कि। “प्रिये” कोई मौका आने दो “सोने का हार” ले कर देंगे । फिर हम सब घर वापस आ गए ।। श्रीमती जी जी आज ज्यादा ही खुश थी । मैं पानी लेने किचिन में जाने लगा तो बोली अरे ! मैं लाती हूं ना , रात को शयन कक्ष में आकर कहने लगी कि पैर दबा दूं, पूरा दिन घूमें हो दर्द कर रहे होंगे । मैं भी यह सोच कर खुश था ,कि कभी -कभी बीवी बच्चों को बाहर ले कर जाना चाहिए घर का माहौल बदल जाता है ।
सुबह तो हद हो गई, मेरे तीन बार कहने पर बनने वाली चाय बिना कहे हाजिर हो गई वह भी एकदम कड़क । नाश्ते में भी मजा आ गया, मैं दुकान जाने के लिए जूते ढूंढने लगा,, तो चमचमाती जूते लिए श्रीमती जी हाजिर हो गई। यह लो जूते, जाते जाते मुझे कहने लगी आज से पूरे 1 महीने बाद मेरा जन्मदिन है, याद है ना, मैंने भी कह दिया। यह भी कोई भूलने की बात है। मैं चला गया। (मेरी आदत अक्सर भूलने की है कल की माँल वाली बात भी भूल गया) अब तो घर आऊं तो श्रीमती जी गुनगुनाती मिले, जाऊं तो हँसती मिले, अच्छा खाना मिले, अच्छे प्रेस कपड़े मिलें, वह भी प्यार से । अक्सर पूछ लेती थी कि दुकान का धंधा कैसा चल रहा है मैं भी कह देता था अच्छा चल रहा है। और वह भी खुश हो जाती थी।
मैं सोचने लगा, हर महीने परिवार के साथ बाहर जाना चाहिए घर में सुख शांति रहती है लेकिन मैं भूल गया कि यह (तूफान से पहले की शांति थी) इसी तरह एक महीना निकल गया ।जन्मदिन का दिन आ गया । मैंने सुबह सुबह देवीजी को साड़ी गिफ्ट की । खुश हो गई, पूरा दिन फिल्म देखने , खाना खाने में निकल गया रात को शयनकक्ष में आकर बोली, मेरा असली गिफ्ट कहां है ????? मैंने मासूमियत से कह दिया “सुबह दिया तो था पसंद नहीं आया ” बोली !मजाक मत करो !आप तो “सोने का हार” लाने वाले थे ना , मैंने भोलेपन से पूछा ??कब!!!!!! देवी जी तो बस फट पडीं।।। आंखों से भिगोने लगी ।बोली— 1 महीने पहले तो कहा था मौका आने दो सोने का हार ला कर दूंगा, मैं 1 महीने से इंतजार कर रही हूं।।। आपको इतना प्यार और सम्मान दे रही हूं।।। मुझे क्या पता था आप हार नहीं लाओगे ।
मैं हतप्रभ सा देवी जी के भीगे चेहरे को देख रहा था । वे रोए जा रही थी, 1 महीने की फ़्लैश बैक स्टोरी मेरी आंखों के सामने तैर रही थी । मैं बिना गलती किए किसी अपराधी की भांति उनके आगे नतमस्तक बैठा था, मेरा मुख रुपी तरकश शब्दों के वाणो से खाली था। मैं निरीह नेत्रों से उन्हें देख रहा था, आज स्त्री मन को कभी न पढ़ने की सजा भुगत रहा था ।
वह तो रोते रोते सो गई, आज मुझे त्रियाहठ और बाल हठ का मिश्रित उदाहरण देखने को मिल रहा था, और मैं अपने आप को बहुत हारा हुआ महसूस कर रहा था।

हीतू सिंगला

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