मेरी डिग्रियां पैसे नहीं बनाती

“मम्मी आज कोई और काम नहीं करना सिर्फ मेरे नोट्स बनवाने में मदद करना है आपको” 12 वीं में पढ़ने वाली आहना ने सुबह उठते ही अपनी मां वर्षा को पूरे दिन का प्लान समझा दिया वर्षा ने भी मुस्कराते हुये हामी भर दी| 

जल्दी से सारे काम समेट वर्षा आहना के नोट्स बनवाने लगी| तभी बेटे का  फोन आया , ” मम्मी मेरे पैसे खत्म हो गये थे आपको बताया था ना” हॉस्टल में रहकर पढ़ने वाला बेटा लगभग रुआंसा होते हुये बोला| “हां बेटा मुझे याद है ,पापा ने पैसे भेज दिये हैं दो दिन पहले ही, तू चेक कर जल्दी” हफ्ता भर हो गया था बेटे के पैसे खत्म हुये दो दिन पहले पति ने कहा था कि मैं डलवा दूंगा, अभी तक बेटे को पैसे नहीं मिले ये सोच वर्षा को चिन्ता हुई| 

“मम्मी आप क्यों पापा के ऊपर छोड़ देती हो, वो हमेशा गड़बड़ कर देते हैं, पता है ना आपको” बेटा खीझते हुये बोला| 

आहना को नोट्स समझा कर उससे सॉरी बोला और जल्दी बैंक की ओर दौड़ी| घर से दूर बेटा बिना पैसों के कैसे गुजारा कर रहा होगा ये सोच मां का दिल बैठा जा रहा था| पति की लापरवाही पर गुस्सा भी बहुत आ रहा था| तेज कदमों से वर्षा बैंक में दाखिल हुई, काउन्टर के सामने अच्छी खासी लम्बी लाइन लगी थी, कुछ देर में बैंक बंद भी होने वाली थी, क्या करूं कैसे करूं के बीच उलझी वर्षा ने एक कर्मचारी से बात की तो वो मशीन की ओर इशारा करके चला गया| पैसे ट्रांसफर करने वाली मशीन थी, यहां भीड़ भी नहीं थी क्योंकि मशीन का सिस्टम कम लोग ही जानते थे| वर्षा सीधे मशीन की ओर गयी, एक एक करके निर्देश फॉलो करती गयी और पैसे जमा करके रसीद ली| आस पास लोग उसे घेर कर खड़े हो गये, जल्दी जल्दी वर्षा ने दो चार और लोगों के पैसे जमा करवाये और घर की ओर भागी|

 

रास्ते में याद आया बिजली का बिल भरना था, फटाफट उसे भी जमा करवाया, फिर ध्यान आया कि बेटी की कुछ किताबें कुरियर से आने वाली थीं क्यों ना उन्हें भी पता कर लूं, सीधे वह कुरियर ऑफिस गयी वहां किताबें एक दिन पहले ही आ चुकीं थीं, इस लापरवाही के लिये ऑफिस वालों को जोरदार झिड़की लगा कर वापस आ गयी|

घर आते आते शाम हो गयी थी, पति घर पर अपने दोस्त के साथ बैठे हुये थे, वर्षा की अनुपस्थिति पुरुष ईगो पर चोट कर चुकी की, 

” इन औरतों के पति घर में ना रहें तो ये पूरा दिन बाजार में हीं काट दें” पति ने दोस्त के सामने धाक जमाते हुये तंज कसा|

“आशु (बेटा) का फोन आया था पैसे के लिये , आपने अब तक जमा क्यों नहीं किये थे” वर्षा ने सवाल किया तो पति का आवेश कुछ कम हुआ , ” ओह हो हो!!!!, मैंने अपने दोस्त को दिये थे पैसे लगता है वो भूल गया” पति ने जवाब दिया|

“ये काम तो आप भी कर सकते थे ना?” वर्षा ने फिर सवाल किया|

“नहीं हो रहा था तभी नहीं कर पाया था ना, बैंक का भी नया नाटक रहता है नयी मशीन आयी है पता नहीं क्या नौटंकी है” पति ने चिढ़ कर कहा|

बर्षा कुछ देर में चाय नाश्ता लेकर आयी|

“मम्मी प्लीज आप मेरे नोट्स चेक कर लेना” आहना ने कापी मां को देते हुये कहा|

” पढ़ी लिखी बीवी हो तो जिंदगी कितनी आसान हो जाती है भाभी जी को देख लो एम एस सी, बीएड जैसी डिग्रियों का असर दिखता है” मेहमान दोस्त ने वर्षा की तारीफ की तो पति ने उसकी बात हवा में उड़ा कर एक और तंज कसा ” हुंह बेमतलब की पढ़ाई, क्या फायदा ऐसी डिग्रियों का जब बनानी रोटी ही है, कलक्टर थोड़े ही बन गयी “|

 

 वर्षा बुरी तरह चिढ़ गयी पति का तंज सुनकर| बी ए पास पति के मुंह से इसी जवाब की अपेक्षा थी| जब भी कोई वर्षा की तारीफ करता उसके पति का पुरुष अहं हर बार सबके सामने वर्षा को नीचा दिखा जाता| पढ़ी लिखी पत्नी की बेईज्जती करने पर खुद की हीन भावना पर काबू पाना आसान हो जाता था|

“बिल्कुल सही बात है ये भाई साहब, जब रोटियां ही बनानी है तो पढ़ाई लिखाई का कोई फायदा नहीं सिवाय इसके कि कभी कोई फार्म भरने में किसी दूसरे का मुंह नहीं देखना पड़ता, कभी कोई मशीन इस्तेमाल करने में सहारा नहीं ढूंढ़ना पड़ता, अपने बच्चों की पढ़ाई में मदद कर देती हूं, उन्हें ट्यूशन के भरोसे नहीं छोड़ना पड़ता,  बच्चों के स्कूल कॉलेज प्रतियोगिताओं में जज बनने का मौका मिल जाता है कभी विशिष्ट अतिथि बनने का मौका मिल जाता है, बदलते जमाने के हिसाब से बच्चों को कैरियर चुनने में सलाह देने का मौका मिल जाता है और सबसे बड़ी बात….” वर्षा ने अपने पति की ओर देखते हुये कहा ” किसी की तरक्की से जलन नहीं होती और किसी की सरेआम बेईज्जती ना करने की समझ आ जाती है, बस इतना दुख है मेरी डिग्रियां पैसा नहीं बनाती” वर्षा सब एक सांस में बोल गयी| 

“मम्मी टीवी देखो शेयर मार्केट की खबर आ रही है” आहना ने अंदर से ही आवाज लगायी, वर्षा बिना किसी को कुछ बोले अंदर चली गयी|

दोस्त ने हैरानी से वर्षा के पति को देखा ” भाभी शेयर मार्केट में भी पैसा लगाती है?? तूने बताया नहीं !

 

 कुछ देर की खामोशी के बाद पति धीरे से बोला” ये कैसे होता है?” दोस्त से ज्यादा हैरानी से वर्षा के पति अपने दोस्त का मुंह देख रहा था | शेयर मार्केट उसके लिये सिर्फ शब्द के बराबर थे जिनका अर्थ उसे पता ही नहीं था ना कभी जानने की जहमत उठायी| वर्षा इन सब के बारे में जानती है पति को इसका इल्म ही नहीं था| वह कभी शून्य में देखता कभी अपने दोस्त की ओर|

इस पोस्ट के माध्यम से दो बातें मैं कहना चाहती हूं

१-” पढ़ी लिखी लड़की रोशनी घर की” ये लड़की भले ही पैसे ना कमाये लेकिन अपने घर परिवार की नींव को मजबूत बनाने में जो योगदान देती है वो किसी भी भारी भरकम बैंक बैलेंस से ज्यादा है, ये सच है कि  मां हर रूप में सबसे अच्छी शिक्षक होती है लेकिन जब इस मां के पास डिग्रियां अर्थात वह शिक्षित हो तो सोने पे सुहागा होता है| 

२- हर पत्नी को अपने पति की कामयाबी, सभ्य समाज में वाहवाही से फक्र महसूस होता है लेकिन कई आदमियों को देखा है जो खुद से अधिक शिक्षित पत्नी पाकर गर्व करने की बजाय हीन भावना से ग्रस्त हो जाते है और गाहे बगाहे सबके सामने उसे नीचा दिखाने में ही उनके पौरुष को बल मिलता है| क्या पत्नी के बीस होने पर खुद के उन्नीस होने में कोई शर्म की बात है, ये रि१ता तो बराबरी का माना जाता है ना फिर क्यों पत्नी की तारीफ नहीं पचायी जाती??

धर्‍यवाद

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आपकी 

प्रज्ञा तिवारी

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