मीना जी का मी टाइम

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मीना जी…हमारी तरह ही प्यारी सी होम मेकर है..या यूँ समझ लो कि हममें से ही एक है..प्यारे से पति है…जी हाँ प्यारे है..बिल्कुल आपके हमारे पतियों जैसे…प्यारे प्यारे  दो बच्चे है, हमारे बच्चों जैसे….और प्यारी सी सास है..ललिता पवार जैसे तो नहीं…पर जैसे सास होती है नार्मली वैसी..तो मीना जी भी खुश ही थी आपनी लाइफ में…बिल्कुल वैसे जैसे हम खुश है अपनी लाइफ में…वही सुबह से शाम तक बस काम काम..बच्चे सम्हालो ,पती को सम्हालो, सास को भी सम्हालो… बस ऐसे ही चल रहा था..कि मीना जी नें पढा माँ खुश तो परिवार खुश…फिर तो वो पढ़ती गई बहुत सारी कहानियां बहुत सारे लेख ..माँ  क्यों खुश नहीं ,कैसे माँ की खुशी से परिवार की खुशी है..और कैसे माँ को अपने लिए भी समय निकालना चाहिए….तो अचानक मीना जी के अंदर का मैंं जाग गया…सही तो कह रहे हैं सब..कैसे ब्युटीफुल थे हम शादी के पहले..एकदम कटरीन दिखते थे..अब देखो.काँता बाई बन गए हैं…हमको भी चाहिए.. वो क्या बोला था…हाँ “मी टाइम”।

शाम को जब मीना के पति जी आए तो उन्होंने ऐलान कर दिया.. कल हमारा “मी टाइम डे” है….पति जी हैरान फादर्स डे सुना था ,मदर्स डे सुना था ये मी टाइम डे क्या है भई…अरे मतलब हमारा दिन..कल जो हमें अच्छा लगता है हम वही करेंगे..वो तो तुम अब भी करती हो..किसकी मजाल जो तुम्हे रोके..पति जी ने कहा..अरे नहीं… मीना जी ने थोडा जोर  देते हुए कहा.. हमारा मतलब है ..कि कल हम हमारे पसंद का  पकाएगे.. पार्लर जाएगें.. गाने सुनेगे..शौपिंग करेगे..पूरा दिन हमरा होगा…पति जी ने समझाया उसे “मी टाइम” कहते है यनी पूरे दिन में कुछ समय अपने लिए निकालना..तुम तो पूरा दिन ही मनाने चली।मीना जी ने कहा कि रोज रोज कहाँँ होगा अपने लिये टाइम निकालना.. इसलिए महीने का एक दिन हमारा..फिर महीने भर की छुट्टी.. पति जी ने कहा तुम्हे समझाना बेकार है..जैसा ठीक लगे करो।मीना जी भी” मी टाइम डे “मनाने के सपने बुनते हुए सो गई।

सुबह उठी तो देखा 6:30 बडे बेटे का स्कूल है और पति जी के लिए बौक्स पैक करना है….फिर याद आया कि आज तो मेरा दिन है अपनी पसंद का कुछ बनाती हूँ..सोचते हुए किचन में गई कि क्या पसंद था मुझे…हाँ पूरी और आलू की सूखी सब्जी… लेकिन सुबह सुबह तेल वाली पूडी तो पति जी खाने से रहे ..फिर उनके लिए पोहे बनाओ…ऐसा करती हूँ..सबके लिए पोहे बना लेती हूँ ,लंच अपनी पसंद का बनाऊँगी..एक तरफ पोहे चढाए..और सोचा कि करेले की सब्जी बनाती हूँ ..खूब सारे प्याज डाल के..माँ बनाती थी..कितना पसंद था उसे…लेकिन गुड्डू और पति दोनो को नहीं पसंद करेले..उनके लिए गोभी मटर बना देती हूँ..फिर अपने लिए बना लूंगी करेले… फिर याद आया सासू माँ को गोभी से गैस होती है..उनके लिये.. टमाटर की तरी बना देती हूँ..करेले तो उनसे चबेगे नहीं..फिर दाल..सासू के लिए दलिया..इतना सब बनाने के बाद..मीना जी में करेले बनाने की हिम्मत ही नहीं बची..सबको भेजने के बाद घर ठीक किया और सोचा की पार्लर जाती हूँ..बेटी को सुलाया …सासूजी को बोला कि बेटी का ध्यान रखने को…उन्होने उसे ऐसे घूरा जैसे उनकी किडनी माँग ली हो..पर  पता नहीं क्यो कुछ  बोला नहीं। पार्लर पहुँची और कहा आइब्रो और अच्छा सा फेशियल करना…अब जैसे ही आइब्रो बनना शुरू हुआ..उन्हे याद आया कि..मैने गैस तो बंद किया था न…फिर सोचा अगर छुटकी उठ गई तो…सासू माँ को तो ठीक से सेरेलेक बनाना भी नहीं आता..फिर याद आया कि छत पर पापड रखे थे सुखाने को..कबूतर आ गए तो…पार्लर वाली ने कहा मैडम फेशियल के लिए ड्रेस बदल लीजिए…हमे नहीं कराना कहकर भागी घर।घर पहुँची तो छुटकी सो रही थी और सब ठीक था..सोचा गाने सुनती हूँ …अपनी पसंद के…दिल ढूंढता है फिर वही…ठंडी सफेद चादरों..अरे चादरें पडी हैं मशीन में उन्हें सुखाना है..भाग कर गई और चादर सुखाया…चलो कोई और गाना सुनती हूँ..पानी पानी रे..अरे पम्प चलाना तो भूल ही गई.. नीला आसमां सो…नीला से याद आया इनकी नीली शर्ट के बटन लगाने हैं..बटन लगाते हुए सोचा नए गाने सुनते हैं..स्वैग से करेंंगे सबका स्वागत…स्वागत..हाँ कल मेहमान आने वाले हैं..क्या बनाऊँँ उनके लिए..पुलाव..छोले, पूरी, रायता ,खीर…हाँ ये ठीक रहेगा..इतने में छुटकी उठ गई.. फिर गुड्डू आ गया..और शापिंग के लिए टाइम ही नहीं बचा … पीछे से पति जी भी आ गए.. आते ही पूछा..कैसा रहा तुम्हारा “मी टाइम डे”…मीना जी ने रूआसे स्वर में कहा…”मी टाइम” वो क्या होता है?

ये कहानी सिर्फ मीना जी की नहीं हम सब की है।हम चाहे लाख कोशिश कर ले..चाहे सारी परिस्थितियाँ क्यो न अनुकूल हो..फिर भी हम नहीं निकाल पाते हमारा..”मी टाइम”।

मंजुला दूसी

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