मंहगी मोहब्बत

आज फिर तुमपर नज़र पड़ गई  , तुम हमारी वो गलती जिसका ताउम्र हमें अफसोस रहेगा । काश !काश कि उस दिन हमने तुम्हे पीछे मुड़ कर न देखा होता “

आज भी याद है बनारस की गलियों मे घूमते हुए नज़र पड़ गई थी तुम पर। यूं लगा मानो बस तुम्हे हमारे लिए ही बनाया गया हो। तुम्हे देखकर ऐसा लगता था , जैसे बनाने वाले ने अपनी सारी कलाकारी तुम पर लुटा दी हो । तुम्हारा रंग , तुम्हारी छुअन,  बिल्कुल मक्खन की तरह और हल्की ऐसे जैसे रुई का फोहा।ऐसा नहीं था कि तुम्हारे अलावा किसी और को कभी देखा नहीं था पर तुम जैसा कभी कोई मिला ही नहीं था।

बिट्टू के पापा ने समझाया भी कि कोई और देख लो अरे, इसके बदले तो सोनें के झुमके ही लेलो।  क्योंकि इतना भाव तो सोना भी नहीं खाता जितना तुम खा रही थी। पर हमने तो कसम ही खा ली थी कि बाई गॉड अगर साथ चलोगी तो तुम वरना कोई नहीं। इसी गुस्से मे तो बाहर भी निकल आए थे कि लगा कोई पीछे से पुकार रहा है कह रहा है ” आगर ये तुझसे सच्चा प्यार करती है , तो पलट कर तुझे जरूर देखेगी”

पलट

पलट

पलट

और हम महामूर्ख पलट भी गए । ऊ का कहते है ” लव एट फस्ट साइट जो हो गया था ससुरा तुमसे” फिर बिट्टू के पापा को मनाया ना जाने किन किन कसमों वादों के जाल मे फंसाया तब जा के वो माने। फिर दुकान वाले भइया से इतना मोल भाव किये तब जाकर वो इक्कीस हजार दो सौ पचास रुपए मे माने और हम सीने से तुम्हे लगाए वापस लौटे मानो कोई खजाना हाथ लगा हो।

जब गिरधारी की शादी मे पहली बार तुमको पहने बाई गॉड हमसे नज़र ही नहीं हट रही थी लोगों की।आधी औरतेंं तो जल भुन के खाक ही हो गईंं थी और तो और लड़की वालों की तरफ से तो कोई रिश्ता भी माँगने आ गया था हमारा ।वो तो गुड्डू ने पीछे से मम्मी पुकार  लिया, वरना…।

उसके बाद दोबारा तुमको पहने थे मालती के रिसेप्शन मे ।सोंचे इस बार भी बिजली गिरा ही डालेंगे सबपर , लेकिन वो मीना की बच्ची ने टोक दिया “अरे भाभी ये तो वही सारी ना है ,जो गिरधारी की शादी मे भी पहनी थी  तुमने ”  उसके बाद तीन चार लोगों ने और पूछ लिया ।ओहो !बाई गॉड इतना गुस्सा आया हमको, अब बताओ भला इक्कीस हजार दो सौ पचास रुपया का साडी क्या एक ही बार पहनेंगे ?पर क्या करते खींसे निपोर के निकल आए।

अब तीसरी बार जो हुआ ना हमारे साथ क्या बताएं। दो तीन शादी ब्याह छोडकर  पिंकी की शादी मे फिर तुमको पहने ।डरते डरते वहां पहुंचे कि कोई फिर न टोक दे , तो क्या देखते है , तीन चार औरते डिट्टो हमारे जैसा साडी पहनी थी बताओ भला। हमारा तो माथा ही चकरा गया। हमने एक से पूछ ही डाला ” भाभीजी , हमने एक जैसी साडी पहनी है..ही ही ही…बिल्कुल सेम पींच है बाई गॉड ,कहाँ से ली आपने? “

“अरे बहन जी ये तो फेरीवाले से ली है हमने, अरे बिल्कुल कपडा गोटा सब एक जैसा है बताओ भला ” उन्होने भी खींसे निपोरते हुए कहा।

“अरे वाह कितने मे दे गया फेरीवाला ” अब तो हमारी हार्ट बीट आपे से बाहर  हो चुकी थी।

” अरे बहन बोल तो पाँच हजार रहा था , पर हम भी कम ना है एक हजार मे ले ली मोल भाव करके ” वो और भी कुछ कह रही थी पर हमे कुछ न सुनाई दिया। यूं लगा कि धरती फट जाए और हम उसमे समा जाएंं। धोखा !धोखा किया तुमने हमारे साथ । अपने रूप रंग के मोहजाल में फंसा लिया हमको।तब से बंद पड़ी हो इस अलमारी मेंं। किसी काम की नहीं हो । ना किसी को दे सकते है न पहन सकते है, बस तुमको देखकर आह भर सकते है और अफसोस कर सकते है कि “काश उस दिन हमने तुम्हें पलट कर न देखा होता।”

©® मंजुला दूसी

 

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