बहू चाहिये, बक बक करने वाली

हेमा जी बड़ी धूमधाम से इकलौती बहू ‘पिया’ का दरवाजे पर स्वागत कर रही थी. विदाई में रो-रो कर बेचारी की आंखें सूज गयी थी और थकान भी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी. मगर इसके बावजूद वो सारी रस्मों को मुस्कुराते हुए कर रही थी. अपनी बहू का ये मासूम रूप देख कर हेमा जी तो निहाल हुई जा रही थी.
दो दिनों में ही सबको समझ आ गया था कि नयी बहू तो बहुत बातें करती है. उसके पास हर एक सवाल के चार जवाब होते थे. पिया पूरी तरह बिंदास और खुश दिल लड़की थी. उसकी बक बक से उसका कॉलेज और घर दोनों ही चहकते ऱहते थे. उसकी माँ ने शादी से पहले उसे खूब समझाया कि ससुराल में कम बात करना. मगर इतने सारे नये लोग, नयी तरह की बातें थी कि पिया को याद ही नहीं रहता कि वह यहाँ एक दुल्हन है.
आते ही पिया ने सारी झिझक छोड़ के अपने सास ससुर से दोस्ती कर ली. कभी ससुर को पापा जी के बदले” हाय पॉप्स” कह देती कभी सासू माँ को “हलो सेक्सी” बोल देती. बेचारे उसके सास ससुर शरमा के हंस देते. गुस्सा करते भी तो कैसे, उनके घर में तो पिया एक खिलौने जैसी थी जो सबको बस हंसाती रहती ,कभी किसी का दिल दुखाना तो मानो सीखा ही नहीं था.

पिया के रूप में हेमा जी को एक नयी सहेली मिल गयी थी जिसके साथ ही उनकी शॉपिंग होती किटी पार्टी की महफिल जमती.मौका पड़ने पर डांट भी देती और डांट खा भी लेती.हर जगह दोनों साथ में ही दिखतीं. ससुर जी को व्हाट्सएप, फेसबुक का कीड़ा भी लगा दिया था पिया ने. कैसे पाउट वाली सेल्फी लेते है सब कुछ सिखा दिया उसने. अब सारा दिन ससुर जी अजीब अजीब मुंह बना कर सेल्फी लेते रहते.
स्वभाव से बेहद गम्भीर’ परम’ उसका पति तो पहली मुलाकात में ही उसके बचपने पर मोहित हो गया था.हालाँकि शादी घरवालों की पसन्द से हुई थी. मगर पिया से मिल कर कभी लगा ही नहीं कि वो उससे पहली बार मिल रहा है. परम उसे पत्नी बना कर बहुत खुश था.
शादी के कुछ दिन बाद पिया की दोनों ननदें और परम की बुआ जी नयी बहू से मिलने आयीं. मगर यहाँ तो नयी दुल्हन जैसी कोई बात ही नहीं दिखी उन्हें. फ्रोक पहने सास ससुर के बीच में बैठी सबके साथ हंसी मजाक करती हुई पिया बहू तो लग ही नहीं रही थी बेटी ही लग रही थी.
बुआ चूंकि परम की शादी में शामिल नहीं हो पायीं थी तो पहली बार नयी दुल्हन को इस रूप में देखकर भड़क गयी. पिया ने जैसे ही उनके पैर छुये तो आशीर्वाद के बदले ताने सुना दिये ” बहू तेरे माँ बाप ने नहीं सिखाया कि ससुराल में कैसे रहते हैं. ससुर के बराबर बैठ कर बक-बक कर रही हो और ये कपड़े?? सास ससुर का कोई अदब है भी कि नहीं.” ़शादी के बाद पहली बार ससुराल में होने का आभास हुआ आज पिया को.एक पल को सहम गयी वो. मगर आदत से मजबूर पिया ने हंस कर बुआ को “सॉरी” बोला और कपड़े बदलने चली गयी. सास ससुर और परम तीनों ये सब देखकर सन्न रह गये. गुस्सा तो बहुत आया सबको मगर बुआ सबसे बड़ी थीं और बहुत सालों बाद आयी थी इसलिये कोई कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाया.

“पिया पर गुस्सा क्यों कर रही हो बुआ सर पे तो इन्ही लोगों ने चढ़ाया है ना उसे.वो तो नाचेगी ही सर पर चढ़ कर” पिया की ननदों ने बुआ की हां में हां मिलाते हुए चिढ़ कर कहा . दोंनों ननदें तो घर का बदला हुआ माहौल देखकर पहले ही जल भुन कर राख हुई जा रही थी कि कल की आयी छोकरी के पीछे कैसे सब पागल हो गये हैं.
परम से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ वो उठ कर पिया को देखने चला गया. कमरे में जाकर देखा तो पिया साड़ी का पल्लू ठीक से पिन करने की कोशिश में पस्त हो चुकी थी.वह दुखी होकर पिया से माफी माँगने लगा.मगर पिया ने हंस कर बात टाल दी.
तभी हेमा जी कमरे में आयी.पिया का पल्लू ठीक करते हुए गला भर आया उनका “मुझे माफ कर दे बेटा .कुछ दिन की ही बात है बस. ”
“पहले ये बताओ मैं साड़ी में कैसी लग रही हूं? लग रही हूं ना एकदम पटाखा?” पल्लू लहराते हुए पिया ने बात को फिर पलट दिया.
“हां हां हीरोईन लग रही है तू बिल्कुल” पिया का माथा चूमते हुए हेमा जी ने कहा.
कितनी पागल है ये लड़की, इतना भी नहीं जानती कि माँ की आंखों से बच्चों के आँसू कभी नहीं छिप सकते. हेमा जी ने पिया की आंखों में झांकते हुये मन  ही मन सोचा.
अब ये घर में रोज की ही बात हो गयी. सास ससुर के साथ हंसती , गप्पें मारती पिया की कमियों को उसकी ननदें और बुआ खोज खोज कर निकालती. जब हेमा जी, उनके पति या परम उसकी तरफदारी करती तो दोंनों ननदें इमोशनल ब्लैकमेलिंग करके रोने लगतीं.फिर माँ बाप का दिल अपनी बेटियों के लिये पिघल जाता और कुछ बोल नहीं पाते.

अब घर का माहौल भी पूरी तरह बदल चुका था. सब कम ही बात करते . पहले जैसी मस्ती मजाक भी नहीं होती थी. पिया के सास ससुर का दम घुट रहा था, परम तो पहले भी कम बोलता था अब तो बिल्कुल ही शान्त रहने लगा. बाकी लोगों को पिया की चुगली करने से फुर्सत नहीं थी. एक पिया ही थी जो सबको खुश रखने की नाकाम कोशिश करती रहती.
एक दिन पिया अपनी सासू माँ के साथ रसोई में खाना बनाकर सबको बुलाने गयी. मगर कमरे में हो रही बातों को सुनकर सास बहू के कदम ठहर गये.
बुआ-“अंधेर है इस घर में तो.ससुर के सामने कोई ऐसे दांत दिखा कर बेशर्मी से हंसता है क्या.बराबर जुबान चलती है इसकी. परम तो है ही जोरू का गुलाम.”
बड़ी ननद – “पता नहीं कौन सा टोटका किया है इस लड़की ने.सबके सब लट्टू हैं उस पर. हमारी तो कोई सुनने को ही तैयार नहीं है.”
छोटी ननद- “कुछ नहीं बस मम्मी पापा अपने लिये ही गड्ढा खोद रहे हैं नयी बहू को इतनी आजादी दे दी है कि एक दिन वो सर पर चढ़कर ही नाचेगी.”
पिया तो सारी बातें सुनने से पहले ही रोते हुए वहां से चली गयी.मगर हेमा जी वहीं खड़ी रहीं. आज पहली बार पिया उनके सामने रोयी थी.
गुस्से से भरी हुई वो सीधे कमरे में जा धमकी.
” हां है मेरी बहू बक बक करने वाली क्योंकि मुझे चाहिये बक बक करने वाली बहू. कोई आपत्ति है किसी को?. बुआ जी जिसे आप बेशर्मी कह रही हो उसे जिन्दादिली कहा जाता है. वो हम सबको अपने माँ बाप से ज्यादा मानती है तो हम उसे अपनी बेटी क्यों नहीं मान सकते?  उसकी बातों की वजह से ही ये घर चहकता है. वरना मैं अकेली इन दीवारों में सर मार रही होती. बुआ जी अदब कपड़ों में नहीं नजरों में होता है.ये उसके माँ बाप के ही संस्कार हैं कि उसने कभी आपको पलट कर जवाब नहीं दिया.”

अपनी बेटियों की ओर मुखातिब हो कर वो बोलीं,” जिसे तुम लोग सर पर चढ़ाना कह रही हो उसे प्यार कहते हैं.और अगर वह मेरे सर पर चढ़े तो चढ़े तुम दोनों को भी तो मैंने ही अपने सर पर चढा रखा है ना.तुम्हारी सास तुम पर रोकटोक करे तो वो बुरी सास और वही मैं तुम्हारी भाभी से करूं तो अच्छी सास कैसे?? तुम लोग तब तक ताने मारना जब तक उसका सबसे मन ना फट जाये. फिर मत कहना कि मायके में कोई पूछता नहीं. इज्जत करो और इज्जत पाओ. आप लोग यहाँ जब तक रहें प्यार से रहें वरना जा सकते हैं.”
हेमा जी गुस्से में बाहर बालकनी में आकर बैठ गयी. “क्या बात है मदर इंडिया.महफिल लूट ली आपने तो” पीछे से पिया हेमा जी को छेड़ते हुए मुस्करा रही थी.
“पहले तू मुंह धो कर आ आंखें लाल हो रही हैं  और तू बंदरिया लग रही हैं” हेमा जी ने कहा और दोनों खिलखिला कर हंस पड़ी. और हंसी की गूंज उस कमरे तक भी जा रही थी जहाँ अब तक सब सदमें में बैठे हुए थे.
दोस्तो बात सिर्फ इतनी सी है कि तमाम पूर्वाग्रहों से परे हट कर अगर हर सास अपनी बहू को और हर बहू अपनी सास को बिना किसी खास रिश्ते में बंधकर, खुद की भावनाओं को सीमित करके अगर खुले दिल से अनजानी राह के हमसफर की तरह भी मिलें. तो भी निश्चित रूप से हर बहू पिया जैसी और हर सास हेमा जी जैसी खुद को पायेंगीं.वरना रिश्ते तो सभी अनमोल होते हैं.

धन्यवाद
Pragya Tiwari

Related posts

2 Thoughts to “बहू चाहिये, बक बक करने वाली”

Leave a Comment