बच्चों को जिद पर झुकें नहीं।

 

“मम्मा मुझे ये टॉय लेना है और वो वाली बड़ी चॉकलेट भी लूँगी मैं”, जैसे ही सिया ने अपनी मां रिचा से कहा ,रिचा ने झट ही उसे सब दिला दिया। रिचा मेरी अच्छी सहेली है हम दोनों साथ में घूमने गए थे उस दिन और फिर कुछ सामान लेने शॉप चले गए। मैंने जब देखा कि सिया जिस चीज को मांगती रिचा सब उसको दिलाते जा रही थी तब मुझसे रहा नही गया और मैंने कह दिया कि रिचा अभी सिया पांच साल की है तुम हर वो चीज उसको मत दिलाओ जो वो मांगती है उसकी आदत खराब हो जाएगी। रिचा ने बताया वो मानती नहीं है जिद करती रोटी है क्या करूँ सारा दिन घर पर तंग करेगी रोयेगी वो सामान नही दिलाया इसलिए मजबूरी है मेरी भी बच्ची के आगे नहीं चलती मेरी और रिचा थोड़ी मायूस हो गयी, ठीक नही लगा मुझे उस समय तो मैंने बात आगे नहीं बढ़ायी ।

सामान लेकर जब हम निकले रिचा ने कहा आगे वाली शॉप से आइस क्रीम लेकर आती हूँ सिया को आदत है जब यहां आते आइस क्रीम खाती है,मैं सिया के साथ खड़ी रही और रिचा भाग कर वनिला आइस क्रीम ले आयी लेकिन सिया ने जब देखा कि वो मेरे और खुद के लिए चॉकलेट आइस क्रीम लायी है, सिया ने रोना शुरू कर दिया और अपनी आइस क्रीम फेक दी जब रिचा ने उसे अपनी आइस क्रीम दी उसने फ्रेश वाली लाने की जिद की और रिचा भाग कर ले आयी । रिचा को उसकी बेटी ने ना तो उसकी आइस क्रीम खाने दे ना ही जरा सा सुकून दिया ।

 

मैं घर आकर यही सोचती रही कि कहीं न कहीं रिचा से गलती हो रही हो रही है ,वो अपनी बेटी की जिद के आगे अगर ऐसे ही झुकती रही तो आगे जाकर बहुत दिक्कत होगी उसको और उसकी बेटी को भी इसलिए मैंने दूसरे दिन ही रिचा से मिलने के फैसला लिया और शाम को उसको अकेले ही गार्डन में बुलाया ।

 

रिचा मैं भी एक मां हूं इसलिए बच्चे पालना कितना कठिन होता है जानती हो और तुम बहुत अच्छी मां हो लेकिन मैं एक बात कहती हूं, तुम अपनी बेटी की जिद के आगे झुकना बन्द कर दो ,वो एक दिन रोएगी या दो दिन रोएगी लेकिन धीरे धीरे वो समझ जाएगी की उसके रोने से हर चीज उसको नहीं मिलेगी लेकिन अगर उसके जिद करके रोने से तुम उसकी बात मानती रहोगी तो भविष्य में बहुत दिक्कत होगी । रिचा समझदार थी मेरी बात उसे बहुत अच्छे से समझ अा रही थी, मैंने आगे समझाया उसको कि “बच्चे  मिट्टी की तरह है और हम कुम्हार” । हम जैसे बनाएंगे वैसे ही वो बन जाएंगे।

 

बच्चों की परवरिश में खुद को थोड़ा कठोर बनाना बहुत जरूरी होता है, जिद करके वो अपनी हर बात मनाते हैं पर हमें जिद के आगे नहीं झुकना है। बाजार जाओ तुम दिलाओ उसको कोई भी सामान लेकिन उसकी पसंद का हर बार नहीं और सिया जो मांगती तुम दिलाती जाती हो ये मत करो रिचा।

 

रिचा समझ गई और अगले दिन से उसने सिया की जिद के आगे झुकना बन्द कर दिया ,सिया कुछ दिन सामान फेकती रही और रोई भी लेकिन कुछ दिन में समझ गई कि उसके रोने से उसकी जिद पूरी नहीं होगी और कुछ दिनों के नाटक कर बाद सिया ने भी वो जिद करना बंद कर दिया।

आज रिचा बहुत खुश होकर मेरे पास आती है और गले लग गई कि तुम अगर सही समय पर मुझे नहीं रोकती तो शायद मेरी बेटी और जिद्दी हो जाती लेकिन इतना बड़ा परिवर्तन उसमें आज तुम्हारी वजह से आया है और सच है बच्चों की जिद के आगे हमे कभी नहीं झुकना है तभी उन्हें एक अच्छी परवरिश दे पाएंगे।

 

चित्र आभार – गूगल

Related posts

Leave a Comment