बच्चे हमारे सपने पूरे करने की मशीन नहीं

घटना १-

छः साल के आरव ने जब रोलर स्कैट्स सीखा तो मानो उसके माता-पिता के सपनों को पहिए लग गए, बेचारे आरव को सुबह चार बजे उठा दिया जाता और पाँच बजे से उसकी ट्रेनिंग शुरू हो जाती,फिर घर आकर स्कूल के लिए तैयार हो कर स्कूल जाता, दिन भर स्कूल में भी अव्वल आने का बोझ रहता.फिर घर आकर शाम को स्केटिंग की प्रेक्टिस के लिए जाना होता,इतना सब होने के बाद जब वो मासूम स्टेट लेवल चैंपियनशिप में अपने से बड़े बच्चोंं को हराकर सेकेंड पोजिशन में आया,तो उसके पिता ने उसे सबके सामने वहीं एक थप्पड़ जड दिया क्योंकि वो फर्स्ट नहीं आ पाया.अब बेचारा आरव अपने फेवरेट स्केट्स तक पहनने से डरता है.

घटना २:

प्यारी सी चार साल की तुलिका, बिल्कुल किसी गुडिया की तरह दिखती थी, और जब वो अपनी तोतली जबान में बात करती या कोई राइम या भजन कहती, तो उसकी मम्मी वारी वारी जाती, फिर उन्होंने नन्हीं तुलिका के वीडियोज बनाकर इंटरनेट पर डालने शुरू किए, और कुछ ही समय में वो वीडियोज वायरल हो गए.ढेरों कंमेट्स और फैन फालोविंग हो गई, और कहीं न कहीं तुलिका की मम्मी का खुद के फेमस होने का सपना भी पूरा हो रहा था,अब तुलिका की हर खबर नेट पर उपलब्ध होती.वो कब सोई, कब उठी,कब खाई,कब बाहर गई, ऐसे ही जब वो अपनी माँ के साथ पास के पार्क में गई, तो कुछ बदमाशों ने उसकी मम्मी पर स्प्रे डाल दिया और तुलिका को उठा ले गए. काफी खोजबीन हुई पर कुछ नहीं मिला,आखिर एक हफ्ते बाद तुलिका को एक सुनसान जगह से बरामद किया गया,हरदम चहकने वाली तुलिका एकदम खामोश हो गई है,बिल्कुल डरी सहमी सी रहती है,उसे तो मालूम भी नहीं कि उसका कसूर क्या था.

 

घटना ३:

निशांत की मम्मी ने जब से टी.वी शो में देखा की एक छोटे से लड़के को शो वालों ने उनकी खस्ता हालत देखते हुए घर गिफ्ट किया, और उसकी मम्मी को भी स्टेज पर डाँस करने का मौका मिला,तो वो निशांत के पीछे पड़ी हुई है कि वो भी डाँँस सीखे,और ऐसे ही किसी रियलिटी शो में भाग ले, जबकी निशांत की डांस में कोई रूचि ही नहीं है, आखिर रोज-रोज के दबाव से तंग आकर निशांत ने कह दिया कि अगर उसपर ऐसे ही दबाव डाला गया तो वो घर छोड़ कर चला जाएगा.

ये तीन घटनाएं उदाहरण मात्र हैं, ऐसी कई घटनाएं हमारे आस-पास होती रहती हैं क्योंकि हमने अपने बच्चों को हमारे सपने पूरे करने की मशीन बना दिया है.क्यों हम उन्हे वो नहीं करने देते जो वो करना चाहते हैंं, उसपर बच्चों की हर उपल्ब्धि, हर बात की खबर तुरंत इंटरनेट पर डाल देते हैं और ये भी नहीं सोचते कि हम खुद हमारे बच्चों के लिए कितना बडा गड्ढा खोद रहे हैं,हमारी अपेक्षाओं के बोझ तले भले ही हमारे बच्चे दब जाएँ उससे हमें क्या ,हमें तो फेमस होना है,है ना?

बेशक बच्चों को प्रोत्साहित कीजिये,उनकी उपल्बधियों को फोटो और वीडियोज बनाकर संजोइये भी लेकिन अपने लिए ताकि आप फिर कभी भविष्य में उन्हे देखकर इन यादों को ताजा कर सकें,लेकिन उन्हे इंटरनेट पर डालकर उनके बचपन को खराब मत कीजिए.उनसे उतनी ही उम्मीद रखें जितनी वो खुशी-खुशी पूरी कर पाएं,अपने सपनों का बोझ उनपर मत डालिये, उनका मासूम बचपन इस बोझ को सह नहीं पाएगा.

इस बारे में आपके क्या विचार है, आपके सुझावों का इंतजार रहेगा, मेरी अन्य कहानियों के लिए मुझे फॉलो करें.

 

धन्यवाद ©मंजुला

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