पुष्प की अभिलाषा

।।।।।पुष्प की अभिलाषा।।।।
तो भैया आइए मिलते हैं बनारस के ,पुष्प कुमार चौरसिया जी, से। लोग इन्हें प्यार से पी.के. भइइइइया कहते हैं ।
पीके मतलब वह फिल्म वाला पीके हीरो नहीं, यह तो असली जिंदगी में हमारे मोहल्ले की हीरो (बनते) हैं ।और वैसे तो उपनाम वंशानुगत होता है लेकिन इनका उपनाम तो नाम के और इनकी आदतों के साथ इतना सटीक बैठता है, कि बस पूछो मत, “चौरसिया ” मतलब चारों तरफ से रसिया पूरे रसिक आदमी हैं हमारे भैया।
स्कूल में लड़कियों से रसिक मिजाजी, लेकिन कोई पटी नहीं । बाद में मोहल्ले में लड़कियों से ताका झांकी ,इनकी आदत है। वैसे बड़े ( बे) शर्म दार आदमी है किसी लड़की को आज तक छेड़ा नहीं है पर( छोड़ा भी नहीं है) शादी की उम्र हो गई है लेकिन… इन की (कु) विख्यात परिचय संपन्नता के कारण आसपास से तो रिश्ते नहीं आते हैं। तो अखबार में इश्तहार भी दिए जा रहे हैं। एकाध दुखी आत्मा आता भी है तो मुंह में पान, और घर का कोना-कोना लाल सुर्ख देख कर भाग जाता है ।
तो हमारे भैया की उम्र और सब्र जवाब देने वाले ही थे कि,,,,, एक फूल कुमारी जी के पिता जी को हमारे भैया पसंद आ गए। तो रिश्ते की बात आगे बढ़ी। “पुष्प कुमार + फूलकुमारी ” आहहह!!! क्या सुंदर संयोग है। भैया के तो सपनों में मासूम सी, सुंदर सी, सुकुमारी ,फूल कुमारी जी दिन-रात परिक्रमा कर रही थी। गोवा में हनीमून प्लान से लेकर बच्चों के नाम तक सोच लिए भैया ने।
पूरे जोर-शोर से लड़की देखने का प्रोग्राम फाइनल हुआ ।पीके भैया तो 2 दिन तक” गंगा मैया सलून” पर ही धरना देकर बैठे रहे। 2 दिन तक ब्लीच फेशियल का कार्यक्रम हुआ। बालों की कटिंग से लेकर कुर्ते की सेटिंग तक का कार्यक्रम मोह्हले के अलग-अलग शागिर्दों को सौंपा गया। मूंछ रखी जाए, या क्लीन शेव? यह मुद्दा 8 घंटे तक सुर्खियों में रहा । चार भमचे (भैया के चमचे )जूतों में अपना दिमाग घुसाए बैठे रहे। और दो भैया के लिए कपड़े फाइनल करने में।
लड़की से बात करने के गुर सिखाने के लिए तो उत्तम कोटि के गुरु बुलाए गए। जो “विवाहित”(लेकिन अपनी बीवी से आहित)थे। और प्रश्न उत्तर का एक खर्रा तैयार किया गया । हमारे भैया कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे तो दर्जी को चार बार नाप लेने के लिए बुलाया गया ।अम्मा बाबूजी के नए कपड़े भी बनवाने बनवाए गए से लेकर लड़की के सारे देने की सारी व्यवस्था की गई।
पूरा मोहल्ला ऐसा प्रसन्न था ,कि जैसे हमारे भैया चुनावी मैदान जीतने जा रहे हो। मोहल्ले की लड़कियों के बाप तो ऐसे खुश नजर आ रहे थे …..कि मोहल्ले के अत्यंत सुकुमार, हैंडसम(बम) का वैवाहिक जीवन शुरू हो जाएगा तो “”मौह्हला सुखी “”

तो सेंट की पूरी बोतल अपने अंदर उड़ेल अम्मा के लाल (हरे नीले पीले) अत्यंत उतावले महकते -(बहकते) घर से बाहर निकले,,,,, तो पूरे मोहल्ले के लड़के भी भैया की शादी के सपनों में महकने लगे।
भैया का पूरा परिवार पूरे साजो सामान के साथ लड़की के घर पहुंच गया अत्यंत भारी आभगत की गई ।भैया के चरण तो धरती मैया को स्पर्श ही नहीं कर रहे थे।
फिर आई मिस फूल कुमारी!!!!!!!! फूल तो थी मगर शायद गुलाब या चम्पा का नहीं , “गोभी “का ही समझ लीजिए !!अंग्रेजी का “काली +फ्लावर” शब्द हमारी फूल कुमारी के लिए सटीक शब्द था, शायद उनके ही किसी अंग्रेज भाई ने यह शाब्दिक नाम दिया होगा।
भैया के हाथ का समोसा तो गिरते-गिरते बचा और बाबूजी जी के हाथ की काजू कतली ना निकलने में ना उगलने में ,, फूल कुमारी जी के आने से भैया के परिवार पर तो भूकंप आ गया। देवी जी के दोनों तरफ दो भाई हाथ में लट्ठ लेकर उनके साथ बैठे भैया के ससुर (असुर )मौजूद साक्षात यमराज नजर आ रहे थे। हमारे दुबले-पतले पीके भैया मुश्किल से जान बचाकर भाग आए।
अब तो पुष्प भैया बस घर में बैठे रहते हैं। लड़कियों पर से विश्वास हो चुके हैं। बैठे-बैठे करंट खा जाते हैं। अब तो बाहर दिखते भी नहीं है।
अब पुष्प भैया की एक ही अभिलाषा है । कोई सुंदर सुशील लड़की मिल जाए ,तो हमारा घर बस जाए।

।।।। आप किसी लड़की को जानते हो तो बताइएगा।।।।

।।हीतू सिंगला।।

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