पहले से थिंकना चाहिए था

पहले से थिंकना चाहिए था
तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था में अभूतपूर्व बदलाव ने बहुत ही प्राचीन घटना क्रम  याद दिला दिया।
कक्षा आठवीं तक तो सब पढ़ लिया जो पढ़ाया गया, बिना दिमाग पर जोर दिए, अब 9वी में कस्बे में वहीं आवेदन किया, जहां सब करते थे  बिना सोचे कि किस संकाय से आगे की पढ़ाई करनी है, विज्ञान, कॉमर्स या आर्ट्स!
दसवीं में आते-आते यह महसूस हुआ ,अरे हमें तो गणित पढ़ना था लेकिन हम तो आर्ट्स के विषय चयन कर चुके थे अब तो गणित पढ़ने के रास्ते ही बंद!
मन में थोड़ी उत्कंठा उत्पन्न हो गई क्या करें? किस से सलाह लें? यही सब सोचकर के कस्बे में एक दीदी जो हमसे सीनियर थीं, और शायद कहीं बाहर पड़ती थी, पहुंच गए सलाह लेने, कस्बे में एक-दो ही लड़की  ही विज्ञान संकाय से पढ़ाई करती थी, और वही विदुषी समझी जाती थी ,उनका घर पूजा पूनम( मित्र) की गली से होकर पोस्ट ऑफिस के पीछे था । चूना और कंक्रीट से बनी हुई गुलाबी दीवारों की महक मैं अभी तक महसूस कर पा रही हूं।
लकड़ी की फंटी से बने हुए दरवाजे को धकेलते हुए खाट पर आंगन में बैठी हुई अम्मा से दीदी के विषय में पूछा तो उन्होंने मझली. ……आवाज लगाते हुए सुनीता दीदी को  बुलाया।
चोटी गुथते हुए हाथ में कंघा लिए दीदी बहार आईं
आओ…आओ …बताओ
व्यवहारिकता का  अ, ब, स,द भी नहीं आता था हमको,   हमने भी बिल्कुल सीधे बारूद की तरह दाग दिया अपना  प्रश्न,
‘एक बात बताइए कि हमने तो आर्ट्स के विषय लिए हैं, अब गणित पढ़ने का मन है क्या करें? ‘
अब कोई किसी से सलाह लेने जाए ,तो वह अपने आप को बहुत बड़ा प्रकांड ज्ञानी और सामने वाले को निहायत मूर्ख समझने लगता है , आजकल हमारी दृष्टि में लोग पहले से ज्यादा व्यवहारिक और नम्र या यूं कह लो ज्यादा स्मार्ट हो गए हैं कि अपनी स्मार्टनेस के कारण नम्रता से पेश आते हैं।
‘अब तो कुछ नहीं हो सकता’ उन्होंने भी बड़ा सपाट सा जवाब देते हुए और अपनी बात को सशक्त करने के लिए अंग्रेजी का सहारा लेते हुए कहा ‘ यह तो तुम्हें पहले थिंकना चाहिए था’
उनका यह कहना हुआ और हमारी डुग डुग करती नईया गुप्प से जाकर पानी में डूब गई …यह क्या हो गया हमने यह क्या  कर डाला….   उन्हें तो कुछ नहीं बोला पर मन ही मन सोचने लगे ‘अब तक  तौ ना थिंकौ  पर अब जरूर थिंक लेंगे लेंगे’..?……
बहुत-बहुत धन्यवाद इस विषय पर पर पर सोचने के लिए ,पहले से चली आ रही शिक्षण व्यवस्था को बदलने के लिए, आज के बच्चों को अपने मन स्थिति को समझ कर आगे  बढ़ाने के लिए, व्यवहारिक कालीन बिछाने के लिए। ??

 सिद्धि पोद्दार

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