पहले गृहलक्ष्मी सजा लूं

“इन जबरदस्ती की ऑफिस पार्टियों में जाना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं” भुनभुनाते हुये एक झटके में हिमानी ने शेल्फ खोली जो ड्रेस सामने दिखी वही हाथ में ले कर धड़ाम से शेल्फ बंद की|

“किट्टू रो रही है जरा तुम उसको सम्हालो तो मैं कपड़े बदल लूं” 

“तुम्हें दिख नहीं रहा मैं बिजी हूं” रोहन ने बिना देखे ही जवाब दिया|व

दो दिन से सलून के चक्कर काटने के बावजूद रोहन को आईने के सामने खड़े पिछ्ले एक घंटे से फेसियल मसाज करते देख हिमानी अंदर ही अंदर चिढ़ गयी, वैसे ये कोई पहली दफा नहीं था लेकिन ऑफिस के खास मौकों पर रोहन की अपने साज श्रृंगार को लेके दीवानगी चरम पर होती थी|

“तुम्हें तैयार नहीं होना?” आईने में देखते हुये ही रोहन ने बेपरवाही से पूछा |

“तुम हो जाओ तैयार ,तुम्हारा होना जरूरी है” तीन साल की किट्टू का मुंह धोते हुये हिमानी बोली |

“तुम स्मार्ट नहीं लगोगे तो ऑफिस की तितलियां तुम्हारे आस पास मंडराना छोड़ देंगी, मेरा क्या है एक बार फिर उस नीना का तंज सुन लूंगी हमेशा की तरह…’तुम्हारा तो आकर्षण ही खत्म हो गया हिमानी, रोहन को देखो.. ही लुक्स सो यंग’ हुंह क्या देखूं मैं? जिसको अपने आप से ही फुर्सत ना हो वो तो यंग ही दिखेगा ना……” गुस्से में चोटी को कुछ ज्यादा ही कसते हुये हिमानी अपने आप से ही बड़बड़ाये जा रही थी|

 

बेमन से ही हिमानी रोहन के साथ पार्टी में पहुंची, वहीं अति आत्मविश्वास से लबरेज रोहन की चहक देखते ही बन रही थी.. पहुंचते ही लड़कियों के बड़े से ‘वाऊ’ के काम्प्प्लीमेंट ने उसे सातवें आसमान पर चढ़ा दिया, इम्प्रेशन जमाने का कोई मौका रोहन हाथ से नहीं जाने दे रहा था, ये अठखेलियां देख हिमानी खून का घूंट पीकर रह गयी,

“नीना मैडम नहीं दिख रही” रोहन ने इधर उधर देखते हुये पूछा तो सारे दोस्तों ने उसे नीना के नाम से छेड़ना शुरु कर दिया, बिना ये देखे कि पास में बैठी हिमानी की आंखें डबडबाने लगीं थी|

“चलो शुक्र है वो नीना अभी नहीं आयी वरना रोहन की बॉस होने का सारा रौब मुझ पर ही झाड़ देती”… सोचकर हिमानी ने राहत की सांस ली|

“रोहन ये आदि क्यों नहीं आया अब तक? किसी ने पूछा तो… “वो देहाती..?” कहकर रोहन ने मुंह बिजका कर ना में सर हिला दिया|

“नया लड़का है यार कुछ भी कहो है बहुत मस्त मौला” 

आदि की तारीफ सुन रोहन के मन की जलन को हिमानी अच्छे से समझ पा रही थी|

तभी पसीने से भीगा एक दुबले पतले सुगठित शरीर वाला स्मार्ट सा नौजवान आता दिखा हल्की नीली जींस, सफेद हाफ बाजू की टी शर्ट, पैरों में स्पोर्टस वाले जूते और गोद में साल भर का बच्चा, “वो देखो आदि भी आ गया” दोस्तों में  सुगबुगाहट हुई, पीछे से एक मध्यम कद,भरे हुये १ारीर की लड़की आती दिखी, नैन नक्श साधारण मगर नख से सिर तक सजी धजी, सुंदर सी साड़ी में शरमायी सी… कुछ खास ना होते हुये भी पार्टी की रौनक अचानक बढ़ सी गयी थी, सब उसका मेकअप और कपड़े देख रहे थे मगर हिमानी उसके चेहरे की वो चमक देख पा रही थी जो सजावटी नहीं अंदरूनी थी  “भाभी जी हैं क्या?” दोस्तों ने आदि से पूछा तो उसने मुस्कराकर सबका परिचय अपनी पत्नी मिसेज अवनिआदि से करवाया,  

 

आदि ने बच्चा अपनी पत्नी को सौंप एक ग्लास पानी लिया और अपने मुंह पर छींटे मारे|

“क्या आदि एक तो इतना लेट आया उस पर भी ऐसे?”…”भाभी आज तो इस कूल ड्यूड को अपने साथ पार्लर ले जाना था ना”…बिखरे बिखरे आदि को देख दोस्तों ने चुटकी ली, 

“अरे बीबी बच्चे वाला आदमी हूं भाई, क्या फायदा सजने का?  अब मुझे कौन देखेगा?” बीबी की ओर देख आदि ने छेड़ा तो अवनि उसे घूरते हुये शरमा गयी|

“या तो मैं खुद सज लूं या पहले बीवी को सजा लूं अब जब घर की इज्जत गृह लक्ष्मी ही है तो क्यों ना इन्हें ही सजा लूं, कुछ भी कर लो दोस्तो लेकिन ऐसे समारोहों की रौनक पर तो इन लड़कियों का ही एकछत्र राज्य हमेशा रहेगा, हम मर्द तो बस ड्राइवर हैं कभी बहनों के कभी बीवियों के, वैसे भी बच्चा होने के बाद इन लोगों को खुद के लिये वक्त ही कहां मिल पाता है” पानी का घूंट गटकते हुये आदि ने कहा तो वहां बैठी हर महिला की नजर में आदि के लिये सम्मान आ गया| इतनी कम उम्र में इतनी परिपक्व सोच देखकर सब हैरान रह गये| हिमानी रोहन की चिढ़ को भी बखूबी समझ पा रही थी|

तभी सामने से नीना को आते देख हिमानी किट्टू को चुप कराने के बहाने वहां से चली गयी|

नीना सीधे हिमानी के पास पहुंची और रोती हुई बच्ची को गोद में लेकर चुप कराने लगी, हिमानी को थोड़ा हैरानी हुई मगर बस मुस्करा कर उसने नीना को थैंक्स बोल दिया|धीरे धीरे बाकी लोग भी वहीं जमा होने लगे.. रोहन भी अपने सूट की क्रीज ठीक करते हुये वहां पहुंच गया|

 

“वाह रोहन तुम तो बहुत चमक रहे हो, तेल में डुबकी लगाई थी क्या?” नीना का तंजनुमा मजाक सुन सबने हंसते हुये हां में हां मिला दी, रोहन के खुशी से फूलते मन में नीना ने अचानक कांटा चुभो कर हवा निकाल दी| मगर इतने पर भी वह चुप नहीं हुई…

“थोड़ा दूसरों पर भी ध्यान दो रोहन” हिमानी के रूखे बाल, मुरझाये चेहरे की ओर इशारा करते हुये नीना ने कहा तो रोहन बगलें झांकने लगा| “कब से देख रही हूं किट्टू लगातार रो रही है और तुम अपने सूट की क्रीज सम्हालने ने बिजी हाे, मैं  एक मां हूं और कोई पिता होकर ऐसी हरकत करे तो भई मुझसे बर्दाश्त नहीं होता.. आदि को देखो कितने प्यार से बच्चा सम्हाले हुए है, सीखो कुछ इससे..” पत्नि को साड़ी और बच्चा एक साथ सम्हालने में परेशानी ना हो इसलिये आदि बच्चे को खुद ही गोद में लिये रहा|

 रोहन की अब बोलती बंद थी, हिमानी रोहन की आंखों में छिपी शर्म देखने की कोशिश कर रही थी|

 अब तक जो दोस्त रोहन को घेरे हुये थे वो अब आदि और अवनि से बातें करने में मशगूल हो गये, आदि का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था कि उसके  बिना कोई दिखावा किये ही लोग उसकी ओर खिंचे चले जा रहे थे| रोहन एक कोने में बैठा बच्ची के साथ खेल रहा था|

हिमानी को खुद से ज्यादा रोहन पर दया आ रही थी| आज पहली बार उसे रोहन का यूं सबके सामने मजाक बनने पर ना चाहते हुये भी खुश होने का मन कर रहा था, पति की बेईज्जती सहन करना आसान नहीं था मगर दिल के किसी कोने को ठंडक महसूस हो रही थी| शायद रोहन भी अब समझ चुका था कि पत्नी की बेकद्री करने वाले समाज में भी सम्मान के पात्र नहीं होते|

 

एक औरत का सबसे बड़ा श्रृंगार पति पत्नी के खूबसूरत रिश्ते में छिपा होता है ये सम्बन्ध ही ऐसा है जहां खूबसूरती, खुशियां, सुख दुख, मान अपमान सब साझे होते हैं, किसी एक को अकेला छोड़ दूसरा आगे नहीं भाग सकता|

धन्यवाद

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आपकी दोस्त

प्रज्ञा तिवारी

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