पर्दे में रहने दो पर्दा न उठाओ

थोड़ा अप्रासंगिक पोस्ट.!

साधिकार आग्रह कि, अगर विचाराभियक्ति से सहमति न हो, तो पटल पर संवाद दीजिये, कोई रास्ता निकल जायेगा.!

इधर कुछ अजीबोगरीब पोस्ट फेसबुक पर अपनी जगह बनाये जा रहे है.! उन पोस्ट की सत्यता पर तनिक भी संदेह नहीं, पर हर सत्य को हर पटल पर परोस जाना उचित भी तो नहीं.!

विचाराभियक्ति की आजादी की मैं आरम्भ से ही पक्षधर हूँ, पर यह भी तो उचित नहीं कि, नितान्त व्यक्तिगत भावनाओं का सम्प्रेषण सामाजिक स्तर पर हो.!

आज जिस गति और मति से पुरुष या महिला वर्ग अपनी नितान्त स्वान्तः पलों की बातें परोस पा रहे है, मेरी व्यक्तिगत दृष्टि में यह उचित नहीं, क्योंकि इस पूरे आभासी पटल पर केवल वयस्क ही नहीं, बल्कि कम उम्र के बच्चे और युवा होते बच्चों की एक बड़ी फौज है, जिनमे हर नयी बात के लिए कौतूहल भरा पड़ा है.!

इसका मतलब यह तो नहीं कि, उन आत्मीय पलों के वर्णन भी यहाँ वांछित कर दिए जाएँ.!

छोटे बच्चों की परवरिश में माता ही नहीं, पिता की भी कई ऐसी भूमिकायें है, जो अत्यन्त निजी दायरे में होती है, जिसका वर्णन इस पटल पर शायद उचित नहीं.! महिलाओं के गर्भावस्था के दौरान भावनाओं के कई ऐसे मोड़ आते है, जिसमे केवल और केवल पति ही उन भावनाओं का साझेदार हो सकता है, भला उन भावनाओं की जगह यहाँ कैसे.?

पति-पत्नी, माँ-बेटा, पिता-पुत्री आदि कितने ही ऐसे स्नेहिल रिश्ते है, जिनको न तो शब्दभाव से हम व्याख्यायित कर सकते है, और न ही इन रिश्तों पर सामाजिक पटल पर टिप्पणी ही की जा सकती है.!

महिलाएं ही नहीं, पुरुष वर्ग भी अपनी कई शारीरिक और मानसिक बदलाव के अंधड़ से गुजरता होता है, उन पलों पर व्यक्तिगत और एकात्मभाव की प्रबलता ही व्यक्ति को जिजीविषित होने को मजबूत करता है, इसका सम्मान तो होना ही चाहिए.!

इन विषयों को सामाजिक पटल पर परोसने में एक पतली लकीर तो खींचनी ही चाहिये.!

छोटे बच्चे सबकुछ जानते है, समझते है, पर इतनी ही छोटी उम्र में आखिर सबकुछ बता ही देना है, इसकी जल्दी भी क्या है.?

बच्चों को स्वाभाविक रूप से परिपक्व और बड़ा होने देना ही श्रेयस्कर है, यह मेरी निजी राय है, हाँ.! दुनियादारी की बातों पर चर्चा करना भी उतना ही आवश्यक,  ताकि बच्चों के कोमल मष्तिष्क में थोपी हुई गंदगी या आभासी पटल से डाउनलोड की गई तस्वीरों के माध्यम से वे कुछ सीखे नहीं.!

‌विषय थोड़ा विवादित लग सकता है, सकारात्मक टिप्पणी मुझे भी कुछ सीख देगी,यह विश्वास.!

सिद्धि पोद्दार

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