दर्द और सुकून

रात के 8 बजे

101 बुखार

तेज ठंडी हवाएं

बदन दर्द से टूट रहा था ,बिजली कड़क रही थी ,जैसे अभी तेज बारिश होगी ,वो लड़का घर के बाहर बैठा था इंतजार में ,उसने 5 मिनट में कॉल करने को कहा था !

वाजिब है इंतजार करेगा ही ,उसको हर दर्द का मरहम उसकी आवाज में मिल जाने लगा था,दवाओं का पैकेट हाथ में था पर खाने का मन नहीं था , उसे पता था अभी कॉल आयेगा वो प्यार से बात करेगी और उसके हर दर्द को दूर कर देगी….सोचते सोचते वक़्त बढ़ रहा था जैसे हमेशा होता है ,वो थोड़ी रूकता है और वक़्त के साथ बढ़ रहा था उसका बुखार और सिर दर्द ,अब तो फट जाने की हद्द पार हो चुकी थी समय 8.35 को पार कर रहा था , wp पे अब भी उसका स्टेटस ऑनलाइन दिखा रहा था और टिक टिक करती सुई चल रही थी ,अब उस लड़के का बैठना भी मुश्किल हो चुका था ,वो उठा दवा खाई और सो गया क्यूंकि उसको उस मर्ज के इलाज के लिए दवा की ही जरूरत थी ,प्रेम से सिर्फ सुकून मिल सकता था , जो उसकी जिंदगी में नाम का भी नहीं है…..

बैक ग्राउंड में गाना चल रहा था…

  “तुझे कितना चाहने लगे हम”

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