जमाना क्यों जजमेंटल

भारतीय समाज में एक सिंगल लड़की का अकेले रहना एक नामुमकिन सी बात है । लोग हर वक़्त उसे जज करेंगे, उसे अपनी उम्मीदों पे खरे उतरने के लिए मजबूर करेंगे और लगातार आपको शादी करके किसी के साथ रहने के लिए मजबूर करेंगे । भारत जैसे देश में लोगों की सिंगल वुमन को लेकर बहुत ही अजीब राय है । लोगों को लगता है सिंगल लड़कियों का कोई करैक्टर नहीं होता और वो बहुत ज़्यादा बिगड़ी हुई होती हैं । लगातार उनके कपड़ों और रहन-सहन के तरीके को क्रिटिसाइज किया जाता है ।

 
अक्सर सिंगल लड़की जो इंडिपेंडेंट है और अपनी शर्तों पर ज़िन्दगी जीती है उसे उसके पड़ोसियों और रिश्तेदारों की और से अक्सर यह पूछा जाता है कि वो अपनी लाइफ में सेटल कब होगी ? क्या एक लड़की जो अपने खर्चे उठाना जानती है, कमाना जानती है और अपनी सभी ज़रूरतों का ख्याल रख सकती है क्या वो सेटल नहीं है ? क्यों सेटल होने के लिए शादी नाम का ठप्पा ज़रूरी है ?
 
फैक्ट यह है की किसी भी महिला के लिए अपने लाइफस्टाइल के लिए किसी को जवाब देना ज़रूरी नहीं है. वह पार्टी कर सकती है अगर वो चाहती है, वह जो चाहे पहन सकती है, और वह प्यार, मातृत्व कुछ भी फील कर सकती है । वो हर वो काम कर सकती है जो वो करना चाहती है या उसे ख़ुशी देती है। शादी करना या न करना और कब करना, प्यार करना है या नहीं और किससे, सिंगल पैरेंट बनना है या एक पेट को अपनाना है, ये सभी सिर्फ उसके फैसले हैं जो उसके जीवन को शेप दे सकते हैं, और वो जो चाहे वो कर सकती है।
 

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