जब मैं और तुम हम हुए..

जब मैं और तुम हम हुए,

जीवन के सारे रंग खिले

कोरा कोरा जीवन मेरा,

तुमने बसंती रंग भरे,

जब मैं और तुम हम हुए…

 

जीवन जीना है, जीते हैं,

हंसना रोना सब करते हैं,

सुख दुःख में जो साथ रहे,

वो साथी लेकिन कब मिलते हैं

साथ निभाना क्या होता है,

तुमने मेरे भ्रम हरे ,

जब मैं और तुम हम हुए…

 

रूठ जाना, कभी अपना बनाना,

कभी यूँ ही हँसते हँसते आंसू बहाना

जीवन के कड़वे अनुभव को भी

कैसे खट्टा चूरन चटाना,

ये सारे गुण तुमसे मिले,

जब मैं और तुम हम हुए…

 

मजबूरी है ये, दूरी नहीं,

प्रेम है, मजबूरी नहीं

खुल कर अपनी बात कहेंगे

निभा सके तो साथ चलेंगे

रिश्तों को ना ढोना होगा

सच्चाई से चलना होगा

प्रेम को खुल के जीने के,

ये हुनर भी तो, तुमने दिए,

जब मैं और तुम हम हुए..

 

जो बीत गई सो बात गई

ये मेरे लिए बस कविता थी

तुमने जीवन में आकर

इसे सार्थक अर्थ दिए

जब मैं और तुम हम हुए..

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