खुशी की माँ

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माँँ…..माँ …देखो  पेंटिंग काम्पटिशन में मुझे फस्ट प्राइज मिला,प्रिंसिपल सर ने भी मेरी खूब तारीफ कीकह रहे थे मेरी पेंटिंग स्कूल बुक में प्रिंट करवाएंगे… और पता इस बार बेस्ट स्टुडेंट का अवार्ड भी मुझे ही मिलेगा..सारे सब्जेक्ट्स में सबसे ज्यादा मेरे ही मार्क्स आए हैं……और …और पता माँ…वो जो रिया है न…अरे वही मोटी रिया…वो क्लास में गिर गई और बेंच के बीच में फस गई…. पूरी क्लास का हँस हँस के बुरा हाल हो गया…..ओके ओके स्वारी स्वारी.. ऐसे दूसरों पर नहीं हँसते…. अरे माँ बोला ना स्वारी….इधर देखो ना….कितना सोओगी…आच्छा उठो और मेरे बालो में तेल लगा दो…..देखो कैसे रूखे से हो रहे हैं…..पता आज मैं टिफिन ले जाना भूल गई…. नानी भी भुल्लकड़ हो गई हैं…उन्होंने भी याद नहीं दिलाया…फिर मेघा का टिफिन शेयर किया…बैगन लाई थी वो…..यक्क….आपको तो पता है मुझे बैगन बिल्कुल भी पसंद नहीं… पर क्या करती बहुत जोर की भूख लगी थी…बस एक पराँठा खाया…आभी भी भूख लग रही है….कितने दिन हो गए तुमने मेरी वाली मैगी नहीं बनाई….प्लीज आज बना दो ना….चलो उठो कितनी नींद आती है तुम्हे…मुझे तो आती ही नहीं है…नानी इतना थक जाती हैं कि बिस्तर पर पडते ही सो जाती है…और पापा तो काम में इतना बीज़ी रहते हैं कि कब घर आते हैं पता ही नहीं  चलता….और तुम भी कहानियां नहीं सुनाती आजकल….मुझे डर लगता है अकेले माँ…..अरे माँ चाचू की शादी है  न अगले महीने कितनी सारी शापिंग करनी है…मैं ना पिंक कलर का लहंगा लूंगी… और तुम न रेड कलर की साडी लेना….कितना अच्छा लगता रेड कलर तुम पर….माँ …माँ उठो भी…देखो तुम्हे देखकर मुझे भी नींद आ रही है…ऐसा कहकर नौ साल की खुशी वहीं अपनी माँ के बाजू में लेट गई…. और उसकी आंख लग गई…. पिछले एक साल से खुशी रोज आती है ….और अपनी माँ को पूरे दिन का हाल सुनाती है….पूरा हास्पिटल उसकी बातें सुनता है….बस उसकी माँ नहीं सुनती…क्योंकि पिछले एक साल से वो कोमा में है….लेकिन काश आज खुशी की आँख नहीं लगती… तो वो देखती कि उसकी बाते सुनकर उसकी माँ की आंखों से आँसू बह निकले थे।

मंजुला दूसी

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