खामोशी

खामोशी,..

अक्सर खामोशी से आती हैं..

और वह सारी बातें कह जाती हैं..

जो आवाजें नहीं कह पाती..

हर गम ,हर खुशी को बता देती है..

बिखरे मन को थोड़ा सहला जाती है..

 

खामोशी,..

अक्सर खामोशी से आती है..

हंसा जाती है ,रुला जाती है..

मन को आइना दिखा जाती है..

सब साफ नजर आता है..

जो इंसान देख नहीं पाता है..

खामोशी ,..

अक्सर खामोशी से आती है..

 

           डॉ पूर्णिमा द्विवेदी

Related posts

Leave a Comment