कोरोना की कहानी दादी माँ की ज़ुबानी

“दादी.. दादी हमें नींद नहीं आ रही है। एक कहानी सुनाओं ना।”, रीता और मोनु एक साथ बोले।
“अच्छा.. अच्छा कौन सी कहानी सुनानी है? राजा – रानी की या चुन्नू – मुन्नू की या भूतों वाली, बोलो कौन सी सुनाऊं?”, दादी ने कहा।
“नहीं .. नहीं दादी ये सारी कहानियां तो हमने बहुत बार सुनी है। इस बार आप कोई और कहानी सुनाओ,” बच्चों ने कहा।
दादी ने दिमाग पर जो़र डालते हुए कहा, “अच्छा आज मैं तुम दोनों को एक बहुत अलग और अनोखी कहानी सुनाती हूं। जाओं गोलू और मुन्नी को भी बुला लाओ।”
“दादी वो अभी खाना खा रहे हैं, उन्हें समय लगेगा। आप कहानी सुनाओ ना!,” रीता ने बेसब्री से कहा।
“मैं तुमलोगों को नई कहानी सुनाने जा रही हूं जो बहुत अलग है इसलिए उनको भी आ जाने दो,” दादी ने कहा।
“ठीक है दादी लेकिन आप ऐसी कौन सी कहानी सुनाने जा रही है जो अलग और अनोखी है? क्या है उस कहानी में? इंसान की है या जानवर की या किसी एलियन की। हां जरूर एलियन की होगी तभी तो अलग होगी। रीता सवाल पे सवाल किए जा रही थी। तभी गोलू और मुन्नी भी आ गए और चिल्लाते हुए बोलो, दादी हम आ गए.. हम आ गए। हमें भी कहानी सुनाओ ना।”
“हां अब चारों बच्चे आ गए। अब मैं तुमलोगो को कहानी सुनाऊंगी। हां.. रीता तू जानना चाहती थी ना कि मैं किसकी कहानी सुनाने जा रही हूं तो सुन ये ना किसी जानवर की कहानी है ना एलियन की। ये एक वायरस की कहानी है।”, दादी ने राज खोलते हुए कहा।
“वाई..रस, ये क्या होता है दादी?”, छोटी सी मुनिया बोली।
“हाहाहा, वाई..रस नहीं वायरस। तू इतना समझ की ये बहुत बड़ा राक्षस था जो हर जगह मौजूद रहता था।”
चारों बच्चों में रीता सबसे बड़ी थी और पांचवी कक्षा की छात्रा थी। बाकि तीनों बच्चे, मोनू कक्षा चौथी, गोलू कक्षा तीसरी और मुन्नी महज दो साल की थी।
“वायरस,  वाॅव इंटरेस्टिंग,” रीता एक्साइटेड होते हुए बोली। उसके साथ- साथ बाकि बच्चे भी खुश हो गए ।
“हां… वायरस और इस वायरस का नाम था कोरोना।,” दादी ने कहा।
21वी सदी में इस वायरस ने पूरी दुनिया में भारी तबाही मचाई थी।
“ऐसा क्या किया था इसने? दादी शुरू से सुनाईए”, रीता आश्चर्य से बोली।
तो सुनो…”कोरोना नामक राक्षस ने 21वीं सदी में भारी तबाही मचाई थी।  इस वायरस से इंफेक्टेड इंसान के संपर्क में आने से दूसरे इंसान को भी ये बीमारी लग जाती थी। बड़े, बच्चे और बुजुर्गो को निगल गया था। इस वायरस के डर से सभी लोग सालों तक अपने – अपने घरों में बंद रहे थे। बच्चे पार्क जाने और बाहर खेलने के लिए  तरस गए थे। स्कूल, काॅलेज, दफ्तर, बैंक, धार्मिक स्थल और सारे ऑफिस बंद हो गए थे सिवाय अस्पताल के। ये वायरस किसी परिवार के एक सदस्य को पकड़ता  फिर उसके पूरे परिवार और रिश्तेदारों को भी अपनी चपेट में ले लेता था और उसे बीमार कर देता था। कोई किसी के घर जाने से कतराता था और सभी लोग एक-दूसरे से दो  गज की दूरी से ही बातें करते थे। बच्चे अपने दोस्त से नहीं मिल पाते थे, बुजुर्ग टहलने नहीं जाते थे। सब घर में बंद रहते थे। सब्जी और राशन ऑनलाइन ही ऑडर होते थे। घर पर आने वाले सारे समान को गरम पानी में धोएं जाते थे। सड़कें सुनी और वीरान हो गई थी। उस साल कोई पर्व नहीं मनाया गया।”
बच्चे बहुत ध्यान से दादी की बातें सुन रहे थे। तभी रीता बोली, “दादी कोरोना हो जाने पर कैसे पता चलता था और उस समय कोई सुपर हीरो नहीं था क्या? जो उस वायरस से लोगों को बचा सके?”

” कोरोना हो जाने पर व्यक्ति को सर्दी – खांसी और फीवर होता था फिर धीरे- धीरे-धीरे सांस लेने में तकलीफ होने लगती थी। ये ही कोरोना के लक्षण थे। हाँ…..थे ना, हमारे कोरोना वारियर्स ( डाॅक्टर, नर्स, साफ – सफाई कर्मचारी और भी बहुत सारे लोग)। इन लोगों की बदौलत ही तो लोग ज़िंदा बच सके। बहुत लोग ठीक भी हो गए और सामान्य जीवन जीने लगे।” दादी ने कहा।
“ये तो बहुत ख़तरनाक वायरस था, इस वायरस से लोग कैसे बचते थे दादी?”
“इस वायरस से बचने के लिए बाहर से आने वाली हर एक वस्तु को सेनेटाइजर और गर्म पानी से साफ किया जाता था। सारे घर की सफाई भी सेनेटाइजर से की जाती थी। इसके संपर्क में आते ही वायरस मर जाता था। घरों से बाहर निकलने पर मास्क लगाना और दो गज की दूरी से ही बात करना, इसका सबसे कारगर इलाज था। सारे देश इसके वैक्सीन बनाने में जुट गए थे। साल दो साल बाद वैक्सीन आया तब जाकर सबको राहत मिली। “
“क्या बच्चे स्कूल जाने लगे, अपने दोस्तों के साथ खेलने लगे?”, गोलू ने पूछा।
“हां फिर धीरे – धीरे जीवन सामान्य होने लगा। स्कूल – काॅलेज, ऑफिस, धार्मिक स्थल सब खुलने लगे। लोगों ने दो साल बाद इकट्ठे तीज – त्यौहार मनाए। तो ये थी वायरस की कहानी कैसी लगी?” देखा तो मुन्नी हो चुकी थी।
“बहुत अच्छी लगी दादी,” तीनों बच्चे एक साथ बोले पड़े।
“चलो फिर अब सोने जाओ, सुबह स्कूल भी तो जाना है।”
“कल तो हाॅलीडे है, हम सब आज आपके साथ ही सोएंगे।”
“अरे वाह, चलो फिर तो हम अभी और मस्ती करेंगे, अब तुमलोग मुझे कोई कहानी सुनाओ।”
“हां दादी मैं सुनाता हूं, नहीं गोलू पहले मैं सुनाऊंगी तभी मोनु बोला नहीं मैं… इस तरह कहानी सुनाने का ये सिलसिला चलता गया……।”

 

 

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