सिद्धार्थ मंडला- इलेक्ट्रो शू के आविष्कारक


16 दिसंबर 2012 की वो रात को हम आज भी नहीं भूल सकते, उस निकृष्ट घटना का शिकार हम भले ही नहीं हुए थे, लेकिन उसका दर्द, उससे उपजा डर आज भी हर माँ की आंखों में साफ नज़र आता है। जी हाँ, यहाँ हम बात कर रहे हैं निर्भया हादसे की, 16 दिसंबर 2012 की रात जो जिस हैवानियत की वो शिकार हुई थी, उसे सोच कर ही हमारी रूह कांप उठती है। वो रात शायद स्वतंत्र भारत की सबसे स्याह रातों में से एक होगी, जब इंसानियत तार तार हुई थी। देश के लोगों में उठा गुस्सा जगह जगह ही रहे  प्रदर्शन के रूप में उठ रहा था, एक ओर जहां हमने उम्मीद की थी कि शायद अब सब कुछ ठीक हो जाएगा, शायद अब लोगों में समझ आएगी वहीं परिस्थिति उससे उलट ही हुई, देश में बलात्कार के मामले लागातार बढ़ते रहे।

Siddharth Mandala

 

लेकिन ऐसा नहीं है कि इससे किसी को कोई सीख नहीं मिली, या बस बुराई ही बढ़ी। ऐसे कई समाज सेवी संस्थान आगे आए जिन्होंने इस दिशा में कुछ बहुत बढ़िया काम किए, कई नौजवान सामने आए जिन्होंने औरतों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता दिखाई और इस दिशा में कुछ अच्छे आविष्कार किए।

उन्हीं में से एक हैं हैदराबाद के सिद्धार्थ मंडल। सिद्धार्थ सिर्फ 12 वर्ष के थे जब ये हादसा हुआ, उनकी माँ इस हादसे के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रदर्शनकारियों में शामिल होतीं और साथ ही उन्हें भी ले जातीं, उस उम्र में उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो किसके खिलाफ लड़ रहे हैं और क्यों ! धीरे धीरे उन्हें इस हादसे और इससे जुड़े ऐसे कई सवालों के जवाब उन्हें मिले, गंभीरता को समझते हुए उन्होंने इसके लिए कुछ ठोस कदम उठाने की सोची, 19 साल की उम्र में उन्होंने एक ऐसा फुटवियर बनाया जिसमें बिजली के झटके देने की शक्ति है। इस शूज का नाम “इलेक्ट्रो शू” है, किसी भी हमले के दौरान जिस स्त्री ने इसे पहना हुआ है उसे अपने अंगूठे से चप्पल या यंत्र को 5 सेकंड के लिए ज़ोर से दबाना है, जिससे इसमें लगा यंत्र एक्टिवेट हो जाएगा। एक बार यंत्र के ऐक्टिव होने के बाद जब आप हमलावर को किक करेंगे तो वो बिजली के झटके महसूस करेगा और कुछ सेकण्ड्स के लिए लकवाग्रस्त हो जाएगा ताकि आपको वहां से भागने का समय मिल जाएगा, उतनी ही देर में ये यंत्र जीपीएस द्वारा आपके परिजनों और पास के पुलिस स्टेशन को अलर्ट कर देगा।

ये पूछने पर कि उन्हें पैर में पहनने वाला यंत्र ही क्यों बनाया? उनका कहना था कि लोग अक्सर घर से बाहर निकलते वक्त चीजें घर पर भूल जाते हैं, लेकिन जूते या चप्पल पहनना नहीं भूलते, इसीलिए ये यंत्र अधिक कारगर और सुरक्षित साबित होगा।

Siddharth mandala

रीड एंड फीड देश के इस नौजवान की सोच और उसके प्रायास को नमन करता है, आशा करते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ी इनसे कुछ सीखे और अपने देश को आगे बढ़ाने में सहायक साबित हो।

रिपोर्ट एवम फ़ोटो  -सौजन्य इंटरनेट

Related posts

Leave a Comment