इंसानियत अभी जिंदा है…

सुनो रोहित आज आप कनक को संभालो मैं फटाफट खाना बना लेती हूं, अंशु ने जैसे ही रोहित से कहा,रोहित ने दुखी स्वर में कहा अंशु मुझे आज ऑफिस जाना है । अरे ऐसे कैसे आपको ऑफिस जाना है मैंने हफ़्ते भर पहले कहा था आपसे कि हमें आज कनक के वैक्सीनेशन के लिए जाना है और इतनी दूर अकेले कैसे जाऊंगी अब मैं। 
अंशु मैं जानता हूं मुश्किल होगा तुम्हारे लिए पर मेरी भी मजबूरी है,मैंने छुट्टी ली थी पर सुबह ही मेल आया कि कुछ बहुत जरूरी काम से छुट्टी कैंसिल कर दी है।
अंशु अब और नाराज हो गई ये क्या तरीका है रोहित आपके ऑफिस वाले ऐसा कैसे कर सकते हैं ,उन्हें पता है तीन महीने कि छोटी बच्ची है हमारी फिर भी छुट्टी कैंसिल कर दी शायद इंसानियत नहीं बची अब दुनिया मैं बिल्कुल भी। बस करो अंशु अगर जरूरी काम नहीं होता मैं नहीं जाता पर ऑफिस भी जरूरी है मेरे लिए कहते हुए रोहित ऑफिस निकल गया।
अंशु ने फटाफट बाई से काम कराया और तैयार होने लगी ,कनक के वैक्सीनेशन का चार्ट निकाल रही थी कि घर की घंटी बज गई, अरे सुनीता अभी काम कर के गई क्या हुआ फिर आ गई,सुनीता अंशु की मेड है। सुनीता ने अंशु के हांथ में बच्चों का कैप दिया ,दीदी ये लो बाहर बहुत गर्मी है और कनक को ऐसे बाहर बिना कैप के लें जाना ठीक नहीं अब जानती हो मुंबई कि गरमी वो भी मई महीने की , ये लो दीदी पहना कर ले जाना उसको अगर और घर नहीं होते मैं ही साथ चलती आपके,कहते हुए सुनीता चली गई लेकिन अंशु बस यही सोचती रही कि सुनीता कितनी अच्छी है।
अंशु ने कैब बुक की कनक को लिया और उसका समान का बैग और चली गई अस्पताल। काफी देर बाद डॉक्टर का नंबर आया, बच्ची को टीका लगवाया और घर जाने के लिए वापिस जैसे ही कैब बुक करने लगी ,एक घंटे तक कोई कैब नहीं मिली। अंशु का भी ऑपरेशन हुआ था छोटी बच्ची स्तनपान करती थी तो वो जल्दी थक जाती थी लेकिन हिम्मत करके हॉस्पिटल की सीढ़ी से नीचे उतरी और दूर दूर तक कोई ऑटो नहीं था। बहुत गर्म हवा चल रही थी ,अंशु ने हिम्मत करके बच्ची को कैप और अपने दुपट्टे से ढंक दिया और पैदल चलने लगी थोड़ी देर में उसकी हिम्मत भी जवाब देने लगी और इतने में उसके सामने से एक ऑटो निकला वो चाह कर भी आवाज ना दे पाई लेकिन थोड़ा आगे जाकर ही वो ऑटो पलट कर आने लगा और अंशु के पास रुका ,मैडम बैठो  कहां जाना है आपको मैं घर तक छोड़ देता हूं। अंशु ने भगवान का नाम लिया और बैठ गई ,भैया मुझे  त्रिशूल अपार्टमेंट जाना है। ऑटो वाले ने उसके घर के लिए ऑटो ले जाना शुरू कर दिया तभी उसने पूछा भैया आप पलट कर कैसे आए , मैडम जैसे ही आगे बढ़ा आपके हांथ में बच्चा दिखा और इतनी गरमी मै आप बच्चे को लेकर पैदल का रही थी इसलिए मैं लौट आया और मैं तो घर जा रहा था खाना खाने लेकिन जब आपको देखा बच्चे के साथ तो सोचा पहले आपको आपके घर पहुंचा दूं फिर अपने घर जाऊंगा।।
अंशु की आंखों में आसूं आ गए और उसका घर भी।  मीटर का बिल देखकर उससे ज्यादा पैसे देने चाहे अंशु ने तक ऑटो वाले भैया ने साफ मना कर दिया और जब उसने पूछा भैया मैं आपको खाना लाकर देती हूं तब ऑटो वाले भैया ने हंसते हुए कहा नहीं दीदी मेरी बीवी भी भूखी होगी मेरे संग ही खाना खाती है अच्छा अब चलता हूं।
अंशु तो घर आ गई लेकिन एक बात उसे समझ आ गई को सुबह उसने अपने पति से कहा था कि इंसानियत ही नहीं लोगों में वो गलत था आज ही भगवान ने उसे दिखा दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है |
 

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