आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है

एक डरावना शब्द जो कल तक शब्दकोष में कहीं गुम था, वह आज देश, समाज और घर में इस कदर स्थापित हो गया है कि हर कोई इससे डरा-सहमा है।हर आत्महत्या के पीछे कोई वजह होती है। अगर किसी समस्या के हल न होने की वजह से कोई आत्महत्या कर लेता है तो सोचने वाली बात है कि क्या मर जाने से उसका हल हो जाएगा। अगर हल हो भी जाए तो क्या वह उस क्षण के सुख को भोगने के लिए मौजूद रहेंगे? आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि परिस्थितियों से मुकाबला करने में है, चुनौतियों को स्वीकार करने और प्रतिबद्धता के साथ जुझारुपन दिखाने में है।

 
आत्महत्या समस्या से जूझते जीवन का अंत है, न कि उसका समाधान जिसके लिए वे मौत को गले लगाने के लिए मजबूर होते हैं। वास्तव में कोई भी दुख या तकलीफ जिंदगी से बढ़कर नहीं होती। हर व्यक्ति के जीवन में ऐसा दौर आता है जब सबकुछ खत्म-सा लगने लगता है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि हम खुद ही खत्म हो जाएं। हमारी यही समस्या है कि हम अपने दुखों को दूसरे के दुखों से तुलना किए बगैर ही सबसे बड़ा समझ बैठते हैं। जिंदगी कई बार इम्तेहान लेती है तो उसे लेने दीजिए और हौसले को बढ़ा कर रखिए। जब एक तिनका डूबते का सहारा हो सकता है तो फिर हम अंतिम कोशिश किए बिना मौत को वक्त से पहले क्यों बुलाएं?
 
   उन कमोजर क्षणों मे जीवन के अच्छे पलों को याद किजिए। हमे जीवन मिला है तो जरूर उसका कोई ना कोई कारण अवश्य होगा । उस कारण को खोजिए। आप से जुडी अपनो की खुशी को याद कीजिए। कोई भी कमजोर क्षण अपके जीवन का निर्णायक नहीं बन सकता।

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